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Project Cheetah: बारिश से पहले पांच और चीतों को छोड़ेंगे जंगल में, शावकों समेत 13 चीते रहेंगे बड़े बाड़े में

Mon, 08 May 2023 06:02 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Mon, 08 May 2023 06:02 PM IST
सार

प्रोजेक्ट चीता के तहत पांच और चीतों को खुले जंगल में जल्द ही छोड़ा जाएगा। बारिश से पहले यह फैसला लिया जाएगा। चार शावकों समेत 13 चीते बड़े बाड़ों में ही रहेंगे। इन पर कूनो के अधिकारियों की नजर रहेगी।

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Project Cheetah Five more cheetahs will be released in the open forest before the rains
5 और चीतों को छोड़ा जाएगा खुले जंगल में - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

प्रोजेक्ट चीता के तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों में से पांच और को जल्द ही कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। नामीबिया से लाए गए चार चीतों को पहले ही खुले जंगल में छोड़ा जा चुका है। इसमें पवन नाम का नर चीता और आशा नाम की मादा चीता तो एक से अधिक बार कूनो की सीमा पार भी कर चुके हैं। दो अन्य चीतों ने अपने आप को बाड़े में ही सीमित रखा है। 

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नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) के निर्देश पर दक्षिण अफ्रीका के वन्यजीव विशेषज्ञ एड्रियन टॉर्डिफ, विंसेंट वान डान मर्वे, वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के प्रमुख वैज्ञानिक कमर कुरैशी, एनटीसीए के अमित मलिक ने 30 अप्रैल को कूनो नेशनल पार्क का दौरा किया। स्थितियों का जायजा लिया और प्रोजेक्ट चीता की समीक्षा करते हुए अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपी है। टीम ने पाया कि सितंबर 2022 और फरवरी 2023 में नामीबिया से आठ और दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को कूनो नेशनल पार्क लाया गया। अब तक दो चीतों- साशा और उदय की मौत हो चुकी है। नामीबिया से लाई गई साशा चीता को किडनी की बीमारी थी। वहीं, दक्षिण अफ्रीका से लाए गए उदय चीता की 23 अप्रैल को मौत हो गई थी। ब्लड रिपोर्ट कहती है कि उसकी मौत किसी संक्रामक रोग की वजह से नहीं हुई। इस वजह से अन्य चीतों में बीमारी फैलने की आशंका नहीं है।  
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पांच और चीतों को छोड़ा जाएगा
कूनो के अधिकारियों से चर्चा के बाद तय किया गया है कि पांच और चीतों (तीन मादा और दो नर) को जल्द ही खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। जून में मानसून की बारिश शुरू होने से पहले यह किया जाएगा। जिन चीतों को छोड़ा जाना है, उनका चयन उनके व्यक्तिगत परीक्षण के बाद होगा कि वह किस तरह से नए माहौल में घुल-मिल रहे हैं। इन चीतों की निगरानी भी वैसे ही होगी, जैसे पहले छोड़े गए चीतों की हो रही है। अन्य आठ चीते मानसून के दौरान बड़े बाड़ों में ही रहेंगे। इनके बाड़े खोल दिए जाएंगे ताकि इन्हें पर्याप्त जगह मिल सके। मार्च में चार शावकों को जन्म देने वाली सियाया चीता को उसके कैम्प में ही रखा जाएगा। मानसून खत्म होने के बाद सितंबर में समीक्षा होगी और उसके बाद अन्य चीतों को खुले जंगल में छोड़ने का फैसला होगा। चीता कंजर्वेशन एक्शन प्लान के तहत गांधीसागर और अन्य इलाकों में इन्हें भेजने का फैसला होगा।
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आशा-पवन निकले सीमा पार
अब तक चार चीतों को कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल में छोड़ा गया है। दो नर चीते गौरव और शौर्य पार्क में ही रहे। उन्होंने नए इलाकों में जाने में कोई रुचि नहीं दिखाई। वहीं, नर चीता पवन और मादा चीता आशा दो बार कूनो से बाहर निकल चुके हैं। पवन को तो दो बार ट्रैंकुलाइज कर दोबारा पार्क में लाना पड़ा। सभी चीतों को सैटेलाइट कॉलर लगी है और उनकी लोकेशन को दिन में दो बार ट्रेस किया जाता है। जरूरत पड़ने पर इससे अधिक बार भी लोकेशन ली जाती है। रोटेटिंग शिफ्ट के आधार पर 24 घंटे निगरानी टीमें चीतों से निश्चित दूरी पर रहती हैं। इन टीमों को ही शिकार सहित व्यवहार से जुड़ी अन्य जानकारियों को रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। रिपोर्ट कहती है कि सभी चीते अच्छी शारीरिक स्थिति में है। नियमित रूप से शिकार कर रहे हैं और सामान्य बर्ताव कर रहे हैं।

कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल में सैर करने को तैयार मादा चिता धात्री सहित दो अन्य चीते...
श्योपुर में कूनो नेशनल पार्क के बड़े-बाड़े में बंद नामीबिया से आई चीता धात्री (तिबलिसी) को अब कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल में रिलीज किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि उसके दक्षिण अफ्रीकी चीतों के साथ रहते हुए सात दिन हो गए हैं, अब उसको खुले जंगल में छोड़ने का निर्णय वरिष्ठों के निर्देश के बाद लिया जा चुका है।

सूत्रों की माने तो गुरुवार को मादा चीता धात्री को वन विभाग की टीम द्वारा खुले जंगल में छोड़ने का ट्रायल भी किया गया था, पर उसमें सफलता नहीं मिल सकी। अब सप्ताह भर बाद फिर से इनको खुले जंगल में छोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

कूनो नेशनल पार्क के बड़े-बड़े में तीन नामीबियाई और 11 साउथ अफ्रीकी चीता कैद हैं। इन चीतों को खुले जंगल में छोड़ने के लिए कूनो प्रबंधन द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के बाद कोशिश शुरू कर दी है, जिसमें गुरुवार को एक नामीबियाई चीता धात्री और दो साउथ अफ्रीकी चीतों को खुले जंगल में छोड़ने की योजना के तहत प्रयास किया गया। लेकिन प्रयास असफल रहा अब बताया जा रहा है कि एक सप्ताह के अंदर चीता धात्री और दो चीतों को अब कभी भी कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल में छोड़ा जा सकता है।


बता दें कि 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर नामीबिया से लाए गए आठ चीतों में से धात्री चीता भी है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने जन्मदिवस पर आठ चीतों को कूनो नेशनल पार्क के कॉरेंन्टीन बाड़ो में छोड़ा था, जिसमें धात्री चीता भी थी। कॉरेंन्टीन समयावधि पूर्ण करने के बाद अब धात्री के साथ दो और चीतों को कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल में छोड़ा जाएगा।

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