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मध्य प्रदेश: दिग्विजय सिंह ने लिखा सीएम शिवराज को पत्र, टेम और सुठालिया सिंचाई परियोजना के डूब में आ रहे किसानों की बताई पीड़ा
Sat, 18 Dec 2021 05:14 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sat, 18 Dec 2021 05:14 PM IST
सार
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व राज्य सभा सांसद दिग्विजय सिंह ने टेम सिंचाई परियोजना व सुठालिया सिंचाई परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है।
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दिग्विजय सिंह-शिवराज सिंह चौहान
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व राज्य सभा सांसद दिग्विजय सिंह ने टेम सिंचाई परियोजना व सुठालिया सिंचाई परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है। भोपाल, विदिशा, राजगढ़ व गुना जिले के डूब क्षेत्र में आने वाले प्रभावितों को विस्थापन से पूर्व 15 लाख रुपये हेक्टेयर की दर से मुआवजा राशि देने व शहरी क्षेत्र में बसने के लिए भूखंड दिए जाने की नीति बनाने की बात कही है।
दिग्विजय सिंह कहा है कि मैंने गत दिवस भोपाल के पास टेम नदी पर बन रही टेम परियोजना और राजगढ़ जिले में पार्वती नदी पर बन रही सुठालिया परियोजना के डूब क्षेत्र का दौरा किया था और डूब में आ रहे परिवारों से चर्चा की थी। राज्य शासन द्वारा दिये जा रहे बहुत कम मुआवजे से लेकर स्थानीय रहवासियों में भारी आक्रोश है।
दिग्विजय सिंह ने निवेदन किया है कि टेम सिंचाई परियोजना और सुठालिया सिंचाई परियोजना के डूब प्रभावित गांवों के किसानों के विस्थापन से पूर्व 15 लाख रुपये हेक्टेयर की दर से मुआवजा दिया जाए तथा शहरी क्षेत्र में बसने के लिए भूखंड दिए जाने की नीति बनाई जाए।
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पढ़िए दिग्विजय सिंह का पूरा पत्र
प्रिय श्री शिवराज सिंह चौहान जी,
भोपाल के पास टेम नदी पर बन रही टेम परियोजना और राजगढ़ जिले में पार्वती नदी पर बन रही सुठालिया परियोजना के डूब क्षेत्र का गत दिवस मैंने दौरा किया था और डूब में आ रहे परिवारों से चर्चा की थी। जो इस समय बड़े पैमाने पर होने वाले विस्थापन की राह देख रहे हैं। राज्य शासन द्वारा दिए जा रहे बहुत कम मुआवजे से लेकर स्थानीय रहवासियों में भारी आक्रोश है। पीड़ित किसान मोहनपुरा डेम के लिए बनी विस्थापन नीति के अनुरूप पुनर्वास एवं मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
टेम परियोजना में विस्थापन
यह सिंचाई परियोजना भोपाल और विदिशा जिले की सीमा पर बसे गांवों के बीच स्वीकृत की गई है, जिसकी लागत करीब 383 करोड़ रुपये है। इस परियोजना में भोपाल जिले के ग्राम मजीदगढ़, खेडली, छाबडीखेड़ा, गढ़ाब्राम्हण और कोलूखेड़ी ग्रामों की 193 हेक्टेयर जमीन और 790 कच्चे, पक्के घर डूब में आ रहे हैं। इसी प्रकार विदिशा जिले के ग्राम बैरागढ़, दपकन, गोरियापुरा, धोखेड़ा, हरिपुरा, धीरगढ़, भगवानपुर, मण्डेला और भीलाखेड़ी खुर्द की करीब 450 हेक्टेयर जमीन और 560 मकान डूब की चपेट में आ रहे है। गुना जिले के अरेरा बालापुरा ग्राम के कुछ घर भी डूबने जा रहे हैं। इस परियोजना से मकसूदनगढ़ तहसील की करीब 10 हजार और बैरसिया तहसील की करीब 550 हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी।
