शीतला माता मंदिर हादसा: प्रत्यक्षदर्शियों ने नहीं दर्ज कराए बयान, जांच अधिकारी आज जुटाएंगे अफसरों से जानकारी
ग्वालियर के शीतला माता मंदिर हादसे की मजिस्ट्रियल जांच में तीन दिन बाद भी कोई प्रत्यक्षदर्शी बयान देने नहीं पहुंचा। गुरुवार को प्रशासनिक अधिकारियों और शुक्रवार को पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज होंगे। हादसे में 16 लोगों की मौत हुई थी।
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शीतला माता मंदिर में हुए भीषण हादसे की मजिस्ट्रियल जांच में तीन दिन के भीतर कोई प्रत्यक्षदर्शी या आम नागरिक बयान दर्ज कराने नहीं पहुंचा है। प्रशासन की अपील के बावजूद किसी व्यक्ति ने जांच अधिकारी के सामने अपना बयान दर्ज नहीं कराया। कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर चल रही इस जांच में अब गुरुवार यानी आज प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
नए कार्यक्रम के तहत दर्ज होंगे बयान
जांच अधिकारी और अपर कलेक्टर सीबी प्रसाद ने जांच का नया शेड्यूल तय किया है। इसके अनुसार गुरुवार को हादसे से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े विभिन्न विभागों के प्रशासनिक अधिकारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इसके बाद शुक्रवार को घटना के दौरान मौके पर तैनात पुलिस अधिकारियों और पुलिसकर्मियों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए जाएंगे। जांच अधिकारी के अनुसार, इन बयानों के आधार पर हादसे से जुड़ी घटनाओं की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के बयानों के साथ सभी साक्ष्यों को संकलित कर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद रिपोर्ट जिला दंडाधिकारी को सौंप दी जाएगी।
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भीषण हादसे में 16 लोगों की मौत हुई थी
ग्वालियर के शीतला माता मंदिर में शनिवार रात करीब 1:30 बजे दर्दनाक हादसा हुआ था। धान से भरा एक ट्रक करीब 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से श्रद्धालुओं की भीड़ में घुस गया था। ट्रक की चपेट में 42 लोग आए थे। हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 41 लोग घायल हुए थे। मृतकों में दो सगे भाई और उनके चाचा भी शामिल थे। घायलों में दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
हादसे के बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। मंदिर से 500 मीटर पहले बैरिकेडिंग की गई है, जहां से बाइक तक को आगे नहीं जाने दिया जाता। इसके अलावा चीनौर की ओर से आने वाले भारी वाहनों को रोकने के भी इंतजाम हैं। इन तमाम व्यवस्थाओं के बावजूद ट्रक श्रद्धालुओं की भीड़ तक पहुंच गया था। मामले में लापरवाही बरतने पर एसएसपी धर्मवीर सिंह यादव नौ पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर चुके हैं।
