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शहडोल: छात्रावासों में ऐसा क्या हो रहा कि आधी रात सड़क पर उतर रहे छात्र-छात्राएं, कलेक्टर से मिलने की जिद

Sat, 10 Oct 2026 09:35 AM IST
शहडोल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शहडोल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शहडोल Published by: शहडोल ब्यूरो Updated Sat, 10 Oct 2026 09:35 AM IST
सार

शहडोल के गोहपारू कन्या छात्रावास में खाने और भवन संबंधी समस्याओं से परेशान 32 छात्राएं शनिवार तड़के तीन बजे पैदल कलेक्टर से मिलने निकल पड़ीं। 16 किलोमीटर से अधिक चलने के बाद अधिकारियों ने उन्हें समझाकर बस से वापस छात्रावास पहुंचाया। दो महीने में ऐसी पांचवीं घटना ने व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं।

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What is happening in hostels that students are taking to streets at midnight
समझाते अधिकारी।

विस्तार

शहडोल जिले के आवासीय छात्रावासों में रहने वाले छात्र-छात्राओं का अपनी समस्याएं लेकर पैदल कलेक्टर से मिलने निकलना प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। पिछले दो महीने में इस तरह की पांचवीं घटना सामने आई है। ताजा मामला गोहपारू कन्या छात्रावास का है, जहां खाने और भवन संबंधी समस्याओं से परेशान 32 छात्राएं शनिवार तड़के करीब तीन बजे छात्रावास से निकलकर पैदल शहडोल के लिए रवाना हो गईं। छात्राओं का कहना था कि वे कलेक्टर से मिलकर अपनी समस्याएं बताएंगी और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगी।

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जानकारी के अनुसार, छात्राओं के अचानक छात्रावास छोड़कर निकलने की सूचना मिलते ही अधीक्षक ने पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। पुलिस बल मौके पर पहुंचा और छात्राओं की सुरक्षा को देखते हुए उनके साथ रहा। मामले की जानकारी मिलने पर डिप्टी कमिश्नर, जनजातीय कार्य विभाग और पुलिस के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। तब तक छात्राएं शहडोल से करीब आठ किलोमीटर पहले निपानिया गांव तक पहुंच चुकी थीं। वे 16 किलोमीटर से अधिक पैदल चल चुकी थीं।
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मौके पर पहुंचे एसी ट्राइबल आनंद राय सिन्हा ने छात्राओं से बातचीत की और उन्हें समझाया। अधिकारियों ने बताया कि वे उचित समय पर कलेक्टर के सामने अपनी शिकायतें रख सकती हैं। समझाइश के बाद छात्राएं वापस लौटने के लिए राजी हो गईं। इसके बाद उन्हें बस से सुरक्षित छात्रावास पहुंचाया गया। अधिकारियों ने छात्रावास में ही छात्राओं की समस्याएं सुनीं और जल्द समाधान का आश्वासन दिया।

जैतपुर में भी सामने आया था ऐसा मामला
इससे पहले जैतपुर क्षेत्र में भी छात्र-छात्राओं के पैदल शहडोल पहुंचने का मामला सामने आया था। वहां करीब 200 छात्र-छात्राएं अपनी समस्याओं को लेकर लगभग 72 किलोमीटर दूर कलेक्टर से मिलने के लिए निकल पड़े थे। अधिकारियों ने छात्रों को समझाकर वापस भेजा, जबकि छात्राएं शहडोल पहुंचीं और अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं। खास बात यह थी कि संबंधित छात्रावास में कुछ दिन पहले कमिश्नर भी पहुंचकर छात्र-छात्राओं से चर्चा कर चुके थे।


छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर उठ रहे सवाल
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने छात्रावासों की व्यवस्थाओं और शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर छात्र-छात्राओं को अपनी बात रखने के लिए आधी रात में पैदल निकलने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है? क्या उनकी शिकायतों का समय पर समाधान नहीं हो रहा या जमीनी स्तर पर निगरानी में कमी है?

ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब तलाशना जरूरी है। जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, गोहपारू की छात्राओं से बातचीत की गई है और उनकी समस्याओं का जल्द निराकरण करने का आश्वासन दिया गया है। हालांकि, छात्रावासों में बार-बार सामने आ रहे ऐसे मामलों के स्थायी समाधान के लिए व्यवस्थाओं की समीक्षा और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है।

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