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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   MP: finally minister Babulal resigned his post

यूं ही नहीं माने बाबूलाल, 'अहम जिम्मेदारी' के आश्वासन पर डाले हथियार

Fri, 01 Jul 2016 02:26 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 01 Jul 2016 02:26 PM IST
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MP: finally minister Babulal resigned his post
- फोटो : getty images

मध्यप्रदेश में दो मंत्रियों के इस्तीफे को लेकर चला ड्रामा देर शाम खत्म हो गया। एक तरफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने मंत्रीमंडल का विस्तार कर रहे थे तो दूसरी तरफ भाजपा के शीर्ष नेता पहले बाबूलाल गौर की मान मनुहार में लगे थे। 

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आखिर घंटों की मशक्कत के बाद देर शाम बाबूलाल गौर इस्तीफे के लिए तैयार हो गए। लेकिन जानकारों की मानें तो बाबूलाल ने यूं ही हथियार नहीं टेके 'अहम जिम्मेदारी' मिलने के आश्वासन के बाद ही वह इसके लिए तैयार हुए। हालांकि यह अहम जिम्मेदारी क्या होगी अभी इसका तो खुलासा नहीं हो सका है लेकिन सबकी निगाहें इस पर टिकी जरूर रहेंगी।
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बता दें कि मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के मंत्रीमंडल विस्तार को लेकर कल दिनभर ड्रामा चलता रहा। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के 75 प्लस के फार्मूले पर अमल करते हुए शिवराज ने अपनी कैबिनेट के दो वरिष्ठ मंत्रियों सरताज सिंह और बाबूलाल गौर को इस्तीफा देने के निर्देश दिए थे। लेकिन दोनों ही नेता इस्तीफा न देने की जिद पर अड़ गए।

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इस्तीफा न देने पर अड़े थे गौर और सरताज

MP: finally minister Babulal resigned his post

सरताज सिंह ने तो साफ कहा कि उनकी उम्र को नहीं उनके काम को काबिलियत का पैमाना माना जाए। वहीं आलाकमान के रवैये से खिन्न गौर इस्तीफे की बात पर ही उखड़ गए और साफ कहा कि मेरा कसूर तो बताओ, मैं इस्तीफा नहीं दूंगा चाहे तो बर्खास्त कर दें। दोनों नेताओं के अनुभव और उनके मान सम्मान को देखते हुए भाजपा आलाकमान भी कोई सख्त कदम उठाने के मूड़ में नहीं था। 

हालांकि शपथ ग्रहण से एक घंटा पहले ही सरताज ने हथियार डाल दिए और पार्टी आलाकमान का निर्देश मानने की बात कहते हुए अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री को सौंप दिया। लेकिन मामला अटका रहा बाबूलाल गौर पर। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके गौर इतनी जल्दी कहां मानने वाले थे। 

उन्होंने पाटी के दूत बन कर आए भाजपा के प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे और प्रदेशाध्यक्ष नंद कुमार सिंह चौहान पार्टी अध्यक्ष से कहा कि उन्हें उनकी गलती बताई जाए। और अगर उनकी उम्र से दिक्‍कत थी तो टिकट ही क्यों दिया गया था। 

रामलाल के समझाने पर माने गौर

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बाद में संगठन महामंत्री सुहास भगत उनसे मिलने पहुंचे लेकिन उन्हें भी बैरंग लौटना पड़ा। सारे हथियार फेल होते देख देर शाम संगठन मंत्री रामलाल ने मोर्चा संभाला। उन्होंने गौर से बात की, जिसके बाद उनका रुख कुछ नरम हुआ। 

शाम होते होते उन्होंने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री को सौंप दिया, जिसे तुरंत राज्यपाल को भेज दिया गया उन्होंने भी इसे स्वीकार कर लिया। बताया जाता है कि रामलाल ने गौर को आश्वस्त किया कि पार्टी में उनके कद और मान सम्मान का पूरा ख्याल रखा जाएगा। उनके अनुभव को देखते हुए जल्द उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी भी दी जा सकती है। 

रामलाल का यही आश्वासन काम कर गया जिसके बाद सरकार के सबसे अनुभवी नेता और दस बार के विधायक बाबूलाल गौर की विदाई की राह तय हो गई। अब देखना यह है कि भाजपा अपने वयोवृद्ध नेताओं की तरह मध्यप्रदेश के इस बुजुर्ग नेता को कौन सी जिम्मेदारी देती है।

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