MP High Court: नर्सिंग कॉलेजों का रिजल्ट घोषित किया जाए, हाईकोर्ट का आदेश
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक आदेश जारी किया है। आदेश के तहत कहा है कि नर्सिंग कॉलेजों का रिजल्ट घोषित किया जाए।
विस्तार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी तथा जस्टिस एके पालीवाल की युगलपीठ ने नर्सिंग कॉलेजों का रिजल्ट घोषित किए जाने के निर्देश सरकार को दिए हैं। युगलपीठ ने सत्र 2024-25 के लिए नर्सिंग तथा पैरामेडिकल कॉलेज की संबंद्धता मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी संपादित करने के आदेश जारी किए हैं। युगलपीठ ने अयोग्य कॉलेज में पाई गई अनियमिकयों को नर्सिंग काउंसिल की वेबसाइट में सार्वजनिक करने के आदेश भी जारी किए हैं। याचिका पर अगली सुनवाई 29 नवंबर को निर्धारित की गई है।
लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता विशाल बघेल की तरफ से दायर याचिका में प्रदेश में संचालित नर्सिंग कॉलेजों को चुनौती दी गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई जांच में प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में प्रवेश व मान्यता में हुई गंभीर अनियमितता को उजागर किया था। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी नर्सिंग कॉलेज की जांच करने के निर्देश सीबीआई को दिए थे।
याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने मेडिकल यूनिवर्सिटी के एक्ट के संशोधन को चुनौती देते हुए कहा गया था कि मेडिकल यूनिवर्सिटी की स्थापना स्वास्थ्य, शिक्षा के क्षेत्र में व्यवस्थित, दक्षतापूर्ण, एकरूपता पूर्ण, गुणवत्ता युक्त शिक्षा, शोध सुनिश्चित करने के प्रयोजन से की गई थी। इसे सरकार द्वारा 2024 में एक्ट में संशोधन कर नर्सिंग एवं पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों की संबद्धता का नियंत्रण क्षेत्रीय विश्वविद्यालय को सौंप दिया गया। क्षेत्रीय विश्वविद्यालय के पास स्वास्थ्य संबंधी विषयों की विशेषज्ञता नहीं है। देश के दूसरे राज्यों में स्वास्थ्य संबंधी कोर्सों का संचालन हेल्थ यूनिवर्सिटी द्वारा किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने वर्तमान परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए निर्देश दिए हैं कि सत्र 2024-25 की संबद्धता प्रक्रिया मेडिकल यूनिवर्सिटी संपादित करे।
नर्सिंग छात्रों के घोषित किए जाएं रिजल्ट
सत्र 2019-20 एवं 2020-21 के विभिन्न नर्सिंग पाठ्यक्रमों की वार्षिक तथा सेमेस्टर परीक्षाएं हाईकोर्ट के आदेश पर मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा ली गई थी। युगलपीठ ने इन परीक्षाओं के परिणाम जारी करने की अनुमति मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी प्रदान कर दी है, जिससे हज़ारों छात्र को राहत मिल सकेगी।
अयोग्य कॉलेजों की रिपोर्ट की जाए सार्वजनिक
मध्यप्रदेश के लगभग 700 नर्सिंग कॉलेजों की हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने जांच की थी। सीबीआई ने अपनी जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में हाईकोर्ट के समक्ष पेश की थी। युगलपीठ ने जांच में पाए अयोग्य कॉलेजों की सूची तथा उसमें पाई गई कमियों को नर्सिंग काउंसिल की वेबसाइट पर सार्वजनिक करने के आदेश जारी किए है।
डीएमई और रजिस्ट्रार के निर्णयों पर हाईकोर्ट ने व्यक्त की नाराजगी
हाईकोर्ट ने अभ्यावेदन संबंधी मामले की सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से नर्सिंग काउंसिल के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराज़गी व्यक्त करते हुए डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन के निर्णयों पर हैरानी जताई है। याचिकाकर्ता की तरफ से अनियमितता में लिप्त इंस्पेक्टर को रजिस्ट्रार बनाये जाने को चुनौती हुए आवेदन दायर किया था। युगलपीठ ने ने महाधिवक्ता को दोषी रजिस्ट्रार पर एक्शन लेने के मौखिक रूप से निर्देश देते हुए हिदायत दी है कि याचिका लंबित रहते यदि अधिकारियों द्वारा कोई लापरवाही बरती गई तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा।
पीजी काउंसिलिंग के रिजल्ट घोषित करने पर रोक
एमडी-एमएस कोर्स में दाखिले के लिए नीट-पीजी काउंसलिंग में प्रदेश के रजिस्टर्ड कैंडिडेट्स की मेरिट सूची में दूसरी बार नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया अपनाये जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस सुश्रुत धर्माधिकारी तथा जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने काउंसलिंग के रिजल्ट घोषित किये जाने पर रोक लगा दी है।
रीवा के डॉ. अभिषेक शुक्ला व अन्य की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि नीट के द्वारा पीजी कोर्स में दाखिले के लिए मैरिट लिस्ट तैयार की गयी थी। नीट के द्वारा नॉर्मलाइज़ेशन प्रोसेस अपनाते हुए मैरिट लिस्ट जारी की गयी थी। प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के रजिस्टर्ड कैंडिडेट्स की मैरिट लिस्ट तैयार करने में दूसरी बार नॉर्मलाइज़ेशन प्रोसेस अपनाया गया, जिसके कारण नीट के मैरिट लिस्ट में अच्छी रेटिंग होने के बावजूद भी प्रदेश की मेरिट लिस्ट में उनका स्थान नीचे हो गया।
याचिकाकर्ताओं की तरफ से पैरवी करते हुए अधिवक्ता आदित्य संघी ने युगलपीठ को बताया कि पहले राउंड के लिए चॉइस फिलिंग और चॉईस लॉकिंग की प्रक्रिया शुरु हो चुकी, जो 24 नवम्बर की रात 12 बजे तक चलेगी,जिसका रिजल्ट 26 नवम्बर को घोषित किया जाना है। एडमिशन की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं हो रहा, पहले राउंड के रिजल्ट घोषित करने पर रोक लगाई जाए।
सरकार की तरफ से तर्क दिया गया कि नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंस नई दिल्ली द्वारा मेरिट लिस्ट तैयार की गई है। इसके बाद मