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MP News: बिलकिस बानो केस की तरह MP में नहीं छूट पाएंगे गैंगरेप के दोषी, आखिरी सांस तक रहना होगा जेल में

Thu, 01 Sep 2022 10:35 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Thu, 01 Sep 2022 10:35 PM IST
सार

मध्य प्रदेश सरकार की नई नीति में जघन्य अपराधियों को कोई राहत नहीं मिलेगी। इसमें आतंकी गतिविधियों, छोटी बच्चियों से दुष्कर्म, गैंगरेप के दोषी, जहरीली शराब बनाने, विदेशी मुद्रा से जुड़े अपराध, दो या दो से अधिक प्रकरण में हत्या के दोषी को अब अंतिम सांस तक जेल में ही रहना होगा।

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MP News: Gangrape convicts will not be able to be released in MP like in Bilkis Bano case
मंत्रालय भवन, वल्लभ भवन, भोपाल - फोटो : File

विस्तार

गुजरात के बिलकिस बानो केस की तरफ एमपी में गैंगरेप के आरोपी जेल से नहीं छूट पाएंगे। मध्य प्रदेश सरकार ने बच्चियों से दुष्कर्म करने वालों, सामूहिक दुष्कर्म के दोषी, आतंकी और नशीले पदार्थ के अवैध व्यापार के मामले में आजीवन सजा काट रहे बंदियों को अब आखिरी सांस तक जेल में रखने का फैसला लिया है।
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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में गुरुवार को मंत्रालय में अलग-अलग अधिनियमों में आजीवन कारावास की सजा पाने वाले कैदियों की रिहाई की अवधि की प्रस्तावित नीति-2022 पर चर्चा की गई। अभी प्रदेश में 2012 की नीति लागू है। सरकार ने दस राज्यों की नीतियों के अध्ययन के बाद यह प्रस्तावित नीति तैयार की गई है। इसके लिए अपर मुख्य सचिव गृह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति के दो अन्य सदस्यों में प्रमुख सचिव, विधि और महानिदेशक जेल शामिल थे। वर्तमान में प्रदेश के 131 जेलों में 12 हजार से अधिक बंदी आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।
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जघन्य अपराध के दोषी को राहत नहीं
नई नीति में जघन्य अपराधियों को कोई राहत नहीं मिलेगी। इसमें आतंकी गतिविधियों, छोटी बच्चियों से दुष्कर्म, गैंगरेप के दोषी, जहरीली शराब बनाने, विदेशी मुद्रा से जुड़े अपराध, दो या दो से अधिक प्रकरण में हत्या के दोषी को अब अंतिम सांस तक जेल में ही रहना होगा। ऐसे अपराधियों का कारावास अब 14 साल में समाप्त नहीं होगा। इसमें शासकीय सेवकों की सेवा के दौरान हत्या का अपराध करने वाले दोषी भी शामिल होंगे। इसी तरह राज्य के विरुद्ध अपराध और सेना के किसी भी अंग से संबंधित अपराध घटित करने वाले अपराधी भी किसी रियायत का लाभ नहीं ले सकेंगे।
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सख्त होगी रिहाई की प्रक्रिया
आजीवन कारावास से दंडित धारा 376 के दोषी बंदी भी 20 वर्ष का वास्तविक कारावास और परिहार सहित 25 वर्ष पूर्ण करने से पहले जेल से रिहा नहीं हो सकेंगे। जिन आजीवन कारावास के बंदियों को 14 साल या 20 साल की वास्तविक सजा के बाद रिहाई की पात्रता बनेगी वह भी तभी रिहा होंगे जब कलेक्टर, एसपी और जिला प्रोसीक्यूशन ऑफिसर की अनुशंसा होगी और जेल मुख्यालय द्वारा उक्त अनुशंसा के आधार पर राज्य सरकार को भेजा जाएगा और जिसमें राज्य सरकार की स्वीकृति होगी।

अब यह होगी प्रक्रिया
पूर्व में लागू वर्ष 2012 की नीति में साल में दो बार आजीवन कारावास काट रहे बंदियों के रिहाई नीति के अनुसार तथा जिला स्तरीय समिति की अनुशंसानुसार जेल मुख्यालय द्वारा कार्रवाई की जाती थी। अब वर्ष में चार बार 15 अगस्त, 26 जनवरी, 14 अप्रैल और 2 अक्टूबर को नवीन नीति के प्रावधान तथा जिला स्तरीय समिति एवं जेल मुख्यालय की अनुशंसा पर राज्य सरकार की अनुमति से रिहाई की जाएगी।

अपराधियों को सख्त सजा जरूरी 
बैठक में सीएम ने कहा कि अच्छे व्यवहार, आचरण के चलते पूर्व रिहाई का लाभ लेने वाले और आतंकी, दुष्कर्मी दोनों अलग-अलग श्रेणी के अपराधी हैं। दुष्कर्मियों को किसी भी स्थिति में समय से पहले रिहाई का लाभ नहीं मिलना चाहिए। ऐसे अपराधी समाज विरोधी हैं। सीएम ने कहा कि दुष्कर्म के मामलों को कम करने के लिए कार्य योजना पर भी अमल किया जाए। उन्होंने कहा कि छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म के दोषियों को सख्त सजा के मौजूदा प्रावधानों को बनाए रखना आवश्यक है। 


गैम्बलिंग एक्ट का प्रस्ताव प्रस्तुत करें 
सीएम ने निर्देश दिए कि एंटी गैम्बलिंग एक्ट (ऑनलाइन गैम्बलिंग के विरुद्ध प्रावधान के साथ), पब्लिक सेफ्टी एक्ट और गैंगस्टर एक्ट के प्रस्ताव शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत किए जाएं। जिससे इन्हें राज्य में लागू करने की दिशा में कार्रवाई जल्द से जल्द हो सके।
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