टेम परियोजना अंतर्गत वर्तमान में विदिशा जिले में 2 लाख 15 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तथा बैरसिया में 2 लाख 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का मुआवजा किसानों को दिया जा रहा है। खुले बाजार में इन जमीनों की कीमत से 12.50 से 20 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक है। डूब में आने वाले किसानों को सरकार एक लाख रुपये एकड़ से भी कम का मुआवजा देने जा रही है। जिससे किसानों में सरकार की पुनर्वास नीति को लेकर बहुत गुस्सा है। इसीलिये वे बांध निर्माण का विरोध कर रहे है। चर्चा में किसानों ने मांग रखी है कि राजगढ़ जिले में निर्मित मोहनपुरा परियोजना में सरकार ने दस लाख रुपये हेक्टेयर की एकमुश्त दर से मुआवजा देकर विस्थापितों का पुनर्वास किया था। उन्हें ट्यूबबेल, कुआ, पाइप लाइन और फलोद्यान-बगीचा का अलग से मुआवजा दिया था। किसान सहमति के साथ उसे स्वीकार कर विस्थापित हो गए थे और अपने पैतृक स्थान की यादें किसानों के कल्याण के लिए डूब जाने दी थी।
टेम परियोजना के किसानों को भी अपनी पुश्तैनी जमीन-जायदाद छोड़नी पड़ रही है। मुआवजे की कम राशि दिए जाने से किसानों में असंतोष है। राज्य सरकार कलेक्टर गाइड लाइन को आधार बनाकर बहुत कम मुआवजा देकर जमीनों और कमानों का अधिग्रहण करने जा रही है। अत्यंत कम मुआवजा मिलने से सभी ग्रामवासी सदा के लिए बदहाल हो जाएंगे। यहां के किसान न सिर्फ बेघर होंगे बल्कि भूमिहीन भी हो जाएंगे। इन्हें कम से कम 15 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की रेट से मुआवजा दिया जाए।
सुठालिया परियोजना
करीब 1400 करोड़ की यह सिंचाई परियोजना राजगढ़ जिले के ब्यावरा विकासखंड में ग्राम बैराड़ के पास पार्वती नदी पर प्रस्तावित है। इस परियोजना में राजगढ़ जिले के 9, भोपाल जिले के 5 और गुना जिले के 2 ग्राम डूब में आ रहे हैं। डेढ़ हजार से अधिक परिवारों को विस्थापित किया जाएगा। यहां की करीब 3400 हेक्टेयर जमीन डूब रही है। सुठालिया परियोजना में भी जिस दर पर जमीन का मुआवजा दिया जा रहा है, वह बाजार दर से बहुत कम है। सुठालिया परियोजना में डूब में आ रही अधिकांश जमीन पूर्व से सिंचित है। इन जमीनों का कलेक्टर गाइड लाइन के हिसाब से बहुत कम मुआवजा है। किसान उचित मुआवजा मिलने पर ही विस्थापित होने को तैयार हो सकते हैं।
पूर्व में राजगढ़ जिले में मोहनपुरा सिंचाई परियोजना के विस्थापितों को सरकार ने 2016 में दस लाख रुपये हेक्टेयर की दर से जमीन का मुआवजा दिया था। डूब पीड़ितों को मकान के लिए जमीन भी शहरी क्षेत्र में दी गई थी। जिससे बिना किसी बड़े असंतोष के किसानों का विस्थापन हो गया था। किसान आज मोहनपुरा डेम के समय बनाई गई नीति के अनुरूप ही अपना ‘‘विस्थापन और पुनर्वास’’ चाह रहे हैं। उनकी मांग है कि 2021 में बढ़ी हुई मंहगाई और जमीन की कीमतों को देखते हुए उन्हें 15 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा और समीपवर्ती शहरी क्षेत्र में रहवासी भूखंड उपलब्ध कराए जाएं।
