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भोपाल में कोरोना वायरस से मरने वालों में से 75 फीसदी गैस कांड पीड़ित : एनजीओ
Mon, 22 Jun 2020 11:02 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Mon, 22 Jun 2020 11:02 PM IST
सार
भोपाल में 11 जून तक कोरोना वायरस की वजह से मरने वाले लोगों में से करीब 75 फीसदी लोग ऐसे थे जो साल 1984 में हुए गैस कांड के पीड़ित थे। भोपाल गैस पीड़ितों की मदद करने वाले गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) ने सोमवार को यह जानकारी दी। एनजीओ ने बताया इन गैस पीड़ितों की रोग प्रतिरोधक शक्ति (इम्यूनिटी) बहुत कम थी।
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bhopal gas tragedy
- फोटो : Social Media
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विस्तार
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन (बीजीआईए) की संयोजक रचना ढींगरा बताती हैं कि हमने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक पत्र लिखा है जिसमें इस ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की गई है।
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दुनिया के सबसे खराब औद्योगिक आपदा के पीड़ितों के लिए काम करने वाले बीजीआईए और तीन अन्य एनजीओ ने एक विश्लेषण किया है जिसमें दावा किया गया है कि भोपाल में 11 जून तक कोरोना से मरने वाले 60 में से 48 मरीज ऐसे थे जो गैस कांड के भी पीड़ित रहे थे।
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एनजीओ के विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से मरने वाले इन 48 लोगों में तीन लोग ऐसे थे जिनके माता-पिता इस गैस कांड के शिकार हुए थे। इनका जन्म 35 साल पहले उनके माता-पिता के जहरीली गैस के संपर्क में आने के बाद हुआ था।
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रचना ढींगरा कहती हैं कि ये आंकड़े यह दर्शाते हैं कि गैस कांड के 35 साल बीत जाने के बाद पीड़ितों के बच्चों को भी उस घटना का शिकार होना पड़ रहा है। यहां के यूनियन कार्बाइड प्लांट से निकली जहरीली मेथिल आइसोसाइनेट गैस का जहरीला असर आज भी लोग झेल रहे हैं।
विश्लेषण से पता चला है कि कोविड-19 के कारण मरने वाले 81 फीसदी गैस पीड़ितों को पहले से ही स्वास्थ्य समस्याएं थीं। ढींगरा ने कहा, 'बेशक, जहरीली गैस के संपर्क में आने से वह स्थायी असमर्थता की स्थिति में आ गए गए हैं।
ढींगरा ने कहा, हम चाहते हैं कि राज्य सरकार हमारे साथ बातचीत करे और गैस त्रासदी से बचे लोगों को उनकी मदद करने का रास्ता खोजे। इस विश्लेषण को तैयार करने वाले अन्य तीन एनजीओ भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ, भोपाल गैस पीड़ित महिरा पुरुष संघर्ष मोर्चा और चिल्ड्रेन अगेंस्ट डाउ-कार्बाइड हैं।
वहीं, गैस पीड़ितों के लिए सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी समिति के सदस्य पुरनेंदु शुक्ला ने कहा, गैस कांड पीड़ितों के लिए काम कर रहे चार एनजीओ का विश्लेषण सही है।
शुक्ला ने कहा कि सरकार को इस विश्लेषण को गंभीरता से लेना चाहिए और कोई लापरवाही नहीं करनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा, राज्य सरकार के पास गैस पीड़ितों का डाटा भी नहीं है जो बहुत परेशान करने वाला है, हम अदालत को इन जानकारियों से वाकिफ कराएंगे।
हालांकि, राज्य सरकार के एक अधिकारी ने कहा है कि उन्हें इस विश्लेषण की जानकारी है। भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास निदेशक बसंत कुर्रे ने कहा कि उन्हें विश्लेषण की जानकारी है। कोरोना से मरने वाले 20 लोग गैस पीड़ित थे। हम जांच कर रहे हैं। सरकार गैस पीड़ितों की बेहतरी के लिए काम कर रही है।
