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Diwali 2023: करोड़ों रुपये की नगदी-आभूषण से सजता है महालक्ष्मी मंदिर, दर्शन करने देश विदेश से पहुंचते हैं भक्त

Sun, 12 Nov 2023 09:34 AM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रतलाम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रतलाम Published by: शबाहत हुसैन Updated Sun, 12 Nov 2023 09:34 AM IST
सार

Ratlam: धनतेरस पर रतलाम के महालक्ष्मी मंदिर को करोड़ों रुपयों के आभूषण व रुपयों से सजाया गया। मंदिर को सजाने के लिए यहां एक माह पूर्व से ही ज्वेलरी और नगदी आना शुरू हो जाती है, जिसका रजिस्टर मेंटन कर सामग्री प्रदान करने वाले को टोकन दिया जाता है। पांच दिन श्रृंगार दर्शन के बाद पड़वी से भक्त वापस अपनी सामग्री ले जाना शुरू कर देते है।

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Mahalakshmi temple is decorated with cash and jewelery worth crores of rupees
करोड़ों रुपए की नगदी व आभूषण से सजता है महालक्ष्मी मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रतलाम के माणक चौक में स्थित अति प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर देश विदेश में प्रसिद्ध है। महालक्ष्मी मंदिर गर्भगृह सहित पूरे मंदिर को प्रतिवर्ष धनतेरस के दिन करोड़ों रुपए की नगदी व ज्वेलरी से सजाया जाता है। इसमें सोना-चांदी के आभूषणों के साथ ही सभी तरह की मुद्राएं और करोड़ों रुपए की नगद राशि होती है। यह देश का पहला ऐसा मंदिर है, जहां दीवारों से लेकर छत पर भी नोटों की लड़ीयों से सजावट की जाती है।

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श्रृंगार व सजावट के लिए ज्वेलरी व नगद राशि
रतलाम के माणक चौक स्थित महालक्ष्मी मंदिर में के बारे में भक्तों की मान्यता है कि इस मंदिर में धनतेरस की पूजा में अपने धन को रखने से पूरे साल धान और संपत्ति में बढ़ोतरी होती है। इसी आस्था के चलते रतलाम के अलावा अन्य जिलों के साथ ही गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान व साउथ से भी बड़ी संख्या में भक्त यहां धनतेरस पर होने वाली महापूजा के लिए अपने पास मौजूद धन को यहां लेकर पहुंचते है। प्रतिवर्ष दीपावली पर्व पर महालक्ष्मी मंदिर में एक माह पहले से ही लोग यहां नए-नए नोटों की गड्डियां और अपना कीमती सामान जैसे सोने चांदी की ज्वेलरी यहां देना शुरू कर देते है। जिसका रजिस्टर मेंटेन किया जाता है और दीपावली के बाद पड़वी वाले दिन से भक्त अपनी सामग्री वापस ले जाना शुरू कर देते है।  
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कुबेर पोटली का भी किया जाता है वितरण
महालक्ष्मी मंदिर में धनतेरस पर ब्रह्म मुहुर्त में पट खोले जाते है, उसके बाद पूजा अनुष्ठान किया जाता है। फिर महाआरती के बाद कुबेर पोटली का वितरण किया जाता है, जिससे व्यापार व्यवसाय में वृद्धि होती है।
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रतलाम के राज परिवार से आती थी श्रृंगार सामग्री 
महालक्ष्मी मंदिर के पुजारी संजय ने बताया की पहले रतलाम के राज परिवार से धनतेरस के उपलक्ष में माताजी की चुनरी, श्रृंगार सामग्री सहित आती थी, जिससे श्रृंगार किया जाता था। धीरे-धीरे लोगों की आस्था बढ़ी और अब आम जान खुद एक माह पहले से ही श्रृंगार के लिए सामग्री देना शुरू यार देते है।


सुरक्षा के है पूरे इंतजाम
मंदिर के पुजारी संजय ने बताया कि उनकी कई पीढ़ियां महालक्ष्मी मंदिर में सेवा देते हुए चली आ रही है। यहां की आस्था है कि लोग अपना धन रखते हैं और धनतेरस पर इस मंदिर से पूजा में शामिल होकर धन को वापस ले जाकर अपने पास रखते है। जिससे उनके धन और संपत्ति में पूरे वर्ष बढ़ोतरी होती है। महालक्ष्मी की कृपा उन पर हर समय बनी रहती है। पुजारी ने बताया कि इतने धन की सुरक्षा के लिए यहां चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगे हुए होते है। पुलिस थाना पास में है, पुलिस बल यहां 24 घंटे तैनात रहता है। आज तक कभी किसी का एक पैसा भी इधर का उधर नहीं हुआ यही महालक्ष्मी की बड़ी कृपा है।

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