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MP Local Body Elections: नगर पालिका अध्यक्ष चुनने का अधिकार जनता को देने की मांग, हाईकोर्ट ने कहा- अभी नहीं
Thu, 02 Jun 2022 06:48 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Thu, 02 Jun 2022 06:48 PM IST
सार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से करने की याचिका पर अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। अब यह याचिका नियमित बैंच के सामने छुट्टियों के बाद लगेगी।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महापौर की तरह नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव भी प्रत्यक्ष प्रणाली से करवाने की मांग वाली याचिका पर अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस समय चुनावों की अधिसूचना जारी कर दी गई है। ऐसे में कोई भी आदेश जारी करना ठीक नहीं होगा। इस मांग वाली याचिका को छुट्टियों के बाद नियमित बैंच के सामने प्रस्तुत किया जाए।
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे और एक अन्य ने यह याचिका दाखिल की थी। इस पर जस्टिस अतुल श्रीधरन तथा जस्टिस डीके पालीवाल की बैंच ने तत्काल कोई राहत देने से इनकार कर दिया। याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार ने नगर पालिका नियम की धारा 9 में संशोधन किया है। इससे नगर निगम के महापौर का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से तथा नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव पार्षदों द्वारा कराने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में सरकार ने अधिसूचना जारी की है। याचिका में राहत चाही गई थी कि महापौर की तरह नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव भी सीधे जनता से कराए जाए।
भेदभाव पर उठाए सवाल
याचिका में कहा गया है कि नगर निगमों और नगर पालिकाओं की कार्यप्रणाली में कोई अंतर नहीं है। इसके बाद भी राज्य सरकार ने इस निर्णय से भेदभाव किया है। प्रदेश में 16 नगर निगमों में महापौर जनता चुनेगी, जबकि 99 नगर पालिका अध्यक्षों का चुनाव पार्षद करेंगे। याचिका में विधि एवं विधायी कार्य विभाग व नगरीय प्रशासन विभाग को पक्षकार बनाया गया था। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पैरवी की।
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नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे और एक अन्य ने यह याचिका दाखिल की थी। इस पर जस्टिस अतुल श्रीधरन तथा जस्टिस डीके पालीवाल की बैंच ने तत्काल कोई राहत देने से इनकार कर दिया। याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार ने नगर पालिका नियम की धारा 9 में संशोधन किया है। इससे नगर निगम के महापौर का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से तथा नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव पार्षदों द्वारा कराने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में सरकार ने अधिसूचना जारी की है। याचिका में राहत चाही गई थी कि महापौर की तरह नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव भी सीधे जनता से कराए जाए।
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भेदभाव पर उठाए सवाल
याचिका में कहा गया है कि नगर निगमों और नगर पालिकाओं की कार्यप्रणाली में कोई अंतर नहीं है। इसके बाद भी राज्य सरकार ने इस निर्णय से भेदभाव किया है। प्रदेश में 16 नगर निगमों में महापौर जनता चुनेगी, जबकि 99 नगर पालिका अध्यक्षों का चुनाव पार्षद करेंगे। याचिका में विधि एवं विधायी कार्य विभाग व नगरीय प्रशासन विभाग को पक्षकार बनाया गया था। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पैरवी की।
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