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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहुंचा ‘हनी ट्रैप’ मामला, सीबीआई जांच की मांग, जांच के लिए एसआईटी गठित

Mon, 23 Sep 2019 09:46 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आसिम खान Updated Mon, 23 Sep 2019 09:46 PM IST
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PIL filed in Madhya Pradesh High Court for CBI inquiry in Honey Trap case
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में सोमवार को एक जनहित याचिका दायर कर हाल ही में सामने आए हनी ट्रैप मामले को जांच के लिए सीबीआई को सौंपे जाने की गुहार लगाई गई है। याचिका में आशंका जताई गई है कि सूबे के राजनेताओं के दखल से इस हाई-प्रोफाइल प्रकरण की जारी पुलिस जांच पर असर पड़ सकता है। वहीं इसकी जांच के लिये विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। वहीं इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने वाले इंदौर नगर निगम के एक आला अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। 

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ये याचिका स्थानीय नागरिक दिग्विजय सिंह भंडारी (38) ने दायर की है। याचिकाकर्ता के वकील मनोहर दलाल ने संवाददाताओं से कहा, हमें संदेह है कि मध्यप्रदेश पुलिस हनी ट्रैप मामले के राज छिपा रही है, ताकि प्रभावशाली लोगों को बचाया जा सके। इसलिए व्यापक जनहित में जरूरी है कि इस मामले की जांच पुलिस से लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी जाये, ताकि इसकी जांच राज्य के राजनेताओं के दखल से दूर रह सके। 
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मनोहर ने बताया कि याचिका में यह गुहार भी की गई है कि हनी ट्रैप गिरोह के जाल में फंसने वाले इंदौर नगर निगम के एक आला अफसर पर भ्रष्टाचार तथा दुष्कर्म के आरोपों में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। इसके साथ ही, उसके कथित पेशेवर दुराचरण के कारण उसे पद से निलंबित किया जाए।
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उन्होंने बताया कि हनी ट्रैप मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की तारीख फिलहाल तय नहीं की गई है। हालांकि, इस पर जल्द सुनवाई की उम्मीद है। गौरतलब है कि पुलिस ने इंदौर नगर निगम के अधीक्षण इंजीनियर हरभजन सिंह की शिकायत पर बृहस्पतिवार को हनी ट्रैप गिरोह का खुलासा किया था। गिरोह की पांच महिलाओं समेत छह सदस्यों को भोपाल और इंदौर से गिरफ्तार किया गया था। 

नगर निगम अधिकारी ने पुलिस को बताया कि गिरोह ने उनके कुछ आपत्तिजनक वीडियो क्लिप वायरल करने की धमकी देकर उनसे तीन करोड़ रुपये की मांग की थी। ये क्लिप खुफिया तरीके से तैयार किए गए थे। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक गिरोह पर संदेह है कि वह राजनेताओं और नौकरशाहों समेत कई प्रभावशाली लोगों को अपने जाल में फंसा चुका है। इस बारे में विस्तृत जांच जारी है।

जांच के लिए एसआईटी का गठन

मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने इंदौर में दर्ज किये गये हनी ट्रैप (मोहपाश) मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच के लिये विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।

मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा यहां सोमवार को इस मामले में अधिकृत तौर पर बताया गया है कि इन्दौर के पलासिया पुलिस थाना क्षेत्र में 17 सितंबर को एक व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज किये गये मामले की जांच के लिये पुलिस महानिदेशक विजय कुमार सिंह ने एसआईटी गठित कर दी है।

एसआईटी का गठन पुलिस मुख्यालय में पदस्थ पुलिस महानिरीक्षक, (अपराध अनुसंधान) डी श्रीनिवास वर्मा के नेतृत्व में किया गया है। पुलिस महानिदेशक ने इस घटना के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिये हैं।

गौरतलब है कि पुलिस ने इंदौर नगर निगम के अधीक्षण इंजीनियर हरभजन सिंह की शिकायत पर हनी ट्रैप गिरोह का खुलासा किया था। गिरोह की पांच महिलाओं समेत छह सदस्यों को भोपाल और इंदौर से गिरफ्तार किया गया था।

नगर निगम अधिकारी ने पुलिस को बताया कि गिरोह ने उनके कुछ आपत्तिजनक वीडियो क्लिप वायरल करने की धमकी देकर उनसे तीन करोड़ रुपये की मांग की थी। ये क्लिप खुफिया तरीके से तैयार किये गये। 

हनी ट्रैप" में फंसा अधिकारी निलंबित

हनी ट्रैप मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने वाले इंदौर नगर निगम के एक आला अधिकारी को अनैतिक कार्य में शामिल होने के आरोप में सोमवार को पद से निलंबित कर दिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि नगर निगम प्रशासन ने इस शहरी निकाय के अधीक्षण इंजीनियर हरभजन सिंह को वर्ष 1965 के मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत निलंबित किया।

निलंबन आदेश में कहा गया कि "अनैतिक कृत्य (हनी ट्रैप मामले) में सिंह की कथित संलिप्तता पहली नजर में अशोभनीय होने के साथ नैतिक पतन की परिचायक है। इस कारण उनकी पेशेवर कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिन्ह लग गया है।" 

मामले के तार कई जगहों से जुड़े

इस बीच, पुलिस को जांच में कुछ नये सुराग मिलने के बाद इस मामले के तार कई स्थानों से जुड़ गये हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) रुचिवर्धन मिश्रा ने संवाददाताओं को बताया, "पुलिस हिरासत में गिरोह की दो महिला आरोपियों से पूछताछ की गयी है। जांच में हमें कुछ नये सुराग भी मिले हैं। इनके आधार पर हम भोपाल, राजगढ़, छतरपुर और अन्य स्थानों पर जांच को आगे बढ़ा रहे हैं।"

उन्होंने बताया कि जांच के दौरान यह भी पता चला है कि गिरोह की महिला आरोपियों ने मोहपाश की वारदात के लिये इंदौर के दो होटलों में ठहरने के दौरान फर्जी पहचान पत्र प्रस्तुत किये थे।

उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक गिरोह पर संदेह है कि वह राजनेताओं और नौकरशाहों समेत कई प्रभावशाली लोगों को अपने जाल में फंसा चुका है। इस बारे में विस्तृत जांच जारी है।

गिरोह के गिरफ्तार आरोपियों में श्वेता विजय जैन के अलावा, आरती दयाल, मोनिका यादव, श्वेता स्वप्निल जैन, बरखा सोनी और उनका चालक ओमप्रकाश कोरी शामिल हैं। 



गौरतलब है कि गिरोह के छह गिरफ्तार आरोपियों में शामिल आरती दयाल (29) और मोनिका यादव (18) की पुलिस हिरासत अवधि एक स्थानीय अदालत ने कल रविवार को 28 सितंबर तक के लिये बढ़ा दी थी।

बाकी चार आरोपी न्यायिक हिरासत के तहत स्थानीय जेल में बंद हैं।

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