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ग्रामीण युवाओं को पढ़ाने के लिए साफ्टवेयर इंजीनियर ने छोड़ी जॉब, बेच दिया मकान

Sat, 30 Jul 2016 01:47 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 30 Jul 2016 01:47 PM IST
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Man left his job and sold house for educate rural youth
- फोटो : times of india

मिलिए 40 साल के प्रांजल दूबे से। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर रहे प्रांजल दूबे ने जर्मन कंपनी में अपनी जमीं जमाई नौकरी इसलिए छोड़ दी कि वे ग्रामीण युवाओं के लिए कुछ कर सकें। प्रांजल को अपना यह प्रयास छोटा लगा तो उन्होंने अपना घरेलू मकान भी बेच दिया ताकि इससे मिली रकम को युवाओं की बेहतरी के लिए लगाया जा सके। आइए प्रांजल की इस छोटी सी लेकिन साहसिक कहानी पर विस्तार से डालते हैं नजर। 

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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार मध्यप्रदेश के देवास जिले के संदलपुर गांव के रहने वाले प्रांजल ने सालों पहले एक सपना देखा था अपने गांव के युवाओं को आगे बढ़ते और तरक्की हासिल करते देखने का। वो चाहते थे कि गांव की इस तरक्की में उनका भी योगदान रहे। 
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लेकिन जब उनके इस सपने के आड़े उनकी नौकरी आई तो मोटी तनख्वाह लेने वाले प्रांजल ने उसे छोड़ने में एक मिनट की भी देरी नहीं लगाई और अपना सबकुछ छोड़कर वापस अपने गांव आ गए। यहां तक की शहर में अपना मकान भी बेच दिया। 

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सबकुछ छोड़कर गांव में शुरू किया इंजीनियरिंग कालेज

Man left his job and sold house for educate rural youth

गांव आकर उन्होंने संत शिंगाजी इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड मैनेजमेंट नाम से एक कालेज की स्‍थापना की। आज यह संस्‍थान गांव के छात्रों की जिंदगी बदलकर उन्हें एक टेक्नोक्रेट में तब्दील कर रहा है। यहां पढ़कर निकले 100 से ज्यादा छात्र आज SAP, Cognizant और ऐसी ही बड़ी कंपनियों में नौकरी कर रहे हैं। 

प्रांजल ने बताया कि जमी जमाई नौकरी छोड़ना और घर बेचना आसान निर्णय नहीं था काफी लोगों ने मुझे ऐसा करने से रोका। लेकिन मैने महसूस किया ऐसे महत्वपूर्ण निर्णय से पहले इस तरह की दिक्कतें आती हैं। 

वो बताते हैं मेरे परिवार को दो साल लगे यह समझने में की मैं आखिर क्यों बैंगलोर की अपनी स्वप्निल नौकरी छोड़ना चाहता था। साल 2010 में पहले बैच में उनके संस्‍थान में कुल 50 बच्चे आए, जिन्हें वह बैंगलोर और देश के अन्य बड़े शहरों में ले गए यह दिखाने के लिए की जिंदगी कैसे जी जाती है। 

बड़ी-बड़ी कंपनियों में नौकरी कर रहे हैं 100 से ज्यादा छात्र

Man left his job and sold house for educate rural youth

प्रांजल के अनुसार मेरे लिए गांव के युवाओं से संपर्क बनाना आसान नहीं था। मेरी परवरिश और रहन सहन इससे बिल्कुल अलग था जिसे वो छात्र देखते रहे थे। मैं उन बच्चों को बायोकॉन, इन्फोसिस, सैप और कई बड़ी कंपनियों में ले गया ओर दिखाया कि कैसे वो यहां काम करके अपने सपने पूरे कर सकते हैं।

मैंने उन्हें बड़े ख्वाब दिखाए। युवाओं को आगे बढ़ाकर आज प्रांजल कहते हैं कि उनके लिए यह भी बड़ी चुनौती थी कि कैसे लड़कियों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए आगे लाया जाए। लड़कियों के परिजनों को समझाकर गांव से निकालना और उन्हें सुरक्षा की गारंटी देना मेरे ‌लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। 

छह साल के इस सफर में आज उनके संस्‍थान के बहुत से छात्र-छात्राएं बड़ी कंपनियों में काम करके अच्छे पैसे कमा रहे हैं। आज मैं उन छात्रों की उपलब्धियों को देखता हूं तो मुझे तसल्ली होती है कि मैंने उनके लिए कुछ बड़ा किया। 

आज वो हर युवा अपने परिवार का आदर्श है। वर्तमान में इस संस्‍थान में आस पास के 200 गांवों के एक हजार से ज्यादा छात्र छात्राएं पढ़ते हैं।

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