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इंटरव्यू: मध्य प्रदेश के MSME सचिव बोले- नए स्टार्टअप्स को कर्मचारियों के वेतन में मदद, बिजली की दरों में छूट
Mon, 09 May 2022 03:55 PM IST
रवींद्र भजनी
आनंद पवार
आनंद पवार
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Mon, 09 May 2022 03:55 PM IST
सार
मध्य प्रदेश की स्टार्टअप पॉलिसी 13 मई को लॉन्च होने वाली है। इसके तहत नए स्टार्टअप्स को कर्मचारियों के वेतन में मदद दी जाएगी। साथ ही उन्हें बिजली की दरों में भी छूट मिलेगी।
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मध्य प्रदेश शासन के एमएसएमई विभाग के सचिव पी नरहरि से अमर उजाला की विशेष बातचीत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्य प्रदेश की नई स्टार्टअप पॉलिसी लॉन्च करने वाले हैं। वे वर्चुअल कार्यक्रम में 13 मई को एमपी स्टार्टअप सेंटर और पोर्टल का शुभारंभ करेंगे। मध्य प्रदेश की स्टार्टअप पॉलिसी क्या होगी? इसे किस तरह लागू किया जाएगा? इसमें किस तरह के प्रावधान होंगे? इन सभी प्रश्नों पर अमर उजाला ने मध्य प्रदेश शासन के एमएसएमई (MSME) विभाग के सचिव पी नरहरि से बातचीत की। पेश है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश-
मध्य प्रदेश में स्टार्टअप्स कितने हैं? नई पॉलिसी से आप उन्हें किस तरह मदद करेंगे?
नरहरि: प्रदेश में करीब 1900 स्टार्टअप्स हैं। सरकार के पोर्टल पर इन्वेस्टर्स से लेकर मेंटर्स तक सब कुछ मिलेगा। आप आइडिया लेकर आओ, अगर वह वाकई में कारगर साबित हो सकता है तो पूरी तरह से मदद की जाएगी।
पॉलिसी पहले से बनी थी तो उसमें क्या नया किया गया है?
नरहरि: पुरानी पॉलिसी में कुछ कमियां थी, जिन्हें दूर किया जा रहा है। हम स्टार्टअप सेंटर बना रहे हैं। साथ ही पोर्टल डेवलप कर रहे हैं। सेंटर में सब्जेक्ट एक्सपर्ट होंगे, जो स्टार्टअप कम्युनिटी को सपोर्ट करेंगे। जरूरी नहीं कि इस सेंटर पर सरकारी अधिकारी/कर्मचारी ही हो। यहां स्टार्टअप इकोसिस्टम को समझने और उस पर काम करने वाले सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स उपलब्ध रहेंगे। अगर कोई व्यक्ति स्टार्टअप खोलना चाहता है तो उसकी अड़चनों को दूर करने में यह सेंटर उनकी मदद करेगा। सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स नए उद्यमियों के लिए मेंटर की भूमिका में होंगे।
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ऑनलाइन पोर्टल की बात हो रही है, उस पर क्या होगा?
नरहरिः पोर्टल स्टार्टअप, निवेशकों और इन्क्यूबेटर्स के बीच में सेतू का काम करेगा। यह पोर्टल राज्य सरकार के सभी विभागों के साथ ही भारत सरकार के स्टार्टअप इंडिया से लिंक रहेगा। पॉलिसी के तहत सरकारी रियायतों और फायदों का उठाने के लिए पोर्टल सिंगल विंडो का काम करेगा।
स्टार्टअप्स की परिभाषा में अक्सर गफलत होता है। मध्य प्रदेश में किसे स्टार्टअप मानेंगे?
नरहरि: भारत सरकार के स्टार्टअप इंडिया से मान्यता प्राप्त और प्रदेश में स्थापित स्टार्टअप होना प्रमुख शर्त है। इस बार हमने आईटी और फिनेटक कंपनियों के अलावा इंजीनियरिंग यानी प्रोडक्ट स्टार्टअप भी जोड़ा है। यूनिक आइडिया होना पहली शर्त होगी। अगर किसी स्टार्टअप में महिलाओं की हिस्सेदारी 51% होगी तो ही उसे महिलाओं को दी जाने वाली रियायतों का लाभ मिल सकेगा।
सरकार स्टार्टअप्स को कितनी और कैसे आर्थिक मदद करेगी?
नरहरिः स्टार्टअप इंडिया के तहत मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स सेबी या आरबीआई से मान्यता प्राप्त संस्था से इन्वेस्टमेंट ले सकता है। अगर 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता ली है तो सरकार 15% यानी 15 लाख रुपये की अधिकतम मदद देगी। महिलाओं के स्टार्टअप्स को 3 प्रतिशत अतिरिक्त यानी कुल 18 लाख रुपये की अधिकतम मदद मिल सकेगी। कोई भी स्टार्टअप अपने जीवनकाल में चार बार यह लाभ ले सकता है। वेंचर कैपिटल फंड को AIFs के साथ जोड़ा जा रहा है। किसी भी स्टार्टअप को राशि AIF के माध्यम से दी जाएगी।
क्या सरकार और भी कोई सहायता देने जा रही है?
