MP News: चंबल परिवार का दो दिवसीय साहित्यक-सांस्कृतिक समागम, चंबल घाटी के विकास के लिए बनी रणनीति
मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में चंबल परिवार का दो दिवसीय साहित्यक और सांस्कृतिक समागम हुआ। इस समागम में चंबल घाटी के विकास के लिए खास रणनीति बनी।
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लाल सेना मुख्यालय, लोहिया खुर्द और बसरेहर में चंबल परिवार का दो दिवसीय साहित्यिक- सांस्कृतिक समागम रविवार को संपन्न हुआ। आयोजन की शुरुआत आजादी के महानायक और लाल सेना के कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया की समाधि पर पुष्पांजलि के साथ हुई थी। दूसरे दिन यादों में ‘कमांडर’ पर परिचर्चा, ‘चंबलः कल, आज और कल’ विषय पर विमर्श और चंबल परिवार का चंबल में बीता वर्ष और आगामी कार्ययोजनाएं पर चर्चा हुई।
यादों में ‘कमांडर’ परिचर्चा में समाजवादी चिंतक सुधींद्र भदौरिया ने कहा, आजादी के आंदोलन में जितना उनके पिता कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया का योगदान रहा, उतना ही पूर्व सांसद और स्वतंत्रता सेनानी मां सरला भदौरिया का भी रहा। अपनी मां का जिक्र करते हुए सुधींद्र भदौरिया भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि मां पर हम बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी थी। वहीं, समाजवादियों को भोजन-पानी उपलब्ध कराने और उनकी देख-रेख भी उन्होंने पूरी जिम्मेदारी से की। वह महात्मा गांधी के साथ आजादी की लड़ाई लड़ीं और जेल में भी रहीं।
सुधींद्र भदौरिया ने कहा कि कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया की विरासत को चंबल परिवार आगे बढ़ाए। उन्होंने मंच पर ‘चंबल के महानायक-कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया’ पुस्तक देते हुए चंबल परिवार प्रमुख डॉ. शाह आलम राना से प्रण कराया कि लाल सेना का छापामार केंद्र रहे लोहिया खुर्द गांव को केंद्र बनाकर वह इस अभियान को जारी रखें। बताते चलें कि चंबल के बीहड़ों में कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया द्वारा बनाई गई लाल सेना का पहला छापामार केंद्र बसरेहर का लोहिया खुर्द गांव ही रहा है।
इस दौरान लोक समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुल्तान सिंह ने कहा कि लाल सेना में हर तबके के लोग शामिल थे। नरम दल और गरम दल दोनों का मकसद वतन की आजादी थी। उन्होंने चंबल घाटी पर अपनी बात रखते हुए कहा कि आजादी के 75 सालों में बीहड़ में दूध-दही की नदियां ना बहकर जगह-जगह शराब के ठेके हैं। आज यह बुराई मिटनी चाहिए।
वरिष्ठ अधिवक्ता राजबहादुर सिंह यादव ने कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया से जुड़े कई संस्मरणों को याद करते कहा कि जो संघर्ष बाबूजी ने किया, उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब आज के नौजवानों पर है। प्रसिद्ध नारीवादी विचारक डॉ. रंजना कुमारी ने कहा कि अगर महिला का विकास नहीं हुआ, उनको शिक्षा नहीं मिली और उनको हुनरमंद नहीं किया गया, उनकी मेहनत का सही मेहनताना नहीं दिया गया तो देश प्रगति नहीं कर पाएगा। लड़कियों को अवसर मिले तो वह समाज को आगे ले जाएंगी। उन्होंने कहा कि समाज के लिए काम करते हुए अपनी जड़ों से जुड़े रहना भी जरूरी है। इसके लिए चंबल क्षेत्र के लोगों को हमेशा यहां के विकास के लिए प्रयास करते रहना चाहिए।
दिमनी के विधायक रवींद्र सिंह तोमर ने कहा कि उनके राजनीतक सफर की शुरुआत यहीं की मिट्टी से हुई थी। इस मिट्टी में इतनी ताकत है, इतनी हनक है कि यहां की आवाज को कोई दबा नहीं सकता। बस जरूरत है तो आवाज उठाने की। उन्होंने क्षेत्र के विकास और कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया की विरासत को आगे बढ़ाने के कार्यों में हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
समागम में चंबल परिवार के प्रमुख डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि चंबल घाटी में चंबल विश्वविद्यालय, चंबल रेजिमेंट की मांग, लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों और उसूलों को लेकर उनका संघर्ष जारी रहेगा। चंबल परिवार ने बीते एक साल के अपने कार्यों की समीक्षा भी की और आगामी एक वर्ष के लिए कार्य योजनाएं भी बनाईं। कहा गया कि अगले एक वर्ष में चंबल संग्रहालय को समृद्ध किया जाएगा। चंबल क्षेत्र से जुड़ी पुस्तकें प्रकाशित की जाएंगी और दस्तावेजी फिल्में भी बनाई जाएंगी।
रविवार के समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार खादिम अब्बास ने की। संचालन चंद्रोदय सिंह चौहान ने किया। डॉ.धर्मेंद्र, कवि दीपक राज ने भी संबोधित किया। इस दौरान रमेश प्रजापति, वीरू भदौरिया, लाखन सिंह जाटव, प्रेम चंद्र बाथम, सर्वजीत भदौरिया, शिक्षक विनोद मास्टर, आदिल खान, चंद्रवीर सिंह चौहान आदि मौजूद रहे।
