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Ladli Behna Yojana: दमोह में नहीं मिल रहे नेटवर्क तो 300 फीट ऊंचे पहाड़ पर भरे जा रहे लाड़ली बहना के फॉर्म
Mon, 24 Apr 2023 05:03 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 24 Apr 2023 05:03 PM IST
सार
Ladli Behna Yojana: शासन की सबसे महत्वपूर्ण मुख्यमंत्री लाडली बहन योजना के अंतर्गत भरे जा रहे आवेदनों के लिए कलकुआं गांव की महिलाओं को गांव से 8 किलोमीटर दूर चौरईया के जंगल की 300 फीट ऊंची घाटी पर जाना पड़ रहा है। रोजगार सहायक राकेश यादव के अनुसार कलकुआं गांव में कमजोर नेटवर्क के कारण वैरिफिकेशन ओटीपी नहीं आती है।
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दमोह में पहाड़ पर जाकर भरना पड़ रहे लाडली बहना योजना के फॉर्म
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मध्यप्रदेश शासन की महत्वाकांक्षी योजना लाडली बहना योजना के फॉर्म भरे जा रहे हैं, लेकिन दमोह जिले के ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की समस्या के चलते परेशानी आ रही है। हालत ये है कि हटा ब्लॉक के मडियादो वनांचल गांव में 300 फीट ऊंचे पहाड़ पर महिलाओं को बैठाकर लाड़ली बहना योजना के फॉर्म भरे जा रहे हैं।
1000 के लिए 300 फीट ऊंचे पहाड़ की चढ़ाई
दमोह जिले को हटा तहसील के मडियादो के समीप की ग्राम पंचायत चौरईया में नेटवर्क ना मिलने के कारण लोगों को इंटरनेट संबंधी कार्यों के लिए परेशान होना पड़ता है। वर्तमान में शासन की सबसे महत्वपूर्ण मुख्यमंत्री लाडली बहन योजना के अंतर्गत भरे जा रहे आवेदनों के लिए कलकुआं गांव की महिलाओं को गांव से 8 किलोमीटर दूर चौरईया के जंगल की 300 फीट ऊंची घाटी पर जाना पड़ रहा है। रोजगार सहायक राकेश यादव के अनुसार कलकुआं गांव में कमजोर नेटवर्क के कारण वैरिफिकेशन ओटीपी नहीं आती है। इसलिए महिलाओं को सामूहिक रूप से ऊंचाई वाले स्थान पर बुलाकर फॉर्म भरते हैं।
पंचायत भवन की छत पर करना पड़ता है काम
इसी तरह चौरईया में भी नाम मात्र के लिए सिग्नल आता है, लेकिन इंटरनेट नहीं चलता है। जिस कारण से लाड़ली बहना योजना के फॉर्म भरने के बाद ग्राम पंचायत भवन की छत पर काम करते हैं। क्योंकि उचाई पर जाने से
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गांव में इंटरनेट चलता है। कभी-कभी चौरईया गांव और पाटन गंव के लोगों को भी कलकुआं के ऊपर वाली 300 फीट ऊंचे पहाड़ पर ले जाना पड़ता है।
घने जंगल और पहाड़ों के बीच बसे हैं तीन गांव
बता दें कि ग्राम चौरईया घने जंगलों और ऊंचे पहाड़ी के बीच तलहटी में बसी पंचायत है। जिसके अंतर्गत 3 गांव आते हैं जो एक दूसरे से 10 किलोमीटर की दूरी पर बसे हैं। आसपास के जंगल और क्षेत्र छतरपुर जिले का है। कलकुआं, पाटन, चौरईया गांव में एक भी नेटवर्क टावर नहीं है। ग्रमीणों के छतरपुर जिले के अन्य ग्रामों में लगे टावर से कभी कभार ही सिग्नल मिल पाते हैं। जिससे मुश्किल से बात हो पाती है। मडियादो निवासी सुधीर मिश्रा का कहना है कि इस क्षेत्र की अनेक पंचायतों में इस प्रकार की समस्या आती है जिससे शासन की योजनाओं का लाभ मिलने में भी ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नेटवर्क समस्या के संबंध में दमोह कलेक्टर मयंक अग्रवाल ने कहा कि नेटवर्क की समस्या तो आ रही है इसके समाधान के लिए प्रयास किया जा रहा है।
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1000 के लिए 300 फीट ऊंचे पहाड़ की चढ़ाई
दमोह जिले को हटा तहसील के मडियादो के समीप की ग्राम पंचायत चौरईया में नेटवर्क ना मिलने के कारण लोगों को इंटरनेट संबंधी कार्यों के लिए परेशान होना पड़ता है। वर्तमान में शासन की सबसे महत्वपूर्ण मुख्यमंत्री लाडली बहन योजना के अंतर्गत भरे जा रहे आवेदनों के लिए कलकुआं गांव की महिलाओं को गांव से 8 किलोमीटर दूर चौरईया के जंगल की 300 फीट ऊंची घाटी पर जाना पड़ रहा है। रोजगार सहायक राकेश यादव के अनुसार कलकुआं गांव में कमजोर नेटवर्क के कारण वैरिफिकेशन ओटीपी नहीं आती है। इसलिए महिलाओं को सामूहिक रूप से ऊंचाई वाले स्थान पर बुलाकर फॉर्म भरते हैं।
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पंचायत भवन की छत पर करना पड़ता है काम
इसी तरह चौरईया में भी नाम मात्र के लिए सिग्नल आता है, लेकिन इंटरनेट नहीं चलता है। जिस कारण से लाड़ली बहना योजना के फॉर्म भरने के बाद ग्राम पंचायत भवन की छत पर काम करते हैं। क्योंकि उचाई पर जाने से
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गांव में इंटरनेट चलता है। कभी-कभी चौरईया गांव और पाटन गंव के लोगों को भी कलकुआं के ऊपर वाली 300 फीट ऊंचे पहाड़ पर ले जाना पड़ता है।
घने जंगल और पहाड़ों के बीच बसे हैं तीन गांव
बता दें कि ग्राम चौरईया घने जंगलों और ऊंचे पहाड़ी के बीच तलहटी में बसी पंचायत है। जिसके अंतर्गत 3 गांव आते हैं जो एक दूसरे से 10 किलोमीटर की दूरी पर बसे हैं। आसपास के जंगल और क्षेत्र छतरपुर जिले का है। कलकुआं, पाटन, चौरईया गांव में एक भी नेटवर्क टावर नहीं है। ग्रमीणों के छतरपुर जिले के अन्य ग्रामों में लगे टावर से कभी कभार ही सिग्नल मिल पाते हैं। जिससे मुश्किल से बात हो पाती है। मडियादो निवासी सुधीर मिश्रा का कहना है कि इस क्षेत्र की अनेक पंचायतों में इस प्रकार की समस्या आती है जिससे शासन की योजनाओं का लाभ मिलने में भी ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नेटवर्क समस्या के संबंध में दमोह कलेक्टर मयंक अग्रवाल ने कहा कि नेटवर्क की समस्या तो आ रही है इसके समाधान के लिए प्रयास किया जा रहा है।
