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MP High Court: आयुष्मान कार्ड तथा स्वास्थ्य सुविधाओं के संबंध में हाईकोर्ट ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट
Wed, 15 Jun 2022 02:48 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 15 Jun 2022 02:48 PM IST
सार
शाजापुर में बिल के लिए एक मरीज को बेड पर बांधकर रखे जाने के मामले का संज्ञान में लेते हुए हाईकोर्ट में सुनवाई की जा रही है। हाईकोर्ट ने सरकार को स्वास्थ्य सुविधाओं के संबंध में जवाब पेश करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश के शाजापुर में बिल के लिए एक मरीज को बेड पर बांधकर रखे जाने के मामले का संज्ञान में लेते हुए हाईकोर्ट में सुनवाई की जा रही है। इसके साथ प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं व कोरोना लहर के संबंध याचिकाओं की सुनवाई भी संयुक्त रूप से हो रही है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने सरकार को स्वास्थ्य सुविधाओं के संबंध में जवाब पेश करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
गौरतलब है कि प्रदेश के शाजापुर जिले स्थित एक निजी अस्पताल के प्रबंधन ने बिल की राशि का भुगतान नहीं होने पर वृद्ध मरीज को बेड से बांधकर रखा हुआ था। इस संबंध में अखबारों में फोटो सहित समाचार प्रकाशित हुए थे। सुप्रीम कोर्ट के रजिस्टार जनरल ने मप्र हाईकोर्ट को पत्र लिखा था। जिसमें उक्त घटना को मानव अधिकारों का उल्लंघन बताया गया था। सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने मामले में कोर्ट मित्र नियुक्त कर आर्थिक रूप से असक्षम लोगों के लिए प्राइवेट हॉस्पिटल में निशुल्क मेडिकल सुविधा तथा उपचार के लिए गाइड लाइन निर्धारित करने केन्द्र व राज्य सरकार से सुझाव मांगे थे।
इसके अलावा टेंडर जारी होने के बावजूद भी प्रदेश के जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन मशीन नहीं लगाने, कोरोना उपचार, आयुष्मान कार्ड के संबंध में भी याचिकाएं दायर की गई थीं। हाईकोर्ट ने संबंधित याचिकाओं की संयुक्त रूप से सुनवाई करते हुए सरकार से जवाब मांगा है। याचिका पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने आयुष्मान कार्ड तथा प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ उपस्थित हुए।
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गौरतलब है कि प्रदेश के शाजापुर जिले स्थित एक निजी अस्पताल के प्रबंधन ने बिल की राशि का भुगतान नहीं होने पर वृद्ध मरीज को बेड से बांधकर रखा हुआ था। इस संबंध में अखबारों में फोटो सहित समाचार प्रकाशित हुए थे। सुप्रीम कोर्ट के रजिस्टार जनरल ने मप्र हाईकोर्ट को पत्र लिखा था। जिसमें उक्त घटना को मानव अधिकारों का उल्लंघन बताया गया था। सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने मामले में कोर्ट मित्र नियुक्त कर आर्थिक रूप से असक्षम लोगों के लिए प्राइवेट हॉस्पिटल में निशुल्क मेडिकल सुविधा तथा उपचार के लिए गाइड लाइन निर्धारित करने केन्द्र व राज्य सरकार से सुझाव मांगे थे।
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इसके अलावा टेंडर जारी होने के बावजूद भी प्रदेश के जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन मशीन नहीं लगाने, कोरोना उपचार, आयुष्मान कार्ड के संबंध में भी याचिकाएं दायर की गई थीं। हाईकोर्ट ने संबंधित याचिकाओं की संयुक्त रूप से सुनवाई करते हुए सरकार से जवाब मांगा है। याचिका पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने आयुष्मान कार्ड तथा प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ उपस्थित हुए।
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