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Harisingh Gour Jayanti: धूमधाम से मनाई 155वीं जयंती, कुलपति ने कहा- भारत रत्न दिलाने करने होंगे समन्वित प्रयास
Tue, 26 Nov 2024 10:35 PM IST
सागर ब्यूरो
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
Published by: सागर ब्यूरो
Updated Tue, 26 Nov 2024 10:35 PM IST
सार
डॉ. हरिसिंह गौर की 155वीं जयंती के अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने सागर शहर के तीन बत्ती पहुंचकर डॉ. गौर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और सभा को संबोधित किया।
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डॉ. हरिसिंह गौर जयंती
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
महान दानवीर, विधिवेत्ता एवं डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के संस्थापक सर डॉ. हरिसिंह गौर की 155वीं जयंती के अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने सागर शहर के तीन बत्ती पहुंचकर डॉ. गौर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और सभा को संबोधित किया। उन्होंने बुन्देली संकल्प के अद्वितीय नायक डॉ. सर हरिसिंह गौर की जयंती पर सभी नगरवासियों का अभिनन्दन करते हुए हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
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उन्होंने कहा, आज का दिन हमारे लिए विशेष अर्थ रखता है। क्योंकि आज के ही दिन इस धरती पर डॉ. हरिसिंह गौर जैसे महान शख्सिय ने जन्म लिया था। आज का दिन महज कैलेंडर का एक पन्ना नहीं, बल्कि बुंदेलखंड के इतिहास का एक खूबसूरत पैगाम है। एक ऐसा पैगाम जिससे जुड़कर हजारों-लाखों लोगों के जीवन में ज्ञान का वसंत आया। आप भाग्यशाली हैं कि आप डॉ. गौर के शहर के वासिन्दें हैं। आप सभी गौर साहब के जीवन और सृजन से खूब परिचित हैं।
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उन्होंने डॉ. गौर के जीवन की संघर्ष यात्रा के बारे में बताते हुए कहा कि जीवन की प्रतिकूल परिस्थितियों से लड़ते हुए उनके चिरागी व्यक्तित्व का निर्माण हुआ। अपनी मातृभूमि के लिए कुछ श्रेष्ठ करने का संकल्प कभी नहीं छूटा। अपनी प्रतिभा से ज्ञान, राजनीति, पत्रकारिता, सृजनात्मकता आदि सभी क्षेत्रों में लगभग दिग्विजय प्राप्त करते हुए उन्होंने अपने समकालीन बड़ी हस्तियों को चौंका दिया। डॉ. गौर का यह जीवन हम सबके लिए एक मिसाल है। दुःख को शक्ति में, अभाव को सृजन में और संघर्ष को कैसे संकल्प में बदला जाता है, हमारे लिए यही गौर साहब की सीख है। एक श्रेष्ठ अधिवक्ता, विधि विशेषज्ञ, संविधान सभा के सदस्य, लेखक-कवि, धर्मज्ञ, शिक्षाविद, समाजसेवी, दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्थापक और नागपुर विश्वविद्यालय के कुलपति आदि भूमिकाओं में अपनी क्षमता और प्रतिभा से पूरे देश को प्रभावित किया। किन्तु अपार यश और समृद्धि के वैभव के बीच में भी उनकी मातृभूमि सागर की आकुल पुकार ने उन्हें यहां वापस बुलाया और 18 जुलाई, 1946 को अपनी पूरी सम्पत्ति का दान कर सागर विश्वविद्यालय की स्थापना की। डॉ. गौर द्वारा स्थापित यह विश्वविद्यालय अपनी स्थापना काल से ही अपने विशिष्ट ज्ञान और अनुसंधान के साथ राष्ट्र की प्रगति में अपनी भूमिका का निर्वाह कर रहा है।
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तीन बत्ती से निकली डॉ. गौर की भव्य शोभा यात्रा
परम्परानुसार शहर के तीन बत्ती से बैंड बाजे के साथ भव्य शोभायात्रा निकली, जो प्रमुख मार्गों से होती हुई विश्वविद्यालय पहुंची। इस दौरान शहर के नागरिक, जनप्रतिनिधि, विद्यार्थी और आमजन इस शोभायात्रा का हिस्सा बने। शोभायात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया। आयोजन के दूसरे सत्र का कार्यक्रम विश्विद्यालय में आयोजित किया गया।

गौर जयंती शोभा यात्रा

माल्यार्पण करते हुए
