{"_id":"635e23f4869aab747e672a8b","slug":"mp-news-cm-shivraj-meditates-with-wife-sadhna-in-world-s-largest-meditation-hall","type":"story","status":"publish","title_hn":"MP News: सीएम शिवराज ने पत्नी साधना के साथ दुनिया के सबसे बड़े मेडिटेशन हॉल में लगाया ध्यान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP News: सीएम शिवराज ने पत्नी साधना के साथ दुनिया के सबसे बड़े मेडिटेशन हॉल में लगाया ध्यान
Sun, 30 Oct 2022 04:47 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Sun, 30 Oct 2022 04:47 PM IST
सार
सीएम ने कहा कि अब हम हार्टफुलनेस के माध्यम से अनेकों काम करते हैं तो कई बार लगता है कि जो चाह हम रहे हैं वैसी सफलता नहीं मिल रही है। ऐसे में निराश होने की आवश्यकता नहीं है। हम सिर्फ अपना कर्म करें, परिणाम की चिंता ना करें।
विज्ञापन
सीएम शिवराज सिंह और साधना सिंह चौहान
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह रविवार को अपनी पत्नी साधना सिंह के साथ हैदराबाद की हार्टफुलनेस संस्था की तरफ से आयोजित कान्हा शांति वनम् में सहज योग के कार्यक्रम में शामिल हुए। यहां उन्होंने नशा मुक्ति ऐप और योग पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया। यह दुनिया का सबसे बड़ा मेडिटेशन हॉल है। इसमें एक लाख से अधिक लोग बैठ सकते हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अभी दाजी, गीता जी पर बात कर रहे थे। दाजी हार्टफुलनेस संस्था के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष है। सचमुच में यह अद्भुत ग्रंथ है। गीता हमें दुनिया से बचने की सलाह नहीं देती। उसका सामना करने की सीख देती है। जब कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण से अर्जुन ने कहा, मेरे रथ को दोनों सेनाओं के बीच में ले चलो। मैं देखूं तो सही कि युद्ध के मैदान में मुझे किस-किस से लड़ना है। दोनों सेनाओं के बीच जाकर रथ खड़ा कर दिया गया। अर्जुन ने सामने देखा तो पितामह भीष्म खड़े थे, गुरु द्रोणाचार्य खड़े थे, कृपाचार्य खड़े थे। सगे रिश्तेदार सामने थे। मामा शल्य भी। अर्जुन परेशान हो गए और भगवान श्रीकृष्ण से कहा कि मैं इन्हें मारूंगा। जिन्होंने मुझे बचपन में गोद में खिलाया है। मैं इन्हें मारूंगा जिन्होंने मुझे धनुष-बाण चलाना सिखाया है। इन्हें मारकर भगवान इंद्रप्रस्थ के राज की बात तो छोड़ दो मुझे स्वर्ग का सिंहासन भी नहीं चाहिए और रथ के पिछले हिस्से में जाकर बैठ गए। अब भगवान श्री कृष्ण ने जो कहा वह गीता के रूप में अद्भुत है। मैं उसके विस्तार में नहीं जा रहा हूं। उसका सार यही है कि कौन किसे मारता है। यह शरीर क्षणभंगुर और नाशवान है। यह आज है कल नहीं रहेगा, लेकिन इसके समाप्त होने के बाद भी हम समाप्त नहीं होते क्योंकि हम केवल शरीर नहीं है अजर-अमर आत्माए होती हैं।
सीएम ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने कर्म करने की प्रेरणा अर्जुन को दी। उन्होंने कहा मैं खुद भी, मैं ना चाहूं तो मुझसे कौन कर्म करवा सकता है। लेकिन, मैं भी कर्म किए बिना नहीं रहता। अब हम हार्टफुलनेस के माध्यम से अनेकों काम करते हैं तो कई बार लगता है कि जो हम चाह रहे हैं, वैसी सफलता नहीं मिल रही। ऐसे में निराश होने की आवश्यकता नहीं है। हम सिर्फ अपना कर्म करें, परिणाम की चिंता ना करें। सेवा के अनेकों कार्य रामचंद्र मिशन के माध्यम से, हार्टफुलनेस के माध्यम से मध्यप्रदेश की धरती पर भी हो रहे हैं, मैं उन सभीका अभिनंदन करता हूं।
विज्ञापन
विज्ञापन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अभी दाजी, गीता जी पर बात कर रहे थे। दाजी हार्टफुलनेस संस्था के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष है। सचमुच में यह अद्भुत ग्रंथ है। गीता हमें दुनिया से बचने की सलाह नहीं देती। उसका सामना करने की सीख देती है। जब कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण से अर्जुन ने कहा, मेरे रथ को दोनों सेनाओं के बीच में ले चलो। मैं देखूं तो सही कि युद्ध के मैदान में मुझे किस-किस से लड़ना है। दोनों सेनाओं के बीच जाकर रथ खड़ा कर दिया गया। अर्जुन ने सामने देखा तो पितामह भीष्म खड़े थे, गुरु द्रोणाचार्य खड़े थे, कृपाचार्य खड़े थे। सगे रिश्तेदार सामने थे। मामा शल्य भी। अर्जुन परेशान हो गए और भगवान श्रीकृष्ण से कहा कि मैं इन्हें मारूंगा। जिन्होंने मुझे बचपन में गोद में खिलाया है। मैं इन्हें मारूंगा जिन्होंने मुझे धनुष-बाण चलाना सिखाया है। इन्हें मारकर भगवान इंद्रप्रस्थ के राज की बात तो छोड़ दो मुझे स्वर्ग का सिंहासन भी नहीं चाहिए और रथ के पिछले हिस्से में जाकर बैठ गए। अब भगवान श्री कृष्ण ने जो कहा वह गीता के रूप में अद्भुत है। मैं उसके विस्तार में नहीं जा रहा हूं। उसका सार यही है कि कौन किसे मारता है। यह शरीर क्षणभंगुर और नाशवान है। यह आज है कल नहीं रहेगा, लेकिन इसके समाप्त होने के बाद भी हम समाप्त नहीं होते क्योंकि हम केवल शरीर नहीं है अजर-अमर आत्माए होती हैं।
विज्ञापन
सीएम ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने कर्म करने की प्रेरणा अर्जुन को दी। उन्होंने कहा मैं खुद भी, मैं ना चाहूं तो मुझसे कौन कर्म करवा सकता है। लेकिन, मैं भी कर्म किए बिना नहीं रहता। अब हम हार्टफुलनेस के माध्यम से अनेकों काम करते हैं तो कई बार लगता है कि जो हम चाह रहे हैं, वैसी सफलता नहीं मिल रही। ऐसे में निराश होने की आवश्यकता नहीं है। हम सिर्फ अपना कर्म करें, परिणाम की चिंता ना करें। सेवा के अनेकों कार्य रामचंद्र मिशन के माध्यम से, हार्टफुलनेस के माध्यम से मध्यप्रदेश की धरती पर भी हो रहे हैं, मैं उन सभीका अभिनंदन करता हूं।
विज्ञापन
