MP Junior doctors strike: तीसरे दिन में पहुंची जूडा की हड़ताल, गरीब-मजदूरों को कंबल बांटे
जूनियर डॉक्टरों की अनिश्चतकालीन हड़ताल का गुरुवार को तीसरा दिन है। तीसरे दिन जूडा भोपाल की तरफ से गरीब मजदूरों सहित प्रसूताओं को कंबल दान किए गए।
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जूनियर डॉक्टरों की अनिश्चतकालीन हड़ताल का गुरुवार को तीसरा दिन है। बढ़ते काम के दवाब को लेकर भोपाल सहित पूरे प्रदेश में जनियर डॉक्टरों ने मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल कर दी थी। बुधवार से इमरजेंसी सेवाएं देना भी बंद कर दिया गया है। तीसरे दिन जूडा भोपाल की तरफ से गरीब मजदूरों सहित प्रसूताओं को कंबल दान किए गए।
जूडा सदस्यों का कहना है कि हमारी तरफ से एक छोटी सी पहल ये रही कि हमने हड़ताल के तीसरे दिन गरीबों को कंबल बांटे। हमारी तरफ से लगातार मरीजों की बेहतरी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। भले ही हम अपनी ड्यूटी पर नहीं हैं, लेकिन अपना कर्तव्य निर्वहन लगातार कर रहे हैं। मप्र जूडा संगठन के डॉ. अमित टांडिया ने बताया कि हमारे प्रतिनिधि मंडल की बातचीत लगातार माननीय मंत्री जी एवं हेल्थ कमिश्नर भोपाल से चल रही है।
इसलिए की गई हड़ताल
मप्र जूडा संगठन के डॉ. अमित टांडिया का कहना है कि प्रदेश में एक हजार से ज्यादी डॉक्टरों की कमी है। बीते आठ महीने से जूनियर डॉक्टर दबाव में काम कर रहे हैं। प्रदेश सरकार से मांग है कि एमबीबीएस कर चुके छात्रों को मदद के लिए रखा जाए। हमारी मांग है कि जब तक जूनियर डॉक्टर्स के नए एडमिशन से नहीं हो जाते, तब तक नॉन एकेडमिक जूनियर डॉक्टर की नियुक्ति कर जूनियर डॉक्टर्स का कार्यभार कम किया जाएl टांडिया का कहना है कि काउंसलिंग में देरी भी की वजह से परेशानी हो रही है। 1 जून को जाने वाले पीजी प्रथम वर्ष के जूनियर डॉक्टर अभी तक नहीं आए हैं। इससे काम का दबाव बढ़ रहा है। वहीं फोर्डा यानी फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय संगठन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि काउंसलिंग जल्दी कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पक्ष जल्दी रखें। फोर्डा ने इस मांग को लेकर महीने में दूसरी बार हड़ताल की है और मध्य प्रदेश के जूनियर डॉक्टरों भी हड़ताल के माध्यम से समर्थन दे रहे हैं। बता दें कि नीट-पीजी काउंसलिंग का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
