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केंद्र में मंत्री बने रहेंगे ज्योतिरादित्य सिंधिया
जयप्रकाश पाराशर/भोपाल
Updated Fri, 06 Sep 2013 12:55 PM IST
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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान समिति (कैंपेन कमेटी) के प्रमुख बनाए गए केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपना मंत्री पद नहीं छोड़ेंगे।
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उनके विधानसभा का चुनाव लड़ने की संभावना भी कम है। कांग्रेस की चुनाव समिति की बैठक 6 सितंबर को हो रही है, जिसमें विधानसभा के उम्मीदवारों के अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया के चुनाव प्रचार के कार्यक्रम पर भी विचार किया जाएगा।
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बुधवार को भी सिंधिया अशोकनगर में है। वहां संसदीय क्षेत्र की आठों विधानसभा सीटों को जिताने की योजना पर काम कर रहे हैं।
पहले यह संभावना व्यक्त की जा रही थी कि ज्योतिरादित्य सिंधिया मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया की तरह ही मंत्रीपद छोड़कर चुनाव मैदान में कूद पड़ेंगे।
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मंत्रीपद नहीं छोड़ने के पीछे भी एक रणनीति है। उनके पास प्रचार की कमान है और केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्हें स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के प्रोटोकाल व सुरक्षा का फायदा मिलेगा। जो कांतिलाल भूरिया के पास नहीं है।
कांग्रेस के एक नेता के अनुसार, 'एक महीने के लिए क्यों उन्हें मंत्री पद से हटाया जाना चाहिए। मंत्री रहते हुए वह ज्यादा कारगर साबित हो सकते हैं।'
इस बात की भी संभावना है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया नवंबर के विधानसभा चुनावों में विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे। उल्लेखनीय है कि सिंधिया ने कभी भी विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा है। वह सीधे लोकसभा के लिए चुने गए थे। अब उनके विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ने का भी तर्क है।
प्रचार अभियान की कमान संभालने के कारण उन्हें काफी ज्यादा दौरे करने होंगे। यदि वह विधानसभा का चुनाव लड़ते हैं, तो उन्हें अपनी सीट पर भी समय देना पड़ेगा।
संभावना है कि यदि कांग्रेस बहुमत में आ जाती है और सिंधिया को मुख्यमंत्री बनाए जाने की जरूरत पड़ती है तो वह गुना जिले की चंदेरी सीट से चुनाव लड़ सकते हैं।
अभी चंदेरी सीट पर उनके खास समर्थक महेंद्र सिंह कालूखेड़ा को लड़ाए जाने की संभावना है। कालूखेड़ा अभी जावरा विधानसभा से विधायक हैं, जहां से वे मामूली अंतर से जीते थे। संभव है कि कालूखेड़ा जावरा और चंदेरी से चुनाव लड़ें और कांग्रेस के बहुमत में आने की स्थिति में चंदेरी सीट ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए खाली कर दें।
