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मध्य प्रदेश: उपचुनाव के परिणाम तय करेंगे भाजपा-कांग्रेस की दशा-दिशा, शिवराज की साख का सवाल तो कमलनाथ का कद दांव पर
Mon, 01 Nov 2021 11:05 PM IST
सुभाष कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: सुभाष कुमार
Updated Mon, 01 Nov 2021 11:05 PM IST
सार
मतगणना को लेकर निर्वाचन आयोग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। जहां जहां चुनाव हुए हैं वहां के प्रशासन ने भी पुख्ता इंतजाम किए हैं। सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू होगी। दोपहर तक तस्वीर लगभग स्पष्ट हो जाएगी कि किसके सिर विजय का ताज सजेगा और किसके गले पराजय का हार आएगा।
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मप्र में हुए उपचुनाव की 2 नवंबर को मतगणना होगी।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मप्र में हुए उपचुनाव की मतगणना का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। 2 नवंबर को मतगणना होगी। इस चुनाव परिणाम के बाद ही भाजपा-कांग्रेस की दीपावली तय होगी कि किसके हिस्से जीत का उजास आएगा और कौन हार के अंधेरे में डूबेगा। वैसे इन उपचुनाव के नतीजों से मप्र की मौजूदा भाजपा सरकार को फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन इन परिणामों को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिटमस टेस्ट के आधार पर देखा जा रहा है क्योंकि इन चुनावों के परिणामों के बाद ये भी तय हो जाएगा कि मप्र में शिवराज मुख्यमंत्री बने रहेंगे या बाकी राज्यों की तरह मप्र में भी सीएम का चेहरा बदलेगा।
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मतगणना को लेकर निर्वाचन आयोग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। जहां जहां चुनाव हुए हैं वहां के प्रशासन ने भी पुख्ता इंतजाम किए हैं। सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू होगी। दोपहर तक तस्वीर लगभग स्पष्ट हो जाएगी कि किसके सिर विजय का ताज सजेगा और किसके गले पराजय का हार आएगा।
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दोनों दलों को मिल सकती हैं दो-दो सीटें
उपचुनावों के परिणामों की बात करें तो चुनावी जानकारी दो-दो सीटें दोनों दलों के पास जाना बता रहे हैं। खंडवा लोकसभा और जोबट विधानसभा में भाजपा मजबूत बताई जा रही है तो पृथ्वीपुर और रैगांव विधानसभा में कांग्रेस की जीत के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि भाजपा-कांग्रेस दोनों दलों के नेता चारों सीट पर अपनी अपनी जीत के दावे कर रहे हैं, लेकिन ऐसा होना मुमकिन नहीं लग रहा।
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खंडवा पर टिकी सबकी नजरें
सबकी नजरें खंडवा लोकसभा पर है क्योंकि यहां भाजपा-कांग्रेस दोनों की ही ओर से नाटकीय घटनाक्रम हुए। भाजपा ने नए नवेले चेहरे ज्ञानेश्वर पाटिल को उम्मीदवार बनाकर सबको चौंका दिया। स्व. सांसद नंदकुमार सिंह चौहान के बेटे हर्षवर्धन चौहान का टिकट लगभग तय माना जा रहा था लेकिन भाजपा हाईकमान ने ओबीसी चेहरा मैदान में उतारा। शुरुआत में नंदू चौहान समर्थक मायूस भी हुए और भाजपा के दूसरे नेता भी जो टिकट की दौड़ में थे वे निराश नजर आए लेकिन संगठन की हिदायत के बाद सबने काम संभाल लिया। कांग्रेस ने इस सीट से राजपूत उम्मीदवार राजनारायण सिंह को टिकट दिया जो पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह गुट के कहे जाते हैं। करीब २० साल बाद राजनारायण सिंह कोई चुनाव लड़ रहे हैं। राजपूत जो कि भाजपा का वोट बैंक माना जाता है उसे साधने का कांग्रेस ने जतन किया। इस सीट से अरुण यादव के लडऩे की संभावना प्रबल थी लेकिन कांग्रेस की ही लड़ाई से वे हार गए और खुद पीछे हट गए। इस तरह दोनों प्रत्याशी जनता के लिए नए हैं।
