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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Khargone Marks 408-Year-Old Khappar Tradition as Goddess Ambe’s Procession Draws Thousands of Devotees

खरगोन: हाथ में जलता खप्पर और तलवार लेकर निकलीं माता अंबे, 408 साल पुरानी परंपरा देखने उमड़े 5 हजार भक्त

Mon, 19 Oct 2026 12:03 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरगोन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरगोन Published by: प्रिया वर्मा Updated Mon, 19 Oct 2026 12:03 PM IST
सार

408 साल पुरानी खप्पर परंपरा के साथ रविवार देर रात श्री सिद्धनाथ महादेव मंदिर से माता अंबे की सवारी निकली, जिसमें माता का स्वरूप धारण करने वाले ने एक हाथ में जलता खप्पर और दूसरे में तलवार लेकर दर्शन दिए।

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Khargone Marks 408-Year-Old Khappar Tradition as Goddess Ambe’s Procession Draws Thousands of Devotees
खरगोन में धूमधाम से निभाई गई 408 साल पुरानी खप्पर परंपरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नवरात्र पर्व पर रविवार देर रात क्षत्रिय भावसार समाज ने 408 साल पुरानी खप्पर परंपरा निभाई। इस दौरान भावसार मोहल्ला स्थित श्री सिद्धनाथ महादेव से माता अंबे की भव्य सवारी निकाली गई। सवारी के दौरान एक हाथ में जलता हुआ खप्पर और दूसरे हाथ में तलवार लेकर माता अंबे ने उपस्थित भक्तों को दर्शन दिए। इस पावन धार्मिक आयोजन में करीब पांच हजार भक्त पहुंचे और उन्होंने पूरे उत्साह के साथ जयकारे लगाए।

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झाड़ स्तंभ की पूजा और अंबे की सवारी
इस ऐतिहासिक खप्पर परंपरा की शुरुआत सबसे पहले झाड़ स्तंभ की पूजा से हुई। झाड़ स्तंभ पूजा के बाद तड़के साढ़े चार बजे माता अंबे जलता खप्पर और तलवार लेकर सवारी के रूप में निकलीं। वे निमाड़ी गरबियों पर करीब 30 मिनट तक रमती रहीं। इस दौरान परिसर में उपस्थित करीब पांच हजार भक्तों ने भक्तिभाव से जयकारे लगाए। इसके बाद गणेशजी, हनुमानजी और भूत-पिशाच के स्वरूप भी निकाले गए। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति गीतों के साथ माता की स्तुति की गई।
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परंपरा का इतिहास
खप्पर समिति के सदस्यों जगदीश भावसार, मधु भावसार और मनोहर भावसार ने जानकारी देते हुए बताया कि यह परंपरा 408 साल से चली आ रही है। एक ही कुल के लोग इस परंपरा को वर्षों से निभाते आ रहे हैं और इसमें हर साल हजारों की संख्या में माता भक्त शामिल होते हैं।

मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र भावसार के अनुसार सवारी में माता अंबे का रूप हरिओम और सोनू बादशाह ने धारण किया। इसके अतिरिक्त गणेशजी के रूप में दिव्यांश भावसार और गर्व बने, वहीं हनुमानजी का रूप शशिकांत पटेल ने निभाया।

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