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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Sawan 2025: Nature does a unique Abhishek of Bhole in the lap of Vindhyachal, the mystery will surprise you

MP News: श्रावण मास में शिवभक्ति का केंद्र बना टपकेश्वर महादेव मंदिर, रहस्यमयी जलधारा करती है भोले का अभिषेक

Mon, 14 Jul 2025 07:54 AM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: सीहोर ब्यूरो Updated Mon, 14 Jul 2025 07:54 AM IST
सार

मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी क्षेत्र में स्थित टपकेश्वर महादेव मंदिर श्रावण मास के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन गया है। विंध्याचल की पर्वतमालाओं में स्थित यह गुफा मंदिर अपनी प्राकृतिक जलधारा के लिए प्रसिद्ध है, जो वर्षभर शिवलिंग पर टपकती रहती है।

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Sawan 2025: Nature does a unique Abhishek of Bhole in the lap of Vindhyachal, the mystery will surprise you
बुधनी स्थित टपकेश्वर महादेव मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्रावण मास की पावन बेला में सीहोर जिले का प्रसिद्ध टपकेश्वर महादेव मंदिर शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। भोलेनाथ को समर्पित इस पवित्र माह में हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर शिवलिंग पर जलाभिषेक कर रहे हैं। मान्यता है कि श्रावण मास में शिव आराधना से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, मानसिक शांति मिलती है और जीवन से नकारात्मकता का नाश होता है।
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बुधनी तहसील से करीब 25 किलोमीटर दूर सलकनपुर की विंध्याचल पर्वतमालाओं के घने जंगलों में स्थित टपकेश्वर महादेव मंदिर की विशेषता यह है कि यहां बारहों महीने शिवलिंग पर जलाभिषेक होता है। कहा जाता है कि गुफा में स्थित शिवलिंग पर पहाड़ों से रहस्यमयी जलधारा लगातार टपकती रहती है, चाहे गर्मी हो या सर्दी। यह जल कहां से आता है, यह आज भी एक रहस्य बना हुआ है।
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इस मंदिर की महिमा यही नहीं थमती। श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां की दिव्यता और शांति उन्हें खींच लाती है, चाहे रास्ता कितना ही कठिन क्यों न हो। जंगल, नदियां और पहाड़ियों के बीच स्थित यह स्थल महादेव के चमत्कारिक प्रभाव का जीवंत उदाहरण है। नकटीतलाई गांव से 6 किलोमीटर और बुधनी-संदलपुर नेशनल हाईवे-22 से कुछ दूरी पर स्थित यह मंदिर सावन माह में विशेष रूप से जाग्रत हो उठता है।
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श्रद्धालु बारिश और दुर्गम रास्तों की परवाह किए बिना टपकेश्वर महादेव के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। यहां शिवरात्रि और श्रावण मास के दौरान विशेष आयोजन होते हैं। मंदिर की गुफा, चट्टानों की बनावट और प्राकृतिक वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराते हैं। श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना करने से न केवल आत्मिक शुद्धि मिलती है, बल्कि सुख-समृद्धि और ग्रह दोषों से मुक्ति भी प्राप्त होती है। टपकेश्वर महादेव मंदिर इस अद्भुत आस्था और चमत्कारी प्रकृति का प्रतीक बनकर भक्तों को हर साल बड़ी संख्या में आकर्षित करता है।

 

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