शिवराज सिंह चौहान बोल उठे, न हार में न जीत में, ये भी सही वो भी सही
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शायद यही वजह है कि वो बोल उठे-
मानना होगा कि शिवराज ने जोरदार लड़ाई लड़ी। जो लड़ाइयां अंत तक याद रहती हैं, मध्यप्रदेश की लड़ाई भी वैसी ही रही। देर रात तक एक-एक सीट, एक-एक वोट पर मारा-मारी। खैर, कांग्रेस 114 पर तो पहुंच गई लेकिन बहुमत के आंकड़े से फिर भी दो कदम दूर ही। यानी चाय का प्याला हाथ में तो आया, मुंह तक न आ पाया।न हार में, न जीत में
किंचित नहीं भयभीत मैं
संघर्ष पथ पर जो भी मिले
ये भी सही, वो भी सही
वो तो भला हो सपा-बसपा का जिसने चाय के प्याले में मिठास घोली और प्याला मुंह तक भी ले गए। कांग्रेस की सरकार तो अब बन ही जाएगी। फैसला तो अब बस मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर होना है।
