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MP News: मध्यप्रदेश के इस गांव में आज भी बोली जाती है संस्कृत, ऐसे हुई थी शुरुआत
Sat, 02 Sep 2023 04:19 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगढ़
Published by: अरविंद कुमार
Updated Sat, 02 Sep 2023 04:19 PM IST
सार
मध्यप्रदेश में राजगढ़ जिले की सारंगपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले झिरी गांव में ज्यादातर बोलचाल के लिए संस्कृत भाषा का प्रयोग किया जाता है। इस गांव के बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सभी संस्कृत में बातचीत करते हैं। गांव में पहुंचते ही ग्रामीणों के घरों की दीवारों पर संस्कृत में लिखे हुए श्लोक दिखाई देंगे। यहां घरों के नाम भी संस्कृत में लिखे गए हैं।
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झिरी गांव के लोग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजगढ़ के झिरी गांव को पूरे देश में 'संस्कृत गांव' के नाम से जाना जाता है। झिरी गांव के ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव में साल 1978 से लगातार आरएसएस की एक शाखा नियमित रूप लगती आ रही है। साल 2003 में संघ की जिला बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि शाखा के माध्यम से गांव और समाज में परिवर्तन कैसे लाया जा सकता है।
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ग्रामीणों के अनुसार, इस सवाल के जवाब में झिरी गांव निवासी उदय सिंह चौहान और तत्कालीन जिला कार्यवाहक ने यह सुझाव दिया कि ग्रामीणों को संस्कृत भाषा सिखाई जानी चाहिए, जिससे बच्चो में संस्कार के साथ ही इस भाषा के प्रति रुझान बने। गांव के उदय सिंह चौहान और तत्कालीन जिला कार्यवाहक के सुझाव को स्वीकार करते हुए संस्कृत भारती ने झिरी गांव में एक महिला संस्कृत विद्वान और एक आचार्य को लाया गया। उनके रहने की व्यवस्था गांव के ही दो अलग-अलग परिवारों के द्वारा की गई थी।
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संस्कृत भारती की एक महिला विद्वान विमला पन्ना और बाला प्रसाद तिवारी ने साल 2004 से झिरी गांव में नियमित रूप से संस्कृत पढ़ाना शुरू कर दिया। इसके बाद धीरे-धीरे इस गांव के सभी लोग संस्कृत भाषी हो गए और आज के इस दौर में भी यहां संस्कृत बोली जाती है। झिरी गांव में सभी उम्र के लोग संस्कृत में एक-दूसरे के साथ बातचीत करते हैं और यह गांव अपनी एक अलग पहचान बनाए हुए है।
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