बड़वानी पुलिस बर्बरता में दो निलंबित, सीएम शिवराज बोले- ऐसी अराजकता बर्दाश्त नहीं
मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले में सिख ग्रंथी के साथ पुलिस की मारपीट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और केंद्रीय कैबिनेट मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने भी साझा किया और कार्रवाई की मांग की। इसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने ट्वीट कर बताया कि मामले में एएसआई और हेड कॉन्स्टेबल को निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने मामले की जांच इंदौर आईजी से करवाने की बात भी कही।
शिवराज सिंह ने इसे लेकर ट्वीट किया, 'बड़वानी में एएसआई सीताराम भटनागर और हेड कॉन्स्टेबल मोहन जामरे को सिख बंधुओं के साथ अमानवीय व्यवहार के लिए तुरंत निलंबित किया गया है। सिखों के साथ ऐसी बर्बरता किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की जांच इंदौर आईजी द्वारा की जाएगी और इनके विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी। ऐसी बर्बरता और अराजकता मैं किसी भी हाल में सहन नहीं करूंगा। दोषियों को उनके कुकर्मों की सजा अवश्य मिलेगी।'
बड़वानी में ASI सीताराम भटनागर और HC मोहन जामरे को सिख बन्धुओं के साथ किये गए अमानवीय व्यवहार के लिए तुरंत निलंबित किया गया है। सिखों के साथ ऐसी बर्बरता किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की जाँच इंदौर आईजी द्वारा की जाएगी और इनके विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी। https://t.co/Dh3jznK8Cy
विज्ञापन विज्ञापन— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) August 7, 2020
हरसिमरत कौर ने इस घटना के वीडियो को साझा करते हुए लिखा, 'ज्ञानी प्रेम सिंह ग्रंथी और सिख समुदाय के अन्य लोगों पर मध्यप्रदेश में बेरहमी से किया गया हमला मानवता के खिलाफ है। यह पूरी तरह से निंदनीय और अस्वीकार्य है। पूरी दुनिया में मौजूद सिख समुदाय के लोगों को इस घटना से झटका लगा है। मैं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मांग करती हूं कि मामले में दोषियों के खिलाफ तुरंत और उदाहरण स्थापित करने वाली कार्रवाई की जाए।'
कमलनाथ ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर घटना का वीडियो जारी करते हुए लिखा, 'मध्यप्रदेश के बड़वानी के पलसूद में प्रेम सिंह ग्रंथी जो कि वर्षों से पुलिस चौकी के पास छोटी सी दुकान लगाकर जीवन यापन करते आ रहे हैं। उनको वहां पुलिस ने अमानवीय तरीके से पीटा, उनकी पगड़ी उतार दी, बाल पकड़कर बुरी तरह से सड़क पर उनकी पिटाई की। यह गुंडागर्दी होकर सिख धर्म की धार्मिक परंपराओं का अपमान भी है। ऐसी घटनाएं बर्दाश्त नहीं की जा सकती हैं।'
