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Simhastha 2028: किन्नर अखाड़ा की उज्जैन में बड़ी बैठक, आधिपत्य को लेकर तकरार; चर्चा में आया ये बयान

Fri, 13 Mar 2026 08:34 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Fri, 13 Mar 2026 08:34 PM IST
सार

उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों को लेकर किन्नर अखाड़े की दो दिवसीय बैठक आयोजित हुई। बैठक में देशभर से आए किन्नर संतों ने कुंभ आयोजन और अखाड़े के मुद्दों पर चर्चा की। इस बीच अजय दास को लेकर महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने जो बयान दिया है वो काफी अहम है। पढ़ें पूरी खबर

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महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सिंहस्थ महाकुंभ 2028 को लेकर किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की उपस्थिति में उज्जैन में दो दिवसीय बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज भी आशीर्वाद देने पहुंचे। इस दौरान देशभर से आए किन्नर संतों ने आगामी सिंहस्थ महाकुंभ सहित अन्य कुंभ आयोजनों को लेकर चर्चा की। इस बीच ऋषि अजय दास को लेकर जो बयान दिया गया उसको लेकर चर्चा जोर पकड़ रही है।

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बैठक में किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास द्वारा अखाड़े पर अपना आधिपत्य जताने को लेकर भी नाराजगी व्यक्त की गई। संतों ने कहा कि किन्नर अखाड़े में सभी की राय से निर्णय लिए जाते हैं, किसी एक व्यक्ति की नहीं चलती। उन्होंने यह भी कहा कि जो गृहस्थ है, वह आखिर किस प्रकार ऋषि हो सकता है।

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'पेपर दिखाने से सत्य स्थापित नहीं होता'
 महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि ऋषि अजय दास कहीं नही थे इतने कुंभ बीत गए। संस्था रजिस्टर करने से कुछ नहीं होता है। दस्तावेजों को मीडिया में दिखाने से कुछ नहीं होता है। किन्नर अखाड़े में सभी की राय ली जाती है। किसी एक की नहीं चलती है। पेपर दिखाने से सत्य स्थापित नहीं होता है।

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जानिए कौन हैं ऋषि अजय दास?



ऋषि अजय दास स्वयं को किन्नर अखाड़े का संस्थापक बताते हैं। उन्होंने कहा है कि वे किन्नर अखाड़े के संस्थापक हैं। बताया जाता है कि 13 अक्तूबर 2015 को उन्होंने उज्जैन स्थित आश्रम अध्यात्म वाटिका में किन्नर अखाड़े का गठन किया था, जिसका उद्देश्य किन्नरों को भी धर्म और अध्यात्म से जोड़कर एक नई पहचान दिलाना था। वर्ष 2016 में यह अखाड़ा सिंहस्थ महाकुंभ में भी शामिल हुआ था।



महामंडलेश्वर और श्री महंत की उपाधि दी गई
इंटरनेशनल किन्नर अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने विभिन्न प्रदेशों से आए किन्नर संतों को महामंडलेश्वर एवं श्री महंत की उपाधि देकर उनका पट्टाभिषेक किया। चांदी के शंकर पर दुग्धाभिषेक, केसरिया शाल ओढ़ाकर और पुष्पवर्षा के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह विधि संपन्न हुई।



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इस अवसर पर सूरत से दिलीपनंद गिरी, तेलंगाना से महाकालीनंद गिरी, राजस्थान से कामाख्या नंद गिरी (सीतारमण), यूपी के प्रतापगढ़ स्थित गढ़ी मानिकपुर से रेखानंद गिरी को महामंडलेश्वर बनाया गया। वहीं गुजरात की नंदिनीनंद गिरी और महाराष्ट्र के अकोला से गणेशानंद गिरी को श्री महंत की उपाधि दी गई। इसके अलावा इंदौर की सुनहरी नंद गिरी, आकांक्षा नंद गिरी, गुंजन नंद गिरी, अलोपी नंद गिरी और खुशीनंद गिरी को भी श्री महंत बनाया गया।

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