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शिवराज का दावा, सत्ता समर्थक लहर के बूते मध्यप्रदेश में चौथी दफा सरकार बनाएंगे
भाषा
Updated Tue, 27 Nov 2018 09:10 PM IST
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शिवराज सिंह चौहान
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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक बार फिर प्रदेश में भाजपा सरकार बनने का भरोसा है। सीएम चौहान ने पूरे विश्वास के साथ कहा कि सत्ता विरोधी लहर नहीं बल्कि सत्ता समर्थक लहर के बूते भाजपा सुविधाजनक बहुमत हासिल कर प्रदेश में लगातार चौथी दफा सरकार बनाएगी। प्रदेश में बुधवार को विधानसभा चुनाव के तहत मतदान होना है। इन अहम चुनावों में कांग्रेस हिन्दी क्षेत्र के द्विधुव्रीय राजनीति वाले इस प्रदेश में सत्ता में आने के लिये जी तोड़ प्रयास कर रही है। वहीं मध्यप्रदेश में भाजपा शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री का चेहरा पेश करते हुए चुनाव में उतरी है और अपने 15 साल के शासन की उपलब्धियां गिना रही है। मतदान से एक दिन पूर्व 59 वर्षीय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘पीटीआई-भाषा’ से एक विशेष मुलाकात में कहा कि विधानसभा चुनाव में हम सुविधाजनक बहुमत हासिल करेंगे।
चौहान के नेतृत्व में भाजपा प्रदेश में लगातार तीसरी दफा चुनाव में उतरी है। तीसरे चुनाव के परिदृश्य संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा 2008 और 2013 के पिछले दो विधानसभा चुनावों से माहौल इस बार बेहतर है। मुझे तो लगता है इस बार ज्यादा पक्ष में है। उन्होंने कहा कि विशेषकर गरीब कल्याण की योजनाओं से समाज के सभी वर्गों विशेषकर निचले तबके के लोगों को भाजपा की ओर अधिक प्रभावित किया है। पिछले दोनों चुनावों की तुलना में इस बार अंतर यह है कि हमारी सभाओं में विशेष तौर पर गरीब और निचले तबके के लोग अधिक आ रहे हैं।
सत्ता समर्थन लहर चल रही है
प्रदेश में भाजपा के 15 साल के शासन के चलते चुनाव में सत्ता विरोधी लहर प्रभावी होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सत्ता विरोधी लहर की बजाय मध्यप्रदेश में सत्ता समर्थक लहर चल रही है क्योंकि हमने प्रदेश को बीमारू राज्य की श्रेणी से निकाल कर विकसित राज्य बनाया है और अब इसे समृद्ध राज्य बनाना हमारा लक्ष्य होगा। इस सवाल पर कि अगले पांच साल में वह स्वयं को कहां देखना पसंद करेंगे, पर मुख्यमंत्री चौहान ने संतुष्ट भाव से कहा कि मैं मध्यप्रदेश में ही रहना पसंद करुंगा। मेरी अंतरात्मा मध्यप्रदेश में ही बसती है। मध्यप्रदेश को आगे बढ़ाना है और प्रदेश की 7.25 करोड़ जनता मेरा परिवार है। मुख्यमंत्री के नाते नहीं, परिवार के नाते मैं इनकी सेवा करता हूं। मध्यप्रदेश की जनता के साथ मेरा भावनात्मक संबंध है, यह राजनीतिक नहीं है।
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मुख्यमंत्री जन आशीर्वाद यात्रा सहित चुनाव प्रचार को मिलाकर अब तक प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों का दौरा कर चुके हैं। और चुनाव नामांकन के बाद से प्रचार थमने तक पूरे प्रदेश में प्रतिदिन 12 जनसभाओं के प्रतिदिन के औसत से कुल 154 आमसभाओं को सम्बोधित कर चुके हैं। यह अपने आप में एक रिकार्ड है। चौहान नवंबर 2005 में प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे और चौहान के नाम मध्य प्रदेश के सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकार्ड दर्ज हो चुका है।
नोटबंदी और जीएसटी जैसे मुद्दों के चुनाव को प्रभावित करने संबंधी सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई वितरीत असर भाजपा पर नहीं पड़ेगा और कई फैसले ऐसे होते हैं जिनका दीर्घकालीन फायदा होता है। उन्होंने कहा, ‘‘जीएसटी और नोटबंदी ऐसे ही कदम हैं, जिनका देश को लाभ होगा। व्यक्तिगत लाभ हानि की चिंता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने नहीं की, जो कदम देश के हित में थे, वह उठाए।
मोदी को भारत के लिये भगवान का वरदान बताने के साथ ही चौहान ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के संबंध में कहा कि उनको राजनीति की समझ नहीं है। देखिए, वह मध्यप्रदेश के चुनाव में रॉफेल मामले पर बोलेंगे तो क्या असर पड़ेगा? यहां के मुदृदे ही अलग हैं।
