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MP News: यहां शुद्ध हवा-बयार से मतलब ही नहीं...पौधारोपण में घोटाला कर गए, गडढे तक नहीं खोदे और पैसे निकाल लिए
Tue, 11 Jun 2024 03:30 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Tue, 11 Jun 2024 03:30 PM IST
सार
मध्यप्रदेश के सीहोर में पौधारोपण के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आया है। यहां पौधारोपण के लिए गड्ढे खोदे ही नहीं गए और पैसा निकाल लिया गया। पोल खुली तो वन संरक्षक ने जांच के निर्देश दिए।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
प्रदेश के सीहोर में पौधारोपण के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला सामने आया है। यहां पौधारोपण के लिए गड्ढे खोदे ही नहीं गए और पैसा निकाल लिया गया। पोल खुली तो वन संरक्षक ने जांच के निर्देश दिए।
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यह घोटाला वन विकास निगम के पौधारोपण से जुड़ा है। वन विभाग ने निगम को पौधारोपण के लिए जमीन दी, लेकिन पौधारोपण तो दूर की बात, यहां गड्ढे तक नहीं खोदे गए और करोड़ों रुपये की राशि निकाल ली गई। अब इस पूरे मामले की जांच वन विभाग की टीम कर रही है।
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प्रदेशभर में पौधारोपण का हल्ला तो खूब होता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इस दिशा में ठोस प्रयास नहीं किए जाते, जिस तेजी से जिले में जंगल साफ हो रहे हैं और उनमें अतिक्रमण किया जा रहा है, उस गति से जंगलों में वनभूमि पर पौधारोपण नहीं किया गया। प्रतिवर्ष पौधारोपण के नाम पर भारी भरकम राशि खर्च की जाती है।
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जानकारी के अनुसार, वन विकास निगम द्वारा वन विभाग की जमीन पर 2018-19 और 2020 में पौधारोपण किया गया था। जिले की वन परिक्षेत्र आष्टा और वन परिक्षेत्र इछावर के पांच-पांच स्थान पौधारोपण के लिए चिन्हित किए गए थे, जिनमें बडी संख्या में पौधारोपण और चेक डैम व अन्य निर्माण कार्य होने बताए गए थे। लेकिन ये सब काम कागजों में किए गए, अब निगम के इन कार्यों की पोल खुल रही है।
दो टीमों को जांच का जिम्मा
बताया जा रहा है कि वन संरक्षक एमएस डाबर ने इस पूरे मामले में जांच के निर्देश दिए थे और दो जांच दल गठित किए थे। आष्टा साइट पर एसडीओ राजेश शर्मा और वन विकास निगम एसडीओ जांच कर रहे हैं, जबकि इछावर साइट पर बुधनी एसडीओ स्वीकृति ओसवाल और वन विकास निगम रेंजर जांच संभाल रहे हैं।
बताया जा रहा है कि 30 मई तक जांच पूरी कर डीएफओ को सौंपना थी, लेकिन जांच डेट लाइन निकल जाने पर भी जांच पूरी नहीं हो सकी। इसलिए अब इस जांच को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इस मामले में वन संरक्षक एमएस डाबर का कहना है कि दो दल जांच कर रहे हैं। अभी मेरे पास रिपोर्ट नहीं आई, रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कह सकते हैं।