मेरा आपसे निवेदन है कि टेम सिंचाई परियोजना और सुठालिया सिंचाई परियोजना के डूब प्रभावित गांवों के किसानों के विस्थापन से पूर्व 15 लाख रुपये हेक्टेयर की दर से मुआवजा तथा शहरी क्षेत्र में बसाए जाने के लिए भूखंड दिए जाने की नीति बनाई जाकर शासन स्तर से निर्णय लेने का कष्ट करें। तभी विस्थापितों को उजड़ने का दर्द कम हो सकेगा और वे परियोजना से लाभांवित होने वाले किसानों के हित में विस्थापन के लिए रजामंदी दे सकेंगे।
सहयोग के लिए मैं आपका आभारी रहूँगा।
सादर,
आपका
(दिग्विजय सिंह)
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दिग्विजय सिंह कहा है कि मैंने गत दिवस भोपाल के पास टेम नदी पर बन रही टेम परियोजना और राजगढ़ जिले में पार्वती नदी पर बन रही सुठालिया परियोजना के डूब क्षेत्र का दौरा किया था और डूब में आ रहे परिवारों से चर्चा की थी। राज्य शासन द्वारा दिये जा रहे बहुत कम मुआवजे से लेकर स्थानीय रहवासियों में भारी आक्रोश है।
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दिग्विजय सिंह ने निवेदन किया है कि टेम सिंचाई परियोजना और सुठालिया सिंचाई परियोजना के डूब प्रभावित गांवों के किसानों के विस्थापन से पूर्व 15 लाख रुपये हेक्टेयर की दर से मुआवजा दिया जाए तथा शहरी क्षेत्र में बसने के लिए भूखंड दिए जाने की नीति बनाई जाए।
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पढ़िए दिग्विजय सिंह का पूरा पत्र
प्रिय श्री शिवराज सिंह चौहान जी,
भोपाल के पास टेम नदी पर बन रही टेम परियोजना और राजगढ़ जिले में पार्वती नदी पर बन रही सुठालिया परियोजना के डूब क्षेत्र का गत दिवस मैंने दौरा किया था और डूब में आ रहे परिवारों से चर्चा की थी। जो इस समय बड़े पैमाने पर होने वाले विस्थापन की राह देख रहे हैं। राज्य शासन द्वारा दिए जा रहे बहुत कम मुआवजे से लेकर स्थानीय रहवासियों में भारी आक्रोश है। पीड़ित किसान मोहनपुरा डेम के लिए बनी विस्थापन नीति के अनुरूप पुनर्वास एवं मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
टेम परियोजना में विस्थापन
यह सिंचाई परियोजना भोपाल और विदिशा जिले की सीमा पर बसे गांवों के बीच स्वीकृत की गई है, जिसकी लागत करीब 383 करोड़ रुपये है। इस परियोजना में भोपाल जिले के ग्राम मजीदगढ़, खेडली, छाबडीखेड़ा, गढ़ाब्राम्हण और कोलूखेड़ी ग्रामों की 193 हेक्टेयर जमीन और 790 कच्चे, पक्के घर डूब में आ रहे हैं। इसी प्रकार विदिशा जिले के ग्राम बैरागढ़, दपकन, गोरियापुरा, धोखेड़ा, हरिपुरा, धीरगढ़, भगवानपुर, मण्डेला और भीलाखेड़ी खुर्द की करीब 450 हेक्टेयर जमीन और 560 मकान डूब की चपेट में आ रहे है। गुना जिले के अरेरा बालापुरा ग्राम के कुछ घर भी डूबने जा रहे हैं। इस परियोजना से मकसूदनगढ़ तहसील की करीब 10 हजार और बैरसिया तहसील की करीब 550 हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी।