उन्होंने कहा कि और एक बात मैं कहता हूं, मोदी जी की ईमानदारी पर आम जनता आंख बंद करके भरोसा करती है। वह देश के लिए ही जीते हैं, वह गड़बड़ कर ही नहीं सकते। कितने ही रॉफेल के आरोप लगा लें। चौहान ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बारे में कहा कि और कहां क्या कहना चाहिए, भैया को यही नहीं पता है। बुधनी में रॉफेल कहोगे तो कोई समझेगा कि राफेल है क्या? पता नहीं उनका पॉलीटिकल एडवाइजर कौन है, कहां क्या कहना है, क्या कहना चाहिए, यह तो बताये।
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चौहान के नेतृत्व में भाजपा प्रदेश में लगातार तीसरी दफा चुनाव में उतरी है। तीसरे चुनाव के परिदृश्य संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा 2008 और 2013 के पिछले दो विधानसभा चुनावों से माहौल इस बार बेहतर है। मुझे तो लगता है इस बार ज्यादा पक्ष में है। उन्होंने कहा कि विशेषकर गरीब कल्याण की योजनाओं से समाज के सभी वर्गों विशेषकर निचले तबके के लोगों को भाजपा की ओर अधिक प्रभावित किया है। पिछले दोनों चुनावों की तुलना में इस बार अंतर यह है कि हमारी सभाओं में विशेष तौर पर गरीब और निचले तबके के लोग अधिक आ रहे हैं।
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सत्ता समर्थन लहर चल रही है
प्रदेश में भाजपा के 15 साल के शासन के चलते चुनाव में सत्ता विरोधी लहर प्रभावी होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सत्ता विरोधी लहर की बजाय मध्यप्रदेश में सत्ता समर्थक लहर चल रही है क्योंकि हमने प्रदेश को बीमारू राज्य की श्रेणी से निकाल कर विकसित राज्य बनाया है और अब इसे समृद्ध राज्य बनाना हमारा लक्ष्य होगा। इस सवाल पर कि अगले पांच साल में वह स्वयं को कहां देखना पसंद करेंगे, पर मुख्यमंत्री चौहान ने संतुष्ट भाव से कहा कि मैं मध्यप्रदेश में ही रहना पसंद करुंगा। मेरी अंतरात्मा मध्यप्रदेश में ही बसती है। मध्यप्रदेश को आगे बढ़ाना है और प्रदेश की 7.25 करोड़ जनता मेरा परिवार है। मुख्यमंत्री के नाते नहीं, परिवार के नाते मैं इनकी सेवा करता हूं। मध्यप्रदेश की जनता के साथ मेरा भावनात्मक संबंध है, यह राजनीतिक नहीं है।
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मुख्यमंत्री जन आशीर्वाद यात्रा सहित चुनाव प्रचार को मिलाकर अब तक प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों का दौरा कर चुके हैं। और चुनाव नामांकन के बाद से प्रचार थमने तक पूरे प्रदेश में प्रतिदिन 12 जनसभाओं के प्रतिदिन के औसत से कुल 154 आमसभाओं को सम्बोधित कर चुके हैं। यह अपने आप में एक रिकार्ड है। चौहान नवंबर 2005 में प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे और चौहान के नाम मध्य प्रदेश के सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकार्ड दर्ज हो चुका है।
नोटबंदी और जीएसटी जैसे मुद्दों के चुनाव को प्रभावित करने संबंधी सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई वितरीत असर भाजपा पर नहीं पड़ेगा और कई फैसले ऐसे होते हैं जिनका दीर्घकालीन फायदा होता है। उन्होंने कहा, ‘‘जीएसटी और नोटबंदी ऐसे ही कदम हैं, जिनका देश को लाभ होगा। व्यक्तिगत लाभ हानि की चिंता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने नहीं की, जो कदम देश के हित में थे, वह उठाए।
मोदी को भारत के लिये भगवान का वरदान बताने के साथ ही चौहान ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के संबंध में कहा कि उनको राजनीति की समझ नहीं है। देखिए, वह मध्यप्रदेश के चुनाव में रॉफेल मामले पर बोलेंगे तो क्या असर पड़ेगा? यहां के मुदृदे ही अलग हैं।
उन्होंने कहा कि और एक बात मैं कहता हूं, मोदी जी की ईमानदारी पर आम जनता आंख बंद करके भरोसा करती है। वह देश के लिए ही जीते हैं, वह गड़बड़ कर ही नहीं सकते। कितने ही रॉफेल के आरोप लगा लें। चौहान ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बारे में कहा कि और कहां क्या कहना चाहिए, भैया को यही नहीं पता है। बुधनी में रॉफेल कहोगे तो कोई समझेगा कि राफेल है क्या? पता नहीं उनका पॉलीटिकल एडवाइजर कौन है, कहां क्या कहना है, क्या कहना चाहिए, यह तो बताये।
