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Holi 2024: होली की रंगीन मस्ती में अबकी बार फिर महादेव की होली रहेगी खास, हर मंदिर पर होगा आयोजन
Sun, 24 Mar 2024 01:10 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, सीहोर
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, सीहोर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 24 Mar 2024 01:10 PM IST
सार
होली की रंगीन मस्ती में इस बार की होली सीहोर के लिए खास है। इस बार भी सीहोर में महादेव की होली खेली जाएगी। शहर महादेव के रंग में रंगा आएगा। शहर के अलग-अलग शिव मंदिरों में महादेव की होली का आयोजन होगा।
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कुबेरेश्वर धाम
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
रंगों का उत्सव होली आ गया है। रंगों के पर्व से जुड़ी भोपाल के नजदीकी जिले सीहोर की एक अनूठी परंपरा है। नवाबी शासनकाल में नजदीकी जिले सीहोर में नवाबी होली मनाई जाती थी, लेकिन बीते साल से सीहोर वाले पंडित प्रदीप मिश्रा ने इस परंपरा को बदलकर रख दिया है। सीहोर जिले में अब नवाबी होली नहीं, बल्कि महादेव की होली मनाई जाती है।
होली की रंगीन मस्ती में इस बार की होली सीहोर के लिए खास है। इस बार भी सीहोर में महादेव की होली खेली जाएगी। शहर महादेव के रंग में रंगा आएगा। शहर के अलग-अलग शिव मंदिरों में महादेव की होली का आयोजन होगा। पांच दिवसीय रंगोत्सव के पर्व होली की सोमवार से शुरुआत होने जा रही है। सोमवार धुलेंडी के दिन से रंग, गुलाल का दौर शुरू होगा, जो रंगपंचमी तक चलेगा। पर्व से एक दिन पूर्व रविवार को जिलेभर के बाजारों में लोग होली की खरीदी करते नजर आए।
राजधानी भोपाल के नजदीकी जिले में सीहोर में नवाबी शासन काल से चली आ रही होली की एक अनूठी परम्परा रही है। इसके तहत पहले दिन गेर होती है। होलिका दहन के बाद धुलेंडी पर रंग तो होता ही है, लेकिन शहर में इस दिन पंरपरागत रूप से गेर भी निकलते हैं और गमी की होली मानकर लोग उन घरों पर जाते हैं, जिनके यहां गमी हुई हो। अलसुबह अनेक लोग होलिका दहन स्थल पर जाकर पूजा-अर्चना भी करते हैं। छोटे बच्चों को भी होलिका दहन स्थल पर ले जाया जाता है।
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पांच दिन बरसता है रंग
बता दें कि होली के दूसरे दिन सीहोर जिला मुख्यालय पर रंग बरसता है। होली के दूसरे दिन भोपाल के नवाब हमीदउल्लाह खान होली खेलने सीहोर आते थे। वर्तमान कलेक्ट्रेट में पॉलिटिकल ऑफिस था, वहां और पुरानी निजामत, ब्राह्मणपुरा और बारादरी में वह उपस्थित रहते थे। इसी प्रकार होली के तीसरे दिन नवाब आष्टा पहुंचते थे और वहां बुधवारे में बैठते थे, जबकि होली के चौथे दिन भोपाल के नवाब हमीदउल्ला आष्टा तहसील के जावर पहुंचते थे। जावर में पूरे उल्लास के साथ पर्व मनाया जाता था। होली पर्व का पांचवां दिन रंग पंचमी पूरे जिले में उल्लास से मनाया जाता है। वैसे तो शहर में पांच दिन खेली जाती है, लेकिन रंग पंचमी पर नजारा ही कुछ अलग नजर आता है। शहर में रंग पंचमी का जुलूस निकाला जाता है। इससे पूरा नगर रंगमय हो जाता है। इस प्रकार शहर सहित जिलेभर में पूरे पांच दिन रंग बरसता है।
