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Sawan 2025: शिवपुराण में वर्णित यह धाम आज भी क्यों बना है रहस्य? जानिए सातदेव के पातालेश्वर महादेव की कथा

Sat, 02 Aug 2025 06:01 AM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Sat, 02 Aug 2025 06:01 AM IST
सार

पातालेश्वर महादेव मंदिर का शिवलिंग अपने आप में एक रहस्य है। स्थानीय जनों के अनुसार अब तक की गई 25 से 30 फीट खुदाई के बावजूद सिर्फ शिवलिंग ही दिखाई देता है। इससे इसके स्वयंभू स्वरूप की पुष्टि होती है। यह रहस्य श्रद्धालुओं को और भी अधिक आकर्षित करता है।

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Sehore News: The end of Pataleshwar Mahadev Shivling was not found even at a depth of 30 feet
पातालेश्वर महादेव मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीहोर जिले के सातदेव में स्थित पातालेश्वर महादेव मंदिर में 30 फीट खुदाई के बाद भी शिवलिंग का अंत नहीं मिला है। यहां श्रावण मास में पार्थिव शिवलिंग अभिषेक और विशाल भंडारे का आयोजन होता है। यह धाम अपनी पौराणिकता, रहस्यों और जनकल्याणकारी आयोजनों के लिए प्रसिद्ध है।

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भैरूंदा से लगभग 14 किलोमीटर दूर मां नर्मदा के उत्तर तट पर स्थित यह पातालेश्वर महादेव मंदिर पौराणिक स्थल है। इसका उल्लेख शिवपुराण और नर्मदा पुराण में भी मिलता है। यह इसकी प्राचीनता और धार्मिक महत्व को दर्शाता है। श्रावण मास के पावन अवसर पर सीहोर जिले के सातदेव स्थित पातालेश्वर महादेव मंदिर में विशेष आयोजनों की शृंखला चल रही है। मां नर्मदा, गंजाल और गोमती नदियों के संगम स्थल पर स्थित यह पवित्र धाम भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। 
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बीते 22 वर्षों से श्रावण मास में पार्थिव शिवलिंग अभिषेक का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष यह आयोजन 11 जुलाई से शुरू हुआ और 9 अगस्त तक चलेगा। श्रावण सोमवार को करुणा धाम आश्रम के गुरु सुदेश सांडिल्य महाराज विशेष अभिषेक करेंगे। इस दिन विशाल भंडारा भी होगा, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे।
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Sehore News: The end of Pataleshwar Mahadev Shivling was not found even at a depth of 30 feet
पातालेश्वर महादेव शिवलिंग। - फोटो : अमर उजाला

शिवलिंग की रहस्यमयी गहराई
पातालेश्वर महादेव मंदिर का शिवलिंग अपने आप में एक रहस्य है। स्थानीय जनों के अनुसार अब तक की गई 25 से 30 फीट खुदाई के बावजूद सिर्फ शिवलिंग ही दिखाई देता है। इससे इसके स्वयंभू स्वरूप की पुष्टि होती है। यह रहस्य श्रद्धालुओं को और भी अधिक आकर्षित करता है।

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पातालेश्वर महादेव शिवलिंग। - फोटो : अमर उजाला
पौराणिक कथाओं से जुड़ा स्थल
यह स्थान शिवपुराण और नर्मदा पुराण में वर्णित है। मान्यता है कि सृष्टि रचयिता ब्रह्मा के मानस पुत्र सप्त ऋषियों ने यहीं तप किया था। जब राक्षस भुम्दासुर ने तप में विघ्न डाला, तब भगवान शिव ने उसका वध कर पातालेश्वर महादेव के रूप में यहां स्वयं को स्थापित किया। तब से यह स्थान भक्तों के लिए पूजनीय बन गया है।

इतिहास और अहिल्याबाई होलकर का योगदान
इतिहास में भी यह स्थान महत्वपूर्ण रहा है। रानी कमलापति के साम्राज्य के अधीन गोंड राजाओं ने सप्त ऋषियों के नाम पर इस स्थान को सातदेव नाम दिया था। यह स्थल रानी कमलापति और गोंड राजाओं के समय से प्रसिद्ध रहा है। अहिल्याबाई होलकर ने यहाँ एक सुंदर छतरी का निर्माण कराया था। यह छतरी आज भी इस मंदिर की ऐतिहासिक गरिमा को दर्शाती है।

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पातालेश्वर महादेव शिवलिंग। - फोटो : अमर उजाला
भक्तों के लिए अन्नक्षेत्र
नर्मदा परिक्रमावासियों और श्रद्धालुओं के लिए यहां विगत 7 वर्षों से नि:शुल्क अन्नक्षेत्र भी संचालित हो रहा है। यह सेवा मंदिर को जनकल्याणकारी केंद्र के रूप में विशेष पहचान देती है।

श्रद्धा, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र
श्रावण मास के इन आयोजनों से भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा, शांति और पुण्य की अनुभूति होती है। पातालेश्वर महादेव धाम रहस्य, प्राचीनता और सेवा के संगम के रूप में श्रद्धालुओं के हृदय में विशेष स्थान रखता है।
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