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सागर: जहरीली शराब कांड पर सियासत तेज, सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, CBI जांच और 25 लाख मुआवजे की मांग

Wed, 09 Sep 2026 10:15 AM IST
सागर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर Published by: सागर ब्यूरो Updated Wed, 09 Sep 2026 10:15 AM IST
सार

बंडा में जहरीली शराब से मौतों के बाद सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। अपना दल (एस) ने इसे प्रशासनिक विफलता बताया है, जबकि भगवती मानव कल्याण संगठन ने CBI जांच और मृतक परिवारों को 25 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है।

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Sagar: Politics Intensifies Over Toxic Liquor Tragedy, Opposition Demands CBI Probe and 25 Lakh Compensation
ज्ञापन सौंपते संगठन के कार्यकर्ता

विस्तार

जिले के बंडा विधानसभा क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रशासनिक लापरवाही और मौतों के आंकड़े बढ़ने के बाद अब विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसी कड़ी में अपना दल (एस) ने सरकार को घेरते हुए इसे प्रशासनिक विफलता करार दिया है, वहीं भगवती मानव कल्याण संगठन ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर सीबीआई जांच और 25 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है।
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अपना दल (एस) के राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश प्रभारी आर.बी. सिंह पटेल ने घटना पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि सागर और बालाघाट की हालिया घटनाएं प्रदेश की स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि जहरीली शराब जैसी त्रासदियां केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि विभागीय उदासीनता और भ्रष्टाचार का परिणाम हैं। पार्टी ने सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो और अस्पतालों में भर्ती पीड़ितों के इलाज के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
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दूसरी ओर भगवती मानव कल्याण संगठन (शाखा सागर) ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए इस त्रासदी में 30 से 35 लोगों की मौत का दावा किया है। संगठन का आरोप है कि लाइसेंसी दुकानों के जरिए गांव-गांव पहुंचाई गई अवैध शराब के सेवन से ये मौतें हुई हैं। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि आबकारी विभाग ने शुरुआती दौर में बिना किसी फोरेंसिक जांच के जहरीली शराब को पीने योग्य बताकर क्लीनचिट दे दी थी, जिसके कारण जानमाल का यह बड़ा नुकसान हुआ।
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संगठन ने अपनी 8 प्रमुख मांगों के तहत मृतक परिवारों को 25-25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने, परिजनों को एक साल तक मुफ्त इलाज मुहैया कराने और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है। इसके अलावा, एसपी अनुराग सुजानिया की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कलेक्टर और एसपी को तत्काल हटाने, दोषी अधिकारियों को निलंबित करने के बजाय सीधे बर्खास्त करने तथा इस पूरे घटनाक्रम की सीबीआई जांच के साथ पांच आईएएस और पांच समाजसेवियों की विशेष टीम से पड़ताल कराने की मांग की गई है।

संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि आगामी 15 दिनों के भीतर इस गंभीर मामले में ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो पीड़ित परिवारों को साथ लेकर सड़कों पर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। लगातार बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बीच प्रशासन पर अब निष्पक्ष कार्रवाई करने का भारी दबाव बन गया है।

 

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