लिखी जाएगी 2013 के चुनावों की पटकथा
चुनाव नतीजों की बात करें तो इससे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की साख के रूप में जोडक़र देखा जा रहा है। दोनों ही नेताओं ने चुनाव प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ी और लगातार चुनावी सभा और रैली की। इसलिए क्योंकि दोनों नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। चुनाव में हार जीत से सरकार पर असर तो नहीं पड़ेगा लेकिन 2023 में होने वाले विधानसभा चुनावों की पटकथा जरूर लिखी जाएगी। इसके साथ ही साख भी निर्धारित होगी।
मुख्यमंत्री बदलने की अटकलें हैं सुर्खियों में
मप्र में पिछले कुछ दिनों से लगातार मुख्यमंत्री बदलने की अटकलें चल रही हैं। उत्तराखंड, कर्नाटक और गुजरात के मुख्यमंत्री बदलने के बाद अटकलें तेज हो गई थीं कि मप्र के मुख्यमंत्री को बदला जाएगा। ऐसे में यदि इन उपचुनावों के परिणाम में शिवराज का जादू चलता है और भाजपा बेहतर प्रदर्शन करती है तो उनकी कुर्सी बनी रह सकती है जबकि नतीजे प्रतिकूल आने पर कुर्सी हाथ से जा सकती है। इसी वजह से शिवराज सिंह ने पूरी ताकत चुनाव में झोंकी और लगातार दौरे किए।
कमलनाथ के इर्द-गिर्द पूरा चुनाव
कांग्रेस की बात करें तो ये चुनाव पूर्व सीएम कमलनाथ के इर्द गिर्द ही रहे हैं। उनकी ओर से ही सबसे ज्यादा चुनावी दौरे किए गए। ऐसे में इन उपचुनाव में जीत कमलनाथ का कद मजबूत करेगी और 2023 में उन्हीं के नेतृत्व में कांग्रेस चुनाव लड़ेगी। दिग्विजय सिंह फिलहाल फ्रंट पर नहीं है और कांग्रेस में कमलनाथ ही मौजूदा दौर में सबकुछ है। संगठन की कमान भी उनके पास है तो चुनावी रणनीति भी उनके हिसाब से बन रही है। इसके चलते कमलनाथ ने चुनाव में पूरी ताकत झोंकी और साढ़े ग्यारह माह की अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं।
इसलिए हो रहे हैं उपचुनाव
खंडवा लोकसभा सीट पर भाजपा के नंदकुमार सिंह चौहान सांसद थे। कोरोना की वजह से उनका निधन हुआ और इस सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं। इसी तरह जोबट विधानसभा से कांग्रेस विधायक कलावती भूरिया, पृथ्वीपुर से ब्रजेंद्र सिंह राठौर और रैगांव से जुगल किशोर बागरी का भी कोरोना से निधन हुआ था। चुनाव कानून के मुताबिक लोकसभा और विधानसभा की सीटें खाली होने के छह महीने के भीतर नया प्रतिनिधि चुना जाना आवश्यक है। इसलिए यह उपचुनाव हो रहे हैं।
कौन कहां से है उम्मीदवार
48 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें 32 उम्मीदवार तीन विधानसभा क्षेत्रों में किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं, 16 उम्मीदवार खंडवा लोकसभा सीट पर लड़ रहे हैं। चारों ही सीटों पर मुख्य मुकाबला भाजपा-कांग्रेस में है। जोबट और पृथ्वीपुर में भाजपा ने कांग्रेस छोडक़र पार्टी में शामिल होने वालों को उम्मीदवार बनाया है। इन दोनों ही सीटों पर 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। दो बार की विधायक सुलोचना रावत को टिकट नहीं मिला तो उन्होंने कांग्रेस छोडक़र भाजपा ज्वाइन कर ली। उनका मुकाबला जोबट में कांग्रेस के जिला प्रमुख महेश पटेल से है। पृथ्वीपुर में कुछ ही दिन पहले समाजवादी पार्टी (सपा) छोडक़र भाजपा में आए शिशुपाल यादव को टिकट दिया गया है। उनका मुकाबला ब्रजेंद्र सिंह राठौर के बेटे नितेंद्र सिंह राठौर से है, जो कांग्रेस के टिकट पर भावनात्मक आधार पर जीत दर्ज करने का सपना देख रहे हैं। रैगांव में भाजपा के पूर्व विधायक जुगल किशोर बागरी की रिश्तेदार प्रतिमा बागरी को टिकट दिया है। कांग्रेस ने कल्पना वर्मा को चुना है, जो 2018 में जुगल किशोर बागरी से 18 हजार वोट से हारी थी। कल्पना एक मजबूत उम्मीदवार हैं और हारने के बाद भी इलाके में सक्रिय रहीं हैं।
चुनाव में छाए रहे ये मुद्दे
कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में भाजपा पर महंगाई, बिजली-खाद संकट के साथ ही अन्य मुद्दों को हाइलाइट किया है। कमलनाथ ने तो शिवराज के 17 साल के शासन की कमियां गिनाई। फिर बेरोजगारी, कुपोषण जैसे मुद्दे भी उठाए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हर क्षेत्र में एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। भाजपा ने 12 मंत्रियों और 40 विधायकों को फुलटाइम चुनावी ड्यूटी में लगाए रखा। शिवराज सिंह चौहान ने 40 सभाओं को संबोधित किया। पांच रातें तो उन्होंने निर्वाचन क्षेत्रों में ही बिताईं। कभी किसी आदिवासी के घर भोजन किया तो किसी गरीब के घर जाकर ठहरे। सुबह शेव करने वाला वीडियो भी खूब वायरल हुआ। समय कम बचा था तो पुनासा डैम पर खड़े-खड़े ही एक सभा को संबोधित किया।
सुबह 8 बजे से शुरू होगी मतगणना
मप्र के उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी प्रमोद कुमार शुक्ल ने बताया कि 2 नवंबर को सुबह 8 बजे केंद्रीय प्रेक्षक की उपस्थिति में मतगणना शुरू होगी। प्रत्येक विधानसभा में मतगणना के लिए दो दो हॉल नियत हैं जिनमें सात सात टेबल लगाई है। पोस्टल बैलेट की गणना हेतु निवाड़ी सतना, आलीराजपुर व खंडवा में अलग से कक्ष स्थापित है। पृथ्वीपुर विधानसभा में 22 राउंड, रैगांव में 23 राउंड, जोबट में 30 राउंड और खंडवा संसदीय क्षेत्र में बागली में 26 राउंड, मांधाता में 23 राउंड, खंडवा में 28 राउंड, पंधाना में 28 राउंड, नेपानगर में 27 राउंड, बुरहानपुर में 32 राउंड, भीकनगांव में 25 एवं बड़वाहा में 24 राउंड में मतगणना होगी। मतगणना हेतु 340 कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं।सभी मतगणना स्थलों पर जिला पुलिस बल एवं केंद्रीय अद्र्ध सैनिक बल की तैनाती की गई है।
भाजपा-कांग्रेस दोनों ने किए जीत के दावे
भाजपा-कांग्रेस दोनों ही दलों के नेता चुनाव में जीत के दावे कर रहे हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव खंडेलवाल का कहना है कि जनता ने भाजपा पर भरोसा जताया है। चारों सीटों पर भाजपा की जीत होगी। महंगाई से जनता को फर्क नहीं पड़ता बल्कि विकास देखकर जनता ने भाजपा को वोट दिया है। इधर कांग्रेस अध्यक्ष मनोज राजानी का कहना है कि इस बार अचंभित करने वाले परिणाम आएंगे। चुनाव में मतदान का प्रतिशत कम रहा जो यह दर्शाता है कि सरकार के प्रति कितनी नाराजगी है। महंगाई से जनता त्रस्त है। खरीद फरोख्त की सियासत से जनता नाराज है। चारों सीटों पर कांग्रेस की जीत होगी।
