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मध्यप्रदेश चुनाव: बागियों को मनाने में जुटी भाजपा-कांग्रेस, 30 सीटों पर खेल बिगड़ने का डर
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 13 Nov 2018 12:07 PM IST
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शिवराज चौहान और कमलनाथ
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मध्यप्रदेश में सत्ताधारी पार्टी भाजपा और विपक्षी पार्टी कांग्रेस दोनों ही के सामने बागियों ने बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है। अब दोनों दल टिकट नहीं मिलने पर बागी हुए नेताओं को मनाने में जुट गए हैं। प्रदेश में सभी 230 सीटों पर 28 नवंबर को मतदान होना है। माना जा रहा है कि ये बागी नेता लगभग 30 सीटों के नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह, उपाध्यक्ष प्रभात झा, प्रदेश संगठन सचिव सुहास भगत उन नेताओं में शामिल हैं जो बागी नेताओं के संपर्क में हैं। बताया जा रहा है कि वरिष्ठ पार्टी के खिलाफ उम्मीदवारी पेश कर रहे कैडर के नेताओं के संपर्क में हैं। पार्टी को उम्मीद है कि पहले की तरह ही ये नेता अपनी उम्मीदवारी वापस ले लेंगे।
दिग्विजय सिंह कर रहे कवायद
वहीं, कांग्रेस की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह यह कवायद कर रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह भी यह सुनिश्चित करने में लगे हैं कि चुनाव में पार्टी उम्मीदवार का सामना बागी नेताओं से न हो।
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भाजपा के कई नेता हुए बागी
भाजपा के बागी नेताओं में पांच बार के सांसद और बुंदेलखंड में प्रभाव रखने वाले रामकृष्ण कुसमारिया निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में दो विधानसभा सीटों दामोह और पथरिया से ताल ठोक रहे हैं। इसी तरह प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक राघवजी भाई सामान्य पिछड़ा और अल्पसंख्यक कल्याण समाज (सपाक्स) के टिकट पर विदिशा जिले की शमशाबाद सीट से पार्टी को चुनौती दे रहे हैं। वह अपनी बेटी ज्योति शाह को टिकट नहीं दिए जाने से नाराज हैं। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेश अध्यक्ष धीरज पटेरिया जबलपुर उत्तर से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं।
कांग्रेस में भी घमासान
कांग्रेस के बागियों की बात करें तो पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रवक्ता सत्यव्रत चतुर्वेदी के बेटे नितिन चतुर्वेदी बुंदेलखंड की राजनगर सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने नितिन को टिकट देने से इंकार कर दिया था। इसी तरह टिकट नहीं मिलने के बाद साहब सिंह गुर्जर ग्वालियर ग्रामीण सीट से किस्मत आजमा रहे हैं।
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सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह, उपाध्यक्ष प्रभात झा, प्रदेश संगठन सचिव सुहास भगत उन नेताओं में शामिल हैं जो बागी नेताओं के संपर्क में हैं। बताया जा रहा है कि वरिष्ठ पार्टी के खिलाफ उम्मीदवारी पेश कर रहे कैडर के नेताओं के संपर्क में हैं। पार्टी को उम्मीद है कि पहले की तरह ही ये नेता अपनी उम्मीदवारी वापस ले लेंगे।
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दिग्विजय सिंह कर रहे कवायद
वहीं, कांग्रेस की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह यह कवायद कर रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह भी यह सुनिश्चित करने में लगे हैं कि चुनाव में पार्टी उम्मीदवार का सामना बागी नेताओं से न हो।
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भाजपा के कई नेता हुए बागी
भाजपा के बागी नेताओं में पांच बार के सांसद और बुंदेलखंड में प्रभाव रखने वाले रामकृष्ण कुसमारिया निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में दो विधानसभा सीटों दामोह और पथरिया से ताल ठोक रहे हैं। इसी तरह प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक राघवजी भाई सामान्य पिछड़ा और अल्पसंख्यक कल्याण समाज (सपाक्स) के टिकट पर विदिशा जिले की शमशाबाद सीट से पार्टी को चुनौती दे रहे हैं। वह अपनी बेटी ज्योति शाह को टिकट नहीं दिए जाने से नाराज हैं। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेश अध्यक्ष धीरज पटेरिया जबलपुर उत्तर से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं।
कांग्रेस में भी घमासान
कांग्रेस के बागियों की बात करें तो पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रवक्ता सत्यव्रत चतुर्वेदी के बेटे नितिन चतुर्वेदी बुंदेलखंड की राजनगर सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने नितिन को टिकट देने से इंकार कर दिया था। इसी तरह टिकट नहीं मिलने के बाद साहब सिंह गुर्जर ग्वालियर ग्रामीण सीट से किस्मत आजमा रहे हैं।
