{"_id":"61af61017b42f1708454a028","slug":"madhya-pradesh-high-court-ban-on-mining-for-diamonds-in-buxwaha-forest-hearing-on-company-s-reply-on-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Madhya Pradesh High Court: बक्सवाहा के जंगल में हीरों के लिए माइनिंग पर रोक कायम, कंपनी के जवाब पर सुनवाई 15 को","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Madhya Pradesh High Court: बक्सवाहा के जंगल में हीरों के लिए माइनिंग पर रोक कायम, कंपनी के जवाब पर सुनवाई 15 को
Fri, 10 Dec 2021 11:45 AM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Fri, 10 Dec 2021 11:45 AM IST
सार
मध्य प्रदेश के बक्सवाहा जंगल में हीरे की माइनिंग पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रोक कायम रखी है। दरअसल, हाईकोर्ट के नोटिस पर कंपनी ने जवाब दाखिल किया है। इस पर अब 15 जुलाई को सुनवाई होगी।
विज्ञापन
बक्सवाहा के जंगल
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बक्सवाहा के जंगल में हीरे की माइनिंग पर रोक कायम रखी है। इस संबंध में दाखिल दो याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई हुई। दरअसल, पिछली सुनवाई पर अक्टूबर में हाईकोर्ट ने माइनिंग पर रोक लगाई थी। साथ ही लीज हासिल करने वाली कंपनी से जवाब तलब किए थे। कंपनी की ओर से जवाब दाखिल हो गया है। इस मामले में अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी।
दरअसल, चीफ जस्टिस रवि विजय मलिमठ और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की बेंच के सामने बक्सवाहा के जंगलों में हीरे की माइनिंग के खिलाफ दो याचिकाएं दायर हुई थी। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ पीजी नाजपांडे की याचिका में बक्सवाहा के जंगल में 25 हजार साल पहले की रॉक पेंटिंग को पुरातात्विक संपदा घोषित करने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया है कि रॉक पेंटिंग की जानकारी देने के बाद भी पुरातत्व विभाग ने इसे संरक्षित क्षेत्र घोषित नहीं किया है। इस क्षेत्र में 364 हैक्टेयर जमीन में प्रस्तावित हीरा खनन कभी भी शुरू हो सकता है। यह पेंटिंग पाषाण युग में मानव जीवन की जानकारी का महत्वपूर्ण स्रोत है। पर्यावरण तथा बक्सवाहा के जंगल से जुड़े बिंदु पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में भी याचिका दायर की गई थी। पुरातात्विक संपदा का मामला एनजीटी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है, इस कारण हाईकोर्ट में यह याचिका दाखिल हुई है।
दूसरी याचिका हरियाणा निवासी रमित बासु, महाराष्ट्र निवासी हर्षवर्धन मेलांता व उप्र निवासी पंकज कुमार ने लगाई है। इसमें कहा गया है कि हीरे की माइनिंग के लिए आदित्य बिड़ला ग्रुप की एस्सल माइनिंग एंड इंड्रस्ट्री को छतरपुर स्थित बक्सवाहा के जंगल की 382 हैक्टेयर जमीन राज्य सरकार ने 50 साल की लीज पर दी है। इसके लिए सवा दो लाख पेड़ों को काटा जाना है. यह जंगल पन्ना टाइगर रिजर्व से लगा हुआ है और यह टाइगर कॉरिडोर में आता है। इसके लिए एनटीसीए और वाइल्ड लाइफ बोर्ड से अनुमति लेनी चाहिए थी, जो नहीं ली गई है। आवेदकों का कहना है कि वन्यजीवों को भी जीने का अधिकार है और अगर इन जंगलों को काटा गया तो वे कहां जाएंगे? बक्सवाहा जैसा जंगल बनने में हजारों साल लग जाते हैं। राज्य सरकार का लाभ के लिए जंगल को लीज पर देना गलत है।
विज्ञापन
विज्ञापन
दरअसल, चीफ जस्टिस रवि विजय मलिमठ और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की बेंच के सामने बक्सवाहा के जंगलों में हीरे की माइनिंग के खिलाफ दो याचिकाएं दायर हुई थी। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ पीजी नाजपांडे की याचिका में बक्सवाहा के जंगल में 25 हजार साल पहले की रॉक पेंटिंग को पुरातात्विक संपदा घोषित करने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया है कि रॉक पेंटिंग की जानकारी देने के बाद भी पुरातत्व विभाग ने इसे संरक्षित क्षेत्र घोषित नहीं किया है। इस क्षेत्र में 364 हैक्टेयर जमीन में प्रस्तावित हीरा खनन कभी भी शुरू हो सकता है। यह पेंटिंग पाषाण युग में मानव जीवन की जानकारी का महत्वपूर्ण स्रोत है। पर्यावरण तथा बक्सवाहा के जंगल से जुड़े बिंदु पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में भी याचिका दायर की गई थी। पुरातात्विक संपदा का मामला एनजीटी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है, इस कारण हाईकोर्ट में यह याचिका दाखिल हुई है।
विज्ञापन
दूसरी याचिका हरियाणा निवासी रमित बासु, महाराष्ट्र निवासी हर्षवर्धन मेलांता व उप्र निवासी पंकज कुमार ने लगाई है। इसमें कहा गया है कि हीरे की माइनिंग के लिए आदित्य बिड़ला ग्रुप की एस्सल माइनिंग एंड इंड्रस्ट्री को छतरपुर स्थित बक्सवाहा के जंगल की 382 हैक्टेयर जमीन राज्य सरकार ने 50 साल की लीज पर दी है। इसके लिए सवा दो लाख पेड़ों को काटा जाना है. यह जंगल पन्ना टाइगर रिजर्व से लगा हुआ है और यह टाइगर कॉरिडोर में आता है। इसके लिए एनटीसीए और वाइल्ड लाइफ बोर्ड से अनुमति लेनी चाहिए थी, जो नहीं ली गई है। आवेदकों का कहना है कि वन्यजीवों को भी जीने का अधिकार है और अगर इन जंगलों को काटा गया तो वे कहां जाएंगे? बक्सवाहा जैसा जंगल बनने में हजारों साल लग जाते हैं। राज्य सरकार का लाभ के लिए जंगल को लीज पर देना गलत है।
विज्ञापन
