मध्यप्रदेश चुनाव: जयवर्धन सिंह किसे मानते हैं राजनीतिक गुरु, खास इंटरव्यू में सब बताया

नमित शुक्ला, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 16 Nov 2018 12:05 PM IST
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जयवर्धन सिंह का खास इंटरव्यू
जयवर्धन सिंह का खास इंटरव्यू - फोटो : Amar Ujala

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राघौगढ़ के युवा विधायक जयवर्धन सिंह ने अमर उजाला डॉट कॉम से खास बातचीत की। दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं। उनके सामने अपने पारंपरिक किले को बचाए रखने की चुनौती होगी।

'पिता हैं राजनीतिक गुरु'

जयवर्धन ने राजनीतिक गुरु के सवाल पर कहा, "देखिये..गुरू तो वह होता है। जिसे हम बहुत नजदीक से देखते हैं। राजनीति में वो दिग्विजय सिंह है, जिन्हें फॉलो किया। वे पिता तो हैं ही, लेकिन उनका जो उनका तरीका है काम करने का.जो उनका अनुशासन है। अगर हम देखें तो हर सुबह योग करते हैं। पूजा पाठ करते हैं और निरंतर महीने में तीस दिन लगातार काम पर रहते हैं। मेहनत करते हैं। जो उनकी निष्ठा है कांग्रेस के प्रति पर भी सीखने लायक है। वे फर्स्ट है हमारे राजनीतिक गुरू, जो भी सीखा है, उनके द्वारा सीखा है। लेकिन साथ ही इंदिरा गांधी जी भी है जो उनकी कार्यशैली रहती है, जो उन्होंने किसानों के लिए किया। बैंक का केंद्रीयकरण किया। नेहरू जी ऐसे प्रधानमंत्री थे। हमारे देश के लिए आज हम पूरे विश्व की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी इसलिए हैं क्योंकि जो नींव रखी थी नेहरू जी में उसका बहुत बड़ा योगदान था।"

'कांग्रेस ने स्थापित किए उद्योग-धंधे'

दिग्विजय सिंह 10 साल तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। उन्हें 'राजा' नाम से भी पुकारा जाता है। शायद यही वजह है कि भाजपा अपने प्रचार अभियान में इस चीज को भी निशाना बना रही है। इस बारे में पूछे जाने पर जयवर्धन कहते हैं कि पिछले 15 साल में शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने सारे अधिकार खुद पर केंद्रित कर लिए हैं जबकि दिग्विजय के वक्त ऐसा नहीं था। आज एक छोटे से ट्रांसफर के लिए या छोटी सी शिकायत के लिए भोपाल तक जाना पड़ता है। जबकि जब सरकार कांग्रेस पार्टी की थी। उस समय जो अधिकतर ऐसे निर्णय थे वो पंचायत स्तर पर होते थे। गेल, एनएफएल की फैक्ट्री हो या बॉटलिंग प्लांट हो। ग्वालियर का मालनपुर क्षेत्र है, भोपाल का मंडीदीप है, बीएचईएल है यह सब उस समय स्थापित हुए थे। जब सरकार कांग्रेस पार्टी की थी। भाजपा सरकार ने 1 साल में सिर्फ विज्ञापनों पर 700 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। 
जयवर्धन ने सरकार बनने की सूरत में नए इंडस्ट्रियल कॉरीडोर बनाने का वादा किया। मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को मतदान होना है। नतीजे 11 दिसंबर को आएंगे।
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