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सुन लो सरकार! छोटे से घाव पर ऐसा मरहम लगाया कि 24 घंटे में पैर सड़ने से व्यक्ति की मौत, सात बच्चे हुए अनाथ
Sat, 17 Sep 2022 03:50 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Sat, 17 Sep 2022 03:50 PM IST
सार
मध्यप्रदेश के सीहोर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे पढ़कर आप तुरंत चौंक सकते हैं। दरअसल, यहां पर छोटे से घाव पर मरहम लगाने से एक व्यक्ति का पूरा पैर सड़ गया। ट्रामा सेंटर में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। अब व्यक्ति के सात बच्चे बिना पिता के हो गए।
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व्यक्ति की मौत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सीहोर जिले का यह संवेदनशील मामला संवेदनहीन नजर आने वाले ट्रामा सेंटर का है। जहां एक मरीज जरा से फोड़े चार दिन पुराने घाव के इलाज के लिये आया था। पृष्ठ भाग पर हुए छोटे से घाव के लिये पूरे पैर पर बाजार से मंगाया गया मरहम लपेट दिया गया और पट्टी भी कर दी गई। 24 घंटे में ही पूरा पैर पक गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि सबके हाथ-पांव फूल गये। कुल सात दिन बाद अंतत: मरीज की मौत हो गई।
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मृतक के परिजनों का कहना है, भर्ती के पहले छोटा सा घाव था। परन्तु ड्यूटी पर उपस्थित चिकित्सक के द्वारा पूरे पांव में मरहम लगा कर पट्टी कर दी गई, जिससे पूरा पांव सड़ गया और अंतत: मरीज की मौत हो गई। जरा सी लापरवाही से पूरे शरीर में मवाद फैलने से किडनी तक फैल हो गई। मृतक अपने पीछे चार बेटियां और तीन बेटे छोड़ गया है। परिवार में वो ही अकेला कमाने वाला गरीब मजदूर था। अब इस गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले घर के भरण-पोषण की आखिर कौन जिम्मेदारी लेगा।
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सीहोर जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम बिजलोन निवासी मनोहर वंशकार (50) मजदूरी करता था, जो 23 अगस्त को पृष्ठभाग में हुए घाव के कारण ट्रामा सेंटर में दिखाने आया था। परिजनों का कहना है, जिला अस्पताल के एक डॉक्टर ने कहा जख्म छोटा है, ठीक हो जायेगा। पट्टी कराकर घर ले जाओ। पट्टी करने वाले ने बाजार से सुमेग पीले रंग का क्रीम मंगवाया। मृतक मनोहर वंशकार की बेटी प्रीति वंशकार ने थाना कोतवाली में आवेदन दिया है कि उसके अनुसार सुमेग दवा को पूरे पैर और घाव पर मल दिया, जिसके बाद उनके पैर और पेट में सूजन आ गई। हमने डाक्टर को दिखाया तो उन्होंने भर्ती किया। इस दौरान पूरे पैर में फफोले तक पढ़ गये। इसके बाद हम भोपाल के एम्स में ले गये जहां इलाज के दौरान पता चला कि किडनी तक में इंफेक्शन फैला है।
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मृतक की बेटी प्रीति का कहना है, 7 दिन बाद 31 अगस्त को मेरे पिता की मौत ट्रामा सेंटर की लापरवाही के कारण हो गई। वह 7 भाई-बहन हैं। घर में कोई कमाने वाला नहीं है। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करते हैं। उसने कलेक्टर, एसपी और सीहोर के जनप्रतिनिधियों से आर्थिक सहायता एवं न्याय की गुहार लगाई है। मृतक की पुत्री प्रीति ने रोते हुए बताया, मेरे पापा की इस असामायिक मौत का जिम्मेदार कौन है? उनका पूरा पैर आखिर उस मरहम से कैसे पककर सड़ गया? कोई तो बताये? अब हमारे परिवार का क्या होगा? इस संबंध मे कोतवाली पुलिस का कहना है, मामले का आवेदन मिला है। पुलिस जांच कर रही है।