कथावाचक प्रदीप मिश्र ने क्या अपील की
कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने बीते साल जिलेवासियों से अपील की थी कि इस बार नवाबी होली की जगह महादेव की होली मनाई जाए। उनकी अपील का असर यह हुआ कि सीहोर जिले में महादेव की होली पूरे उत्साह के साथ मनाई गई। पंडित प्रदीप मिश्रा ने सीहोर,आष्टा और इछावर पहुंचकर हुलियारों पर जमकर रंग-गुलाल उड़ाया। इस बार भी महादेव की होली और पंडित प्रदीप मिश्रा की अगवानी को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है।
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होली की रंगीन मस्ती में इस बार की होली सीहोर के लिए खास है। इस बार भी सीहोर में महादेव की होली खेली जाएगी। शहर महादेव के रंग में रंगा आएगा। शहर के अलग-अलग शिव मंदिरों में महादेव की होली का आयोजन होगा। पांच दिवसीय रंगोत्सव के पर्व होली की सोमवार से शुरुआत होने जा रही है। सोमवार धुलेंडी के दिन से रंग, गुलाल का दौर शुरू होगा, जो रंगपंचमी तक चलेगा। पर्व से एक दिन पूर्व रविवार को जिलेभर के बाजारों में लोग होली की खरीदी करते नजर आए।
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राजधानी भोपाल के नजदीकी जिले में सीहोर में नवाबी शासन काल से चली आ रही होली की एक अनूठी परम्परा रही है। इसके तहत पहले दिन गेर होती है। होलिका दहन के बाद धुलेंडी पर रंग तो होता ही है, लेकिन शहर में इस दिन पंरपरागत रूप से गेर भी निकलते हैं और गमी की होली मानकर लोग उन घरों पर जाते हैं, जिनके यहां गमी हुई हो। अलसुबह अनेक लोग होलिका दहन स्थल पर जाकर पूजा-अर्चना भी करते हैं। छोटे बच्चों को भी होलिका दहन स्थल पर ले जाया जाता है।
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पांच दिन बरसता है रंग
बता दें कि होली के दूसरे दिन सीहोर जिला मुख्यालय पर रंग बरसता है। होली के दूसरे दिन भोपाल के नवाब हमीदउल्लाह खान होली खेलने सीहोर आते थे। वर्तमान कलेक्ट्रेट में पॉलिटिकल ऑफिस था, वहां और पुरानी निजामत, ब्राह्मणपुरा और बारादरी में वह उपस्थित रहते थे। इसी प्रकार होली के तीसरे दिन नवाब आष्टा पहुंचते थे और वहां बुधवारे में बैठते थे, जबकि होली के चौथे दिन भोपाल के नवाब हमीदउल्ला आष्टा तहसील के जावर पहुंचते थे। जावर में पूरे उल्लास के साथ पर्व मनाया जाता था। होली पर्व का पांचवां दिन रंग पंचमी पूरे जिले में उल्लास से मनाया जाता है। वैसे तो शहर में पांच दिन खेली जाती है, लेकिन रंग पंचमी पर नजारा ही कुछ अलग नजर आता है। शहर में रंग पंचमी का जुलूस निकाला जाता है। इससे पूरा नगर रंगमय हो जाता है। इस प्रकार शहर सहित जिलेभर में पूरे पांच दिन रंग बरसता है।
कथावाचक प्रदीप मिश्र ने क्या अपील की
कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने बीते साल जिलेवासियों से अपील की थी कि इस बार नवाबी होली की जगह महादेव की होली मनाई जाए। उनकी अपील का असर यह हुआ कि सीहोर जिले में महादेव की होली पूरे उत्साह के साथ मनाई गई। पंडित प्रदीप मिश्रा ने सीहोर,आष्टा और इछावर पहुंचकर हुलियारों पर जमकर रंग-गुलाल उड़ाया। इस बार भी महादेव की होली और पंडित प्रदीप मिश्रा की अगवानी को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है।
