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MP Elections 2023: मुरैना में सत्ता का संग्राम; महिला वोटरों ने रखी अपनी राय, बताया इन मुद्दों पर देंगी वोट
Wed, 25 Oct 2023 03:46 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरैना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरैना
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Wed, 25 Oct 2023 03:46 PM IST
सार
MP Election 2023: देश के दिल मध्यप्रदेश में 2023 का चुनावी रण कवर करने के लिए अमर उजाला का चुनावी रथ एमपी के विधानसभा क्षेत्रों में जाकर चुनावी मुद्दों को जान रहा है। इसी सिलसिले में आज मुरैना में 'सत्ता का संग्राम' हुआ, जहां महिलाओं ने मतदान के लिए अपने मुद्दे रखे।
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सत्ता का संग्राम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश में आगामी 17 नवंबर को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है। प्रदेश के चुनावी माहौल का जायजा लेने और मतदाताओं से जरूरी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' बुधवार को मुरैना पहुंचा। जहां महिलाओं से रोजगार, भुखमरी, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं जैसे विषयों पर अपने विचार रखे।
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अमर उजाला से बात करते हुए स्थानीय महिला नीता बांदल ने कहा कि इस समय महिलाओं को जो आरक्षण दिया है, लेकिन वह जमीन पर कब तक आ सकता है कुछ कह नहीं सकते है। एक सबसे बड़ा मुद्दा जो मैं उठाना चाहती हूं जिस पर केंद्र सरकार या प्रदेश सरकार कोई भी हो, वह उसपर बिल्कुल ध्यान नहीं देना चाहती। वह है कि सब लोग यह कहते हैं कि बेरोजगारी, भुखमरी ये तो 1947 में थी और आज 75 साल बाद भी है। आगे 50 साल बाद भी रहेगी क्योंकि आज जब हमारा देश आजाद हुआ तब हम 35 करोड़ थे। अब हम चार गुना बढ़ कर 140 करोड़ हो गए और अगर 50 साल बाद हम दो सौ या सवा दो सौ करोड़ हो गए तो क्या उस समय भुखमरी खत्म हो सकती है क्या, बेरोजगारी खत्म हो सकती है क्या। ऐसे में मुझे आज के समय जो सबसे बड़ा मुद्दा लगता है ये है कि यूनिवर्सल सिविल कोड आना चाहिए। बच्चे कम पैदा होना चाहिए।
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वहीं, एक अन्य महिला श्वेता अग्रवाल ने कहा कि मुरैना में स्वच्छता पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जाता है। हर गली-मोहल्ले कहीं भी जाइए, हर जगह प्रदूषण है, साफ-सफाई नहीं है। जाम भी बहुत लगता है। मार्केट एरिया का भी यही हाल है। इन सब बातों का कहीं कोई संज्ञान ही नहीं लेता।
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वहीं, एक अन्य महिला भारती मोदी ने कहा कि मुरैना में एजुकेशन लेबल इस तरह का है कि हमारे बच्चे बाहर जा रहे हैं पढ़ने के लिए। जबकि आसपास के रूरल एरिया के बच्चे मुरैना में पढ़ने आ रहे हैं। मुरैना के कोचिंग सेंटर का हब बनने की वजह से हमारा यहां (रेजिडेंशियल एरिया में) रहना दूभर हो गया है। यहां जो बच्चे आते हैं, वे खराब भाषा का प्रयोग करते हैं। कई बार तो हथियारों का भी प्रयोग करते हैं। कट्टे से फायरिंग करना जैसे आम बात हो। आवासीय इलाके में कोचिंग हब नहीं होने चाहिए।
