Shahdol: भगवान भरोसे जिला अस्पताल...वेंटीलेटर होने के बाद भी नहीं मिल रही सुविधा, सच्चाई जान हैरान रह जाएंगे
संभागीय मुख्यालय शहडोल जिले के कुशाभाऊ ठाकरे जिला अस्पताल का हाल बेहाल है। यहां वेंटीलेटर होने के बाद भी इसकी सुविधा मरीजों को नहीं मिल पा रही है। उसकी वजह है कोई भी वेंटिलेटर चालू हालात में नहीं हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
शहडोल जिले के जिला अस्पताल में बिना वेंटीलेटर के ही आईसीयू डिपार्टमेंट चल रहा है, जिससे गंभीर मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। हालात तो यह हो गए हैं कि अगर जिला अस्पताल में कोई सीरियस कंडीशन में मरीज आता है तो उसे वेंटीलेटर के लिए जिला अस्पताल से रेफर कर मेडिकल कॉलेज भेज दिया जाता है और इधर जिला चिकित्सालय से मेडिकल कॉलेज की दूरी लगभग 10 किलोमीटर की है। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ऐसे मरीज की जिसे वेंटीलेटर की आवश्यकता है और उसे अचानक मेडिकल कॉलेज भेजा जाए तो उस मरीज के क्या हालात होते होंगे।
जिला अस्पताल के आईसीयू में नाम के लिए दो वेंटीलेटर हैं और दोनों ही वेंटीलेटर बंद पड़े हैं। वहीं, जिला अस्पताल के ही कोविड वार्ड में चार वेंटीलेटर रख दिए गए हैं। शहडोल जिला अस्पताल मुख्यालय के हृदय स्थल में है, जहां रोजाना गंभीर मरीज आते हैं, लेकिन वेंटीलेटर चालू न होने की वजह से उन्हें जिला अस्पताल से तुरंत ही रेफर कर दिया जा रहा है, जिसकी वजह से कुछ लोग तो रास्ते में ही दम तोड़ रहे हैं।
क्या कहा सिविल सर्जन ने...
इधर, वेंटीलेटर को लेकर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉक्टर जीएस परिहार का कहना है कि आईसीयू में वेंटीलेटर दो हैं, लेकिन खराब हैं। जल्द ही उसे सुधार कराया जाएगा, मेंटेनेंस का काम चलने की वजह से वेंटीलेटर कोविड आईसीयू में दो रखे हुए हैं। जिला अस्पताल की स्थिति दिन प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीज या तो जिला अस्पताल में बिना वेंटीलेटर के ही दम तोड़ रहे हैं या मेडिकल कॉलेज पहुंचने के पहले ही मौतें हो रही हैं।
जब इस संबंध में आईसीयू प्रभारी विशेषज्ञ डॉ. गागेंश डांडिया से बात की गई तो उनका कहना था कि जिला अस्पताल में छह वेंटीलेटर हैं। आईसीयू में दो हैं, जो बंद पड़े हैं और चार वेंटीलेटर बंद पड़े कोविड आईसीयू में रखे हुए हैं।