टेम परियोजना अंतर्गत वर्तमान में विदिशा जिले में 2 लाख 15 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तथा बैरसिया में 2 लाख 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का मुआवजा किसानों को दिया जा रहा है। खुले बाजार में इन जमीनों की कीमत से 12.50 से 20 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक है। डूब में आने वाले किसानों को सरकार एक लाख रुपये एकड़ से भी कम का मुआवजा देने जा रही है। जिससे किसानों में सरकार की पुनर्वास नीति को लेकर बहुत गुस्सा है। इसीलिये वे बांध निर्माण का विरोध कर रहे है। चर्चा में किसानों ने मांग रखी है कि राजगढ़ जिले में निर्मित मोहनपुरा परियोजना में सरकार ने दस लाख रुपये हेक्टेयर की एकमुश्त दर से मुआवजा देकर विस्थापितों का पुनर्वास किया था। उन्हें ट्यूबबेल, कुआ, पाइप लाइन और फलोद्यान-बगीचा का अलग से मुआवजा दिया था। किसान सहमति के साथ उसे स्वीकार कर विस्थापित हो गए थे और अपने पैतृक स्थान की यादें किसानों के कल्याण के लिए डूब जाने दी थी।
टेम परियोजना के किसानों को भी अपनी पुश्तैनी जमीन-जायदाद छोड़नी पड़ रही है। मुआवजे की कम राशि दिए जाने से किसानों में असंतोष है। राज्य सरकार कलेक्टर गाइड लाइन को आधार बनाकर बहुत कम मुआवजा देकर जमीनों और कमानों का अधिग्रहण करने जा रही है। अत्यंत कम मुआवजा मिलने से सभी ग्रामवासी सदा के लिए बदहाल हो जाएंगे। यहां के किसान न सिर्फ बेघर होंगे बल्कि भूमिहीन भी हो जाएंगे। इन्हें कम से कम 15 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की रेट से मुआवजा दिया जाए।
सुठालिया परियोजना
करीब 1400 करोड़ की यह सिंचाई परियोजना राजगढ़ जिले के ब्यावरा विकासखंड में ग्राम बैराड़ के पास पार्वती नदी पर प्रस्तावित है। इस परियोजना में राजगढ़ जिले के 9, भोपाल जिले के 5 और गुना जिले के 2 ग्राम डूब में आ रहे हैं। डेढ़ हजार से अधिक परिवारों को विस्थापित किया जाएगा। यहां की करीब 3400 हेक्टेयर जमीन डूब रही है। सुठालिया परियोजना में भी जिस दर पर जमीन का मुआवजा दिया जा रहा है, वह बाजार दर से बहुत कम है। सुठालिया परियोजना में डूब में आ रही अधिकांश जमीन पूर्व से सिंचित है। इन जमीनों का कलेक्टर गाइड लाइन के हिसाब से बहुत कम मुआवजा है। किसान उचित मुआवजा मिलने पर ही विस्थापित होने को तैयार हो सकते हैं।
पूर्व में राजगढ़ जिले में मोहनपुरा सिंचाई परियोजना के विस्थापितों को सरकार ने 2016 में दस लाख रुपये हेक्टेयर की दर से जमीन का मुआवजा दिया था। डूब पीड़ितों को मकान के लिए जमीन भी शहरी क्षेत्र में दी गई थी। जिससे बिना किसी बड़े असंतोष के किसानों का विस्थापन हो गया था। किसान आज मोहनपुरा डेम के समय बनाई गई नीति के अनुरूप ही अपना ‘‘विस्थापन और पुनर्वास’’ चाह रहे हैं। उनकी मांग है कि 2021 में बढ़ी हुई मंहगाई और जमीन की कीमतों को देखते हुए उन्हें 15 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा और समीपवर्ती शहरी क्षेत्र में रहवासी भूखंड उपलब्ध कराए जाएं।
मेरा आपसे निवेदन है कि टेम सिंचाई परियोजना और सुठालिया सिंचाई परियोजना के डूब प्रभावित गांवों के किसानों के विस्थापन से पूर्व 15 लाख रुपये हेक्टेयर की दर से मुआवजा तथा शहरी क्षेत्र में बसाए जाने के लिए भूखंड दिए जाने की नीति बनाई जाकर शासन स्तर से निर्णय लेने का कष्ट करें। तभी विस्थापितों को उजड़ने का दर्द कम हो सकेगा और वे परियोजना से लाभांवित होने वाले किसानों के हित में विस्थापन के लिए रजामंदी दे सकेंगे।
सहयोग के लिए मैं आपका आभारी रहूँगा।
सादर,
आपका
(दिग्विजय सिंह)
