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Innovation: मध्य प्रदेश के सीहोर में बनी पहली बार FDR तकनीक से सड़क, 50% सस्ती और मजबूती भी दोगुनी

Sat, 29 Apr 2023 06:21 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: रवींद्र भजनी Updated Sat, 29 Apr 2023 06:21 PM IST
सार

मध्यप्रदेश में सीहोर से श्यामपुर तक पहली एफडीआर तकनीक की सड़क बनी है। इसकी लागत करीब 50 प्रतिशत कम है, लेकिन मजबूती दोगुनी है। 24.30 किमी लंबी सड़क बनाने पर सिर्फ 29 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। 
 

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Madhya Pradesh's Sehore is Ready for A Road made using FDR Technology
सीहोर में एफडीआर तकनीक से बन रही है सड़क। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश में सीहोर जिले के श्यामपुर को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाली सडक़ का निर्माण फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) तकनीक से किया जा रहा है। इस तकनीक से बनने वाली यह प्रदेश की पहली सड़क है। सामान्य तकनीक से छह मीटर चौड़ी और एक किलोमीटर लंबी सड़क बनाने में सवा करोड़ रुपये का खर्च आता है। एफडीआर पद्धति से सड़क निर्माण में 40-50 फीसदी कम लागत आती है। यह सामान्य से दोगुना मजबूत भी है। 90 प्रतिशत सड़क बनकर तैयार है। शेष निर्माण भी अंतिम चरण में है। 

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सीहोर-श्यामपुर के बीच 24.30 किमी लंबी और छह मीटर चौड़ी सड़क बन रही है। इस पर करीब 29 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसे चंडीगढ़ की गर्म संस ई-स्टेट प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड बना रही है। जल्द ही सड़क का काम पूरा हो जाएगा। साइड शोल्डर भरने का काम बचेगा। निर्माण कंपनी के मैनेजर ने बताया कि शोल्डर भरने का काम भी शुरू कर दिया गया है। जल्द ही इसे पूरा कर लिया जाएगा। विधायक सुदेश राय ने इस सड़क का भूमिपूजन दिसंबर में किया था। शीघ्र ही इस सड़क पर आने वाले अनेक ग्रामों के अप्रोच रोड भी 30 मीटर बनेगी। इससे ग्राम राजू खेड़ी, मानपुरा ,रोला ,शेखपुरा ,मगर खेड़ा, बड़ी खजूरिया, सिराडी, निवारिया, दुपाडिय़ा, खंडवा, छोटा खजुरिया, आदमपुर, मुंज खेड़ा और गुलखेड़ी के ग्रामीणों को भी लाभ होगा।
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ये होती है एफडीआर तकनीक
निर्माण एजेंसी के इंजीनियर हिमांशु ने बताया कि फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) एक रिसाइकिलिंग पद्धति है। इसमें बहुत ही कम संसाधनों में टिकाऊ सडक़ें बनाई जा सकती हैं। इसमें कच्ची सडक़ को उखाड़कर सड़क में से निकलने वाले मटेरियल को प्लांट पर ले जाया जाता है। यहां पर सड़क के वेस्ट मटेरियल में केमिकल व आवश्यक सामग्री के साथ मिलाकर नया मटेरियल तैयार किया जाता है। उसका इस्तेमाल फिर से उसी सड़क पर होता है। इसके बाद सड़क की धूल को हवा के प्रेशर से साफ करने के बाद उस पर फैलिक कपड़े बिछाए जाते हैं। यह मॉइश्चर को एब्जॉर्ब कर लेता है। इस पर डामर के लेप का छिड़काव होता है। फिर मटेरियल डालकर रोलर घुमाया जाता है। इसके लिए विशेष मशीन की जरूरत होती है।
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एक किमी सड़क बनाने में 50 लाख का खर्च
निर्माण एजेंसी के मैनेजर सोनू राहा ने बताया कि एफडीआर पद्धति से सड़क के निर्माण में 50 फीसदी तक लागत कम आती है। एक किमी लंबी छह मीटर चौड़ाई वाली सामान्य सड़क बनाने में करीब सवा करोड़ रुपये लागत आती है। एफडीआर पद्धति में 50 लाख रुपये ही खर्च होता है। यह सड़क सामान्य से अधिक मजबूत होती है। सामान्य की उम्र यदि पांच साल होती है तो इस सड़क की उम्र 10 साल होती है। इससे पहले उत्तरप्रदेश और तेलंगाना में इस पद्धति से बनाई जा चुकी हैं। 


सड़क बनाने का तरीका सामान्य ही है 
सामान्य सड़क बनाने के लिए जगह को समतल कर उसके ऊपर बजरी डाली जाती है। इसके बाद प्लांट में तैयार किया गया गिट्टी, सीमेंट, डामर सहित कैमिकल आदि का मिश्रण डाला जाता है। इसके बाद जमीन पर चारकोल के पतले मिश्रण का छिड़काव होता है। इसके ऊपर मोटी गिट्टी वाले डामर के मिश्रण को मशीन से बिछाया जाता है। साथ ही रोड़-रोलर भी चलाया जाता है। पतली गिट्टी वाले मिश्रण को मशीन से बिछाकर उसके ऊपर डालकर रोड-रोलर चलाकर उसे समतल किया जाता है।

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