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MP News: ब्राह्मण परिवार में जन्मे उर्दू शायर अनुराग नागर, कहा- शौक है इसे व्यापार नहीं बनाना चाहता
Tue, 15 Aug 2023 09:18 AM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगढ़
Published by: अरविंद कुमार
Updated Tue, 15 Aug 2023 09:18 AM IST
सार
मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में ब्राह्मण परिवार में जन्मे अनुराग नागर उर्फ अर्श, जिन्होंने हाल ही में उर्दू शायरी की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। ये नेशनल लेवल तक के मुशायरे में भी अपना कलाम पेश कर चुके हैं।
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उर्दू शायर अनुराग नागर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अनुराग नागर से अमर उजाला ने उनके सफर की शुरुआत कहां से-कैसे हुई और उन्होंने उर्दू शायरी को ही क्यों चुना। इसके भी उन्होंने बेबाकी से जवाब दिए और कहा कि हर शायर का अपना एक अलग मुकाम होता है। अनुराग ने कहा, शुरुआती दौर में मैं जब उर्दू शायरी करने लगा तो परिवार का इतना विरोध नहीं था, लेकिन उन्हें ऐसा लगता था कि ये क्या कर रहा है। क्योंकि उन्हें कुछ समझ आता नहीं था। रिश्तेदारों से मेरा इतना ताल्लुक नहीं है, लेकिन फिर भी कोई मिलता था तो वो यही कहता था कि लिखना है तो गीत लिखो। क्योंकि उर्दू उन्हें समझ नहीं आती थी, शायरी से विरोध तो नहीं, लेकिन थोड़ी एलर्जी तो मैंने महसूस की कि लोगों को होती है।
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उन्होंने बताया कि वे अभी तक 20 मुशायरों में हिस्सा ले चुके हैं। मुम्बई, गुजरात और अन्य जगह होने वाले मुशायरे में वे शामिल हुए हैं। दुख को लिखकर उन्हें मजा आता है और वे उसी के बाद शायरी की और मुत्तासिर हुए है।
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अनुराग बताते हैं कि उन्होंने बीकॉम एलएलबी राजगढ़ के शासकीय कॉलेज से की हुई है और उनके दादा पूनम चंद्र नागर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे हैं। उनके परिवार में कुल पांच सदस्य हैं। माता-पिता के अलावा उनके दो छोटे भाई हैं, पिता शरद चंद्र नागर एक रिटॉयर्ड शासकीयकर्मी हैं, माता गृहणी हैं और परिवार के सभी सदस्यों को अब उनका शायराना अंदाज प्रभावित करता है। साथ ही अनुराग कहते हैं कि उन्होंने शायरी शौकिया तौर पर शुरू की है, जिसमें वे अपने दिल के जज्बात जुबा तक लाते हैं और दर्द बयान करते हैं, वे इसे केवल शौक ही रखना चाहते हैं, व्यापार नहीं बनाना चाहते।
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अनुराग के परिवार के लोग भी अनुराग की शायरी से प्रभावित हैं और वे उनकी शायरी को भी काफी पसंद करते हैं। अनुराग के रिश्ते में भाई लगने वाले शास्वत कहते हैं कि अनुराग उर्दू शायरी कहते हैं, हमे गर्व महसूस होता है। क्योंकि इन्हें लिखने का शौक था और हम लोग भी लिखते हैं हमें भी उर्दू शायरी पसंद है।
अनुराग ने अमर उजाला के साथ अपनी कुछ लिखी हुई शायरी साझा की...
- तेरी तस्वीर से जी भर चुका हूं
- मैं आंखों की तरफ से मर चुका हूं
- जो होना है वही होगा
- जो कर सकता था वो मैं कर चुका हूं
- मुझे अब और जादू मत दिखाओ
- मुझे चौंकाओ मत मैं डर चुका हूं
