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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   MP News: Kamal Nath's big allegation told the government's PESA rule as anti-tribal, give this reason

MP News: शिवराज ने लागू किए पेसा नियम, जानिए आदिवासियों के लिए बना नया कानून क्यों पसंद नहीं आया कमलनाथ को

Wed, 16 Nov 2022 12:14 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Wed, 16 Nov 2022 12:14 PM IST
सार

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आरोप लगाया है कि मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार आदिवासियों के लिए पेसा कानून लागू करने के नाम पर आदिवासीहितैषी होने का ढोंग कर रही है। केंद्र सरकार ने 1996 में पेसा कानून बनाया था, लेकिन भाजपा सरकार की आदिवासी विरोधी मानसिकता के कारण पिछले 26 साल से यह कानून प्रदेश में लागू नहीं हो सका।

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MP News: Kamal Nath's big allegation told the government's PESA rule as anti-tribal, give this reason
पूर्व सीएम कमलनाथ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश सरकार ने बिरसा मुंडा की जयंती पर प्रदेश के 89 आदिवासी ब्लॉक्स में पेसा कानून लागू कर दिया है। इस पर सियासत भी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने राज्य सरकार के पेसा कानून को आदिवासी विरोधी बता दिया है। उन्होंने कानून के तहत बने नए नियमों की विसंगतियां भी गिनाई है।

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पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को कहा कि मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार आदिवासियों के लिए पेसा कानून लागू करने के नाम पर आदिवासीहितैषी होने का ढोंग कर रही है। केंद्र सरकार ने 1996 में पेसा कानून बनाया था, लेकिन भाजपा सरकार की आदिवासी विरोधी मानसिकता के कारण पिछले 26 साल से यह कानून प्रदेश में लागू नहीं हो सका। अब जब प्रदेश सरकार ने यह कानून लागू किया है तो उसके नियम इस तरह से बनाए हैं कि आदिवासियों को कोई फायदा नहीं मिलने वाला।
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2003 से क्यों रोके रखे नियम
कमलनाथ ने कहा कि जब 1996 में केंद्र सरकार ने यह कानून बनाया था तब प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी और आवश्यक विधायी कार्य किए जा रहे थे। लेकिन 2003 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से पेसा कानून को लागू न करने का षड्यंत्र किया गया। प्रश्न यह है कि किसको समर्थ बनाने के लिए यह कार्य हो रहा है? आदिवासी समुदाय को या नौकरशाही को? आदिवासी हाथ जोड़े खड़ा हो तो क्या यह पेसा कानून की मूल भावना के प्रतिकूल होकर सरकार की नियत को आदिवासी विरोधी प्रमाणित नहीं करता?
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नए नियम स्वशासन की स्थापना की मंशा के विपरीत
कमलनाथ ने कहा कि आदिवासी समाज को सशक्त बनाने का प्रावधान ऐसा होना चाहिए था कि वन विभाग का कर्मचारी आदिवासी ग्राम सभा से अनुमति लेता, यदि उसे तेंदूपत्ते का संग्रहण और विपणन करना हो। प्रावधान तो यह होना चाहिये था कि वन विभाग को आदिवासी ग्रामसभा से अनुमति लेनी पड़ेगी, तभी आदिवासी सशक्तिकरण होता। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लागू किए जा रहे पेसा नियम आदिवासी क्षेत्रों में उनकी सामाजिक, संस्कृति और जीवन शैली के अनुकूल स्वशासन की स्थापना करने की निहित मंशा को समाप्त करते हैं। कमलनाथ ने कहा कि इन नियमों को निर्मित करने के पूर्व आदिवासी समाज से गहन विचार विमर्श, सुझाव लेना, सर्व दलों की बैठक करना था। सरकार की आदिवासी समाज के प्रति सोच और गंभीरता को प्रकट करता है।


अन्य कानूनों में भी करना होगा संशोधन
कमलनाथ ने कहा कि भाजपा सरकार यदि महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज और राजीव गांधी जी की पंचायत राज की मंशा के अनुरूप आदिवासी समाज की भावनाओं के अनुकूल धरातल पर स्थापित करना चाहती तो वन अधिकार कानून, साहूकारी कानून, भू-अर्जन कानून, पंचायत कानून, भूराजस्व संहिता और अन्य सुसंगत कानूनों की समग्रता में समीक्षा और निर्वचन कर संविधान और पेसा कानून के आलोक में नियमों को बनाती। भारतीय जनता पार्टी को आदिवासी समुदाय के साथ छल करने की मानसिकता छोड़ देनी चाहिए और इमानदारी से आदिवासी समुदाय का सम्मान और कल्याण करना चाहिए।

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