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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   MP News More than 100 cattle died due to Lumpy virus, CM said awareness is necessary to save animals

MP News: लंपी वायरस से 100 से ज्यादा मवेशियों की मौत, सीएम बोले पशुधन को बचाने लड़नी होगी लड़ाई

Thu, 22 Sep 2022 04:17 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Thu, 22 Sep 2022 04:17 PM IST
सार

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गौपालकों और पशुपालकों के नाम एक संदेश जारी किया है। इसमें प्रदेश में सौ से अधिक गायों के लिए जानलेवा साबित हुए लंपी वायरस के लक्षणों, बचाव और उपचार की जानकारियां दी हैं।  ।

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MP News More than 100 cattle died due to Lumpy virus, CM said awareness is necessary to save animals
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश के 26 से ज्यादा जिलों में लंपी वायरस का संक्रमण फैल चुका है। इसके चलते आठ हजार के करीब मवेशी अब तक संक्रमित हो चुके हैं। 100 से ज्यादा मवेशियों की मौत हो चुकी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को गौपालकों और पशुपालकों के नाम संदेश जारी किया। सीएम ने कहा कि हमारे पशुधन पर लंपी वायरस की बीमारी के रूप में गंभीर संकट आया है। प्रदेश में लंपी वायरस तेजी से पैर पसार रहा है। हम अपने पशुओं को विशेषकर गौमाता को मां मानकर पूजा करते हैं। गोमाता या बाकी पशु हमारी अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने का काम करते हैं। आज जब वह संकट में हैं तो हमारा कर्तव्य है कि इस संकट से उन्हें निकालने के लिए भरपूर प्रयास करें। इस संकट में आप अकेले नहीं है। सरकार आपके साथ है। सरकार आपको पूरा सहयोग करेगी। इस बीमारी का टीका भी हम फ्री में लगा रहे हैं।
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सीएम ने कहा कि इस बीमारी से निपटने के लिए सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी। लेकिन सावधानी आपको भी रखी होगी। यदि आपने सावधानी नहीं रखी तो हमारा पशुधन गंभीर संकट में आएगा। हम वैसे भी जो चेतना मनुष्य में है, वही प्राणियों में देखते हैं। इस बीमारी को रोकने के लिए तत्काल इसके रोग के लक्षण पहचाने और इलाज शुरू करें। साथ ही संक्रमण फैलने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए। सीएम ने कहा कि जिस प्रकार कोविड से इंसानों को बचाने के लिए हमने लड़ाई लड़ी थी, वैसे ही हमारे गौवंश को बचाने के लिए हमें लड़ाई लड़नी पड़ेगी। 
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रोग के प्रमुख लक्षण
  • संक्रमित पशु को हल्का बुखार होना।
  • मुंह से अत्यधिक लार तथा आंखों एवं नाक से पानी बहना।
  • लिंफ नोड्स तथा पैरों में सूजन एवं दूग्ध उत्पादन में गिरावट।
  • गर्भित पशुओं में गर्भपात एवं कभी-कभी पशु की मृत्यु होना।
  • पशु के शरीर पर त्वचा में बड़ी संख्या में 02 से 05 सेंटीमीटर आकार की गठानें बन जाना।
 
रोकथाम और बचाव के उपाय
  • संक्रमित पशु / पशुओं के झुण्ड को स्वस्थ पशुओं से पृथक रखना।
  • कीटनाशक और विषाणु नाशक से पशुओं के परजीवी कीट, किलनी, मक्खी, मच्छर आदि को नष्ट करना।
  • पशुओं के आवास- बाड़े की साफ सफाई रखना।
  • संक्रमित क्षेत्र से अन्य क्षेत्रों में पशुओं के आवागमन को रोका जाना
  • रोग के लक्षण दिखाई देने पर अविलंब पशु चिकित्सक से उपचार कराना।
  • क्षेत्र में बीमारी का प्रकोप थमने तक पशुओं के बाजार, मेले आयोजन तथा पशुओं के क्रय-विक्रय आदि को रोकना।
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