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प्याज के दामों पर एमपी में लगेगी लगाम
जयप्रकाश पाराशर/अमर उजाला, भोपाल
Updated Fri, 04 Jul 2014 08:53 AM IST
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मध्य प्रदेश सरकार ने आलू-प्याज के दामों पर नियंत्रण रखने की कवायद शुरू कर दी है।
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वहीं राज्य में करीब दो महीने की खपत लायक प्याज की उपलब्धता है। फिर भी प्याज के दाम थोक बाजार में 25-30 रुपए प्रति किग्रा बने रहने का अनुमान है, क्योंकि मानसून अब तक नहीं आने के कारण जून-जुलाई में होने वाली प्याज की बुआई करीब 20 दिन लंबित हो गई है।
खरीफ की प्याज की फसल करीब 20 दिन देरी से आने के कारण सितंबर के महीने में प्याज की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी। राज्य सरकार यह प्रयास कर रही है कि कीमतों में अनाप-शनाप तेजी नहीं आए और बाजार में आवक बनी रहे।
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राज्य सरकार प्याज की स्टॉक लिमिट निर्धारित कर लागू करने की तैयारी कर रही है, लेकिन एक अंदेशा यह भी है कि म.प्र. में यदि प्याज की कीमतें ज्यादा कम रखी गईं तो यहां का प्याज अन्य राज्यों में जा सकता है।
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यूपी, दिल्ली और दक्षिण के कुछ राज्यों में मध्य प्रदेश की प्याज अब भी जा रही है। आवश्यक वस्तु अधिनियम में प्याज को शामिल करने और स्टाक लिमिट लागू होने के बाद प्याज की कीमतें पहले की तरह तेज नहीं हो पाएंगी।
राज्य में मौसम विभाग का आकलन है कि अगले 3-4 दिनों में अच्छी बारिश हो सकती है। फिर भी मानसून देरी से आने के कारण प्याज और सब्जियों के दामों में तेजी से इजाफा हुआ है। मौसमी सब्जियों की कीमतों में तो बारिश होने के बाद नरमी आ सकती है। लेकिन प्याज में नरमी आने की कोई संभावना नहीं है।
केंद्र सरकार द्वारा उठाए कदमों के बाद कारोबारियों का कहना है कि अब प्याज में ज्यादा तेजी के आसार नहीं हैं, लेकिन अक्टूबर-नवंबर में आने वाली फसल करीब 15-20 दिन देरी से आ सकती है।
अगले दो महीने में राज्य में प्याज का स्टाक खत्म होने के बाद महाराष्ट्र की प्याज मध्य प्रदेश आने लगती है। महाराष्ट्र में भी लसलगांव मंडी में अकेले जून माह में ही प्याज की कीमतों में 80 फीसदी इजाफा हुआ है। अब भी महाराष्ट्र से प्याज मध्य प्रदेश की मंडियों में आ रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि मध्य प्रदेश में हल्की क्वालिटी की प्याज बड़ी मात्रा में उपलब्ध है और यह कीमतों को ज्यादा ऊपर नहीं आने देगी। जब भी अच्छी प्याज की कीमतें बढ़ेंगी, हल्की क्वालिटी की प्याज बाजार में आएगी।