नरहरि: हां। सरकार प्रोडक्ट बेस्ड स्टार्टअप को अधिकतम 25 कर्मचारियों के लिए तीन साल तक प्रतिमाह पांच हजार रुपये वेतन के लिए, तीन साल तक प्रति कर्मचारी हर साल 13 हजार रुपये ट्रेनिंग के लिए, 50% राशि किराये के लिए और अधिकतम 5,000 रुपये सहायता उपलब्ध कराएगी। कमर्शियल बिजली की आपूर्ति तीन साल तक 5 रुपये प्रति यूनिट की दर से दी जाएगी। इसके अलावा प्रोडक्ट बेस्ड स्टार्टअप्स को पेटेंट और सरकारी खरीद में छूट का प्रावधान है।
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मध्य प्रदेश में स्टार्टअप्स कितने हैं? नई पॉलिसी से आप उन्हें किस तरह मदद करेंगे?
नरहरि: प्रदेश में करीब 1900 स्टार्टअप्स हैं। सरकार के पोर्टल पर इन्वेस्टर्स से लेकर मेंटर्स तक सब कुछ मिलेगा। आप आइडिया लेकर आओ, अगर वह वाकई में कारगर साबित हो सकता है तो पूरी तरह से मदद की जाएगी।
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पॉलिसी पहले से बनी थी तो उसमें क्या नया किया गया है?
नरहरि: पुरानी पॉलिसी में कुछ कमियां थी, जिन्हें दूर किया जा रहा है। हम स्टार्टअप सेंटर बना रहे हैं। साथ ही पोर्टल डेवलप कर रहे हैं। सेंटर में सब्जेक्ट एक्सपर्ट होंगे, जो स्टार्टअप कम्युनिटी को सपोर्ट करेंगे। जरूरी नहीं कि इस सेंटर पर सरकारी अधिकारी/कर्मचारी ही हो। यहां स्टार्टअप इकोसिस्टम को समझने और उस पर काम करने वाले सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स उपलब्ध रहेंगे। अगर कोई व्यक्ति स्टार्टअप खोलना चाहता है तो उसकी अड़चनों को दूर करने में यह सेंटर उनकी मदद करेगा। सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स नए उद्यमियों के लिए मेंटर की भूमिका में होंगे।
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ऑनलाइन पोर्टल की बात हो रही है, उस पर क्या होगा?
नरहरिः पोर्टल स्टार्टअप, निवेशकों और इन्क्यूबेटर्स के बीच में सेतू का काम करेगा। यह पोर्टल राज्य सरकार के सभी विभागों के साथ ही भारत सरकार के स्टार्टअप इंडिया से लिंक रहेगा। पॉलिसी के तहत सरकारी रियायतों और फायदों का उठाने के लिए पोर्टल सिंगल विंडो का काम करेगा।
स्टार्टअप्स की परिभाषा में अक्सर गफलत होता है। मध्य प्रदेश में किसे स्टार्टअप मानेंगे?
नरहरि: भारत सरकार के स्टार्टअप इंडिया से मान्यता प्राप्त और प्रदेश में स्थापित स्टार्टअप होना प्रमुख शर्त है। इस बार हमने आईटी और फिनेटक कंपनियों के अलावा इंजीनियरिंग यानी प्रोडक्ट स्टार्टअप भी जोड़ा है। यूनिक आइडिया होना पहली शर्त होगी। अगर किसी स्टार्टअप में महिलाओं की हिस्सेदारी 51% होगी तो ही उसे महिलाओं को दी जाने वाली रियायतों का लाभ मिल सकेगा।
सरकार स्टार्टअप्स को कितनी और कैसे आर्थिक मदद करेगी?
नरहरिः स्टार्टअप इंडिया के तहत मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स सेबी या आरबीआई से मान्यता प्राप्त संस्था से इन्वेस्टमेंट ले सकता है। अगर 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता ली है तो सरकार 15% यानी 15 लाख रुपये की अधिकतम मदद देगी। महिलाओं के स्टार्टअप्स को 3 प्रतिशत अतिरिक्त यानी कुल 18 लाख रुपये की अधिकतम मदद मिल सकेगी। कोई भी स्टार्टअप अपने जीवनकाल में चार बार यह लाभ ले सकता है। वेंचर कैपिटल फंड को AIFs के साथ जोड़ा जा रहा है। किसी भी स्टार्टअप को राशि AIF के माध्यम से दी जाएगी।
क्या सरकार और भी कोई सहायता देने जा रही है?
नरहरि: हां। सरकार प्रोडक्ट बेस्ड स्टार्टअप को अधिकतम 25 कर्मचारियों के लिए तीन साल तक प्रतिमाह पांच हजार रुपये वेतन के लिए, तीन साल तक प्रति कर्मचारी हर साल 13 हजार रुपये ट्रेनिंग के लिए, 50% राशि किराये के लिए और अधिकतम 5,000 रुपये सहायता उपलब्ध कराएगी। कमर्शियल बिजली की आपूर्ति तीन साल तक 5 रुपये प्रति यूनिट की दर से दी जाएगी। इसके अलावा प्रोडक्ट बेस्ड स्टार्टअप्स को पेटेंट और सरकारी खरीद में छूट का प्रावधान है।
