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MP News: ऐसे हैं मप्र के मुखिया, न खुद लगाते हैं मास्क न उनके नेता... आमजन पर सख्ती बरतने वाले अफसर भी सवालों के घेरे में

Sat, 25 Dec 2021 07:31 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा Updated Sat, 25 Dec 2021 07:31 PM IST
सार

ये हैं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान। कोरोना को लेकर प्रदेशवासियों पर तो नियम लाद दिए, लेकिन खुद पालन नहीं कर रहे। एक तरफ तो प्रदेश में नाइट कर्फ्यू लगाया और दूसरी तरफ हजारों की भीड़ जुटाकर कार्यक्रम कर रहे। न मास्क न सोशल डिस्टेंसिंग।

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Madhya Pradesh: Such are the chiefs of MP, neither do they put on masks nor their party leaders...all the rules are only for the public, the officers who are strict on the common man are also under question...
बिना मास्क के ही बैठे सीएम और अन्य जनप्रतिनिधि। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

ये हैं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान। कोरोना को लेकर प्रदेशवासियों पर तो नियम लाद दिए, लेकिन खुद और खुद के सहयोगी नेताओं के लिए कोई नियम नहीं। जनता पर सख्ती करने वाले अफसर भी इन्हीं के पदचिह्नों पर हैं। एक तरफ तो प्रदेश में नाइट कर्फ्यू लगाया और दूसरी तरफ हजारों की भीड़ जुटाकर कार्यक्रम कर रहे। न मास्क, न सोशल डिस्टेंसिंग। सवाल यह है कि जिन नियमों का खुद मुख्यमंत्री ही पालन नहीं कर रहे उनको जनता पर क्यों लादा जा रहा। 
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दरअसल शनिवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इंदौर पहुंचे थे। यहां अलग-अलग जगहों पर कार्यक्रम में शामिल हुए। कई घंटे सीएम इंदौर में रुके रहे और तमाम नेता और अफसर उनकी आवभगत करते रहे। इन आयोजनों में सीएम शिवराज बगैर मास्क के ही रहे और उनके साथ बैठे नेता और अधिकारियों ने भी मास्क लगाने की जहमत नहीं उठाई। इसे लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर प्रदेश का मुखिया ही नियम का पालन नहीं कर रहा तो फिर प्रदेशवासियों पर नियम क्यों थोपे जा रहे। इंदौर के जो अफसर आम जनता पर सख्ती बरत रहे हैं, चालान काट रहे हैं उन्होंने सीएम को मास्क पहनने के लिए क्यों नहीं कहा और मास्क नहीं पहना था तो चालान क्यों नहीं काटा। खुद अफसरों पर भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि कई अधिकारी बिना मास्क के ही कार्यक्रम में थे।
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हैरानी इस बात की है कि हाल ही में सीएम ने वीडियो संदेश जारी कर कोरोना के बढ़ते केस पर चिंता जताई थी। जनता पर कई तरह के नियम थोप दिए थे। इतना ही नहीं रात्रिकालीन कर्फ्यू की घोषणा की। महाकाल मंदिर में शयन आरती और भस्मारती में श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद कर दिया गया, लेकिन खुद के लिए कोई नियम नहीं। न मास्क, न सोशल डिस्टेंसिंग। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर प्रदेश के मुखिया अपनी कार्यशैली और आचरण से क्या संदेश देना चाहते हैं। खुद ही प्रदेशवासियों को खतरे में डाल रहे हैं और दूसरी तरफ फिक्र करने की नौटंकी कर रहे हैं। 
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क्या अब सख्ती बरतेंगे कलेक्टर

Madhya Pradesh: Such are the chiefs of MP, neither do they put on masks nor their party leaders...all the rules are only for the public, the officers who are strict on the common man are also under question...
बच्चों के बीच भी बिना मास्क के बैठे रहे सीएम शिवराज। - फोटो : सोशल मीडिया
इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह जिस तरह कोरोना के नियमों के पालन के लिए सख्ती कर रहे हैं तो क्या वे अब कुछ सख्त कदम उठाएंगे। सवाल उठ रहे हैं कि क्या कलेक्टर अब मुख्यमंत्री का चालान बनाएंगे। क्या मुख्यमंत्री और उनके सहयोगी भाजपा नेताओं पर कार्रवाई करेंगे। अगर नहीं कर सकते तो फिर सारे नियम जनता के लिए क्यों। क्यों जनता को परेशान कर रहे। जब खुद प्रदेश के मुखिया को ही कोरोना गाइडलाइन की परवाह नहीं है तो जनता पर दबाव क्यों बनाया जा रहा। क्यों नियम थोपे जा रहे।

