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आचार संहिता से पहले मध्य प्रदेश चुनाव आयोग ने की पांच सूचना आयुक्तों की नियुक्ति
न्यूज डेस्क,अमर उजाला
Updated Wed, 03 Oct 2018 02:59 PM IST
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मध्यप्रदेश सूचना आयोग
- फोटो : PTI
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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए राज्य निर्वाचन आयोग सभी स्तर पर तैयारी कर रहा है। चुनाव आचार संहिता के लगने से पहले एमपी निर्वाचन आयोग ने पांच सूचना आयुक्तों की नियुक्ति कर ली है। लेकिन सूचना आयुक्त द्वारा गठित चयन समिति ने नेता प्रतिपक्ष की गैर मौजूदगी में ही पांचों सूचना आयुक्तों की नियुक्ति कर दी।
पांच सूचना आयुक्तों में पूर्व डीजीपी सुरेंद्र सिंह, पूर्व प्रमुख सचिव व मंत्री राजेंद्र शुक्ला के रिश्तेदार अरुण पांडे, पूर्व संभागीय आयुक्त डीपी अहिरवार, सीएम सचिवालय में पदस्थ रहे आरके माथुर और पत्रकार विजय मनोहर तिवारी शामिल हैं। यह पहली बार है जब मुख्य सूचना आयुक्त के अलावा राज्य सूचना आयोग में सात सूचना आयुक्त होंगे।
चयन समिति में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ,मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मंत्री नरोत्तम मिश्रा हैं। लेकिन इस समिति की सोमवार को जब बैठक हुई थी तो नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह मौजूद नहीं थे फिर भी बाद नाम तय हो गए। आपको बता दें कि इस समय पहले से ही दो सूचना आयुक्त आत्मदीप और सुखराज सिंह आयोग में पदस्थ हैं। वहीं मुख्य सूचना आयुक्त केडी खान और आत्मदीप का कार्यकाल 10 फरवरी 2019 और सुखराज सिंह का कार्यकाल 28 फरवरी 2019 तक है।
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सरकार में मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि सूचना आयुक्तों के पद के लिए कुल 187 आवेदन आए थे। इसमें से चयन के लिए छह बार बैठक तय हुई, फिर स्थगित हुई। नेता प्रतिपक्ष ने पूर्व की बैठकों में आने में असमर्थता जताई थी। चयन के लिए होने वाली बैठक में भी उन्होंने पत्र लिखकर आने में असमर्थता जताई और कहा था कि यदि एक सदस्य की गैरमौजूदगी में निर्णय होता है तो उससे उनकी असहमति रहेगी।
नेता प्रतिपक्ष के बिना ही सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के विरोध में कई लोग हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे ने इन नियुक्तियों पर आपत्ति जाहिर करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन से कहा है कि वे इन्हें शपथ न दिलाएं। वहीं, चयन समिति के फैसले के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर करने की भी बात कही जा रही है। नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर एक-दो दिन में राज्यपाल से स्वीकृति लेकर अधिसूचना जारी की जाएगी।
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पांच सूचना आयुक्तों में पूर्व डीजीपी सुरेंद्र सिंह, पूर्व प्रमुख सचिव व मंत्री राजेंद्र शुक्ला के रिश्तेदार अरुण पांडे, पूर्व संभागीय आयुक्त डीपी अहिरवार, सीएम सचिवालय में पदस्थ रहे आरके माथुर और पत्रकार विजय मनोहर तिवारी शामिल हैं। यह पहली बार है जब मुख्य सूचना आयुक्त के अलावा राज्य सूचना आयोग में सात सूचना आयुक्त होंगे।
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चयन समिति में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ,मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मंत्री नरोत्तम मिश्रा हैं। लेकिन इस समिति की सोमवार को जब बैठक हुई थी तो नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह मौजूद नहीं थे फिर भी बाद नाम तय हो गए। आपको बता दें कि इस समय पहले से ही दो सूचना आयुक्त आत्मदीप और सुखराज सिंह आयोग में पदस्थ हैं। वहीं मुख्य सूचना आयुक्त केडी खान और आत्मदीप का कार्यकाल 10 फरवरी 2019 और सुखराज सिंह का कार्यकाल 28 फरवरी 2019 तक है।
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सरकार में मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि सूचना आयुक्तों के पद के लिए कुल 187 आवेदन आए थे। इसमें से चयन के लिए छह बार बैठक तय हुई, फिर स्थगित हुई। नेता प्रतिपक्ष ने पूर्व की बैठकों में आने में असमर्थता जताई थी। चयन के लिए होने वाली बैठक में भी उन्होंने पत्र लिखकर आने में असमर्थता जताई और कहा था कि यदि एक सदस्य की गैरमौजूदगी में निर्णय होता है तो उससे उनकी असहमति रहेगी।
नेता प्रतिपक्ष के बिना ही सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के विरोध में कई लोग हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे ने इन नियुक्तियों पर आपत्ति जाहिर करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन से कहा है कि वे इन्हें शपथ न दिलाएं। वहीं, चयन समिति के फैसले के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर करने की भी बात कही जा रही है। नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर एक-दो दिन में राज्यपाल से स्वीकृति लेकर अधिसूचना जारी की जाएगी।
सूचना आयुक्तों की नियुक्ति तो हो गई है लेकिन इनके बैठने की जगह नहीं है। आपको बता दें कि सूचना भवन में द्वितीय तल पर सात और तृतीय तल पर तीन कोर्ट सुनवाई के लिए हैं। इसके अलावा तृतीय तल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के पास है। द्वितीय तल पर सात कोर्ट में से तीन पर मुख्य सूचना आयुक्त और दो सूचना आयुक्त बैठते हैं। यानी चार कोर्ट ही बचे हैं और आयुक्तों की संख्या पांच है। आयोग के मुताबिक फरवरी में पद खाली होने के बाद ही स्थिति ठीक होगी।