मुख्यमंत्री और भाजपा नेताओं पर दर्ज होना चाहिए प्रकरण: कांग्रेस
शनिवार को हुए कार्यक्रम के बाद कांग्रेस ने सीएम पर हमला बोला है और मुख्यमंत्री समेत भाजपा के जिम्मेदार नेताओं के खिलाफ कोरोना के नियमों व गाइडलाइन का उल्लंघन करने के मामले में केस दर्ज करने की मांग की है।

कांग्रेस के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने उद्घाटन व नारियल फोड़ने के प्रेम के चलते इंदौर के हजारों नागरिकों के स्वास्थ्य को संकट में डाला है। एक तरफ तो जनता से कोरोना के नियमों के पालन की अपील कर रहे हैं, दूसरी तरफ खुद ही तमाम भीड़भरे आयोजनो से नियमों का मजाक उड़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री और भाजपा के तमाम जिम्मेदार नेताओं के खिलाफ कोरोना के नियमों व गाइडलाइन का उल्लंघन करने का प्रकरण दर्ज होना चाहिए।

एक तरफ तो खुद मुख्यमंत्री दो दिन पूर्व प्रदेशवासियों के नाम अपने संदेश में उनसे अपील करते हैं कि वह मास्क लगाएं, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें, भीड़ से बचें और नाइट कर्फ्यू का एलान करते हैं। मास्क नहीं पहनने वालों पर अर्थदंड की घोषणा कर दी जाती है और वहीं खुद मुख्यमंत्री  इंदौर आकर भीड़भरे कार्यक्रमों में शामिल होते हैं।  जहां न मास्क का उपयोग होता है न सोशल डिस्टेंसिंग का पालन। यही भाजपा का दोहरा चरित्र है। इसके पूर्व भी भाजपा ख़ुद चुनावो में लगी रही और जनता से कोरोना के नियमों की अपील करती रही ,जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता ने भुगता और प्रदेश में ढाई लाख से अधिक मौतें कोरोना की दूसरी लहर में सरकार की लापरवाही व कुप्रबंधन से हुई।

सलूजा ने कहा कि अब जब इंदौर में कोरोना के केस बढ़ रहे हैं। ओमिक्रॉन के संदिग्ध मरीजों के सैंपल दिल्ली जांच के लिए भेजे गए हैं। 15 जनवरी के बाद कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है तो ऐसे समय में क्या मुख्यमंत्री इन कार्यक्रमों को वर्चुअल तरीके से नहीं कर सकते थे। मुख्यमंत्री के इन कार्यक्रमों के बाद इंदौर शहर में यदि कोरोना का संक्रमण बढ़ता है तो उसका जिम्मेदार व दोषी कौन होगा। एक तरफ तो तमाम आयोजनों पर प्रतिबंध लग चुका है तो क्या कारण है इंदौर के लालबाग में मालवा उत्सव  के आयोजन को अनुमति दी गई है, जिससे भी कोरोना गाइडलाइन जमकर टूटेगी।

कांग्रेस मांग करती है कि मुख्यमंत्री और तमाम जिम्मेदार भाजपा नेताओं पर इन आयोजनों के माध्यम से कोरोना की गाइडलाइन तोड़ने व हज़ारों जनता के स्वास्थ्य को संकट में डालने का प्रकरण दर्ज होना चाहिए। बेहतर होता कि आज मुख्यमंत्री इंदौर आते और कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते, ऑक्सीजन प्लांटों की वास्तविकता जानते, इलाज-बेड-अस्पतालो की समीक्षा करते लेकिन भाजपा और उसके मुख्यमंत्री तो उद्घाटन, शिलान्यास प्रेमी है। उन्हें जनता की कोई फ़िक्र नहीं,उन्हें तो सिर्फ खुद के प्रचार-प्रसार की पड़ी है। अब यदि इंदौर में कोरोना का संक्रमण बढ़ता है तो इसके दोषी ख़ुद मुख्यमंत्री और भाजपा होगी।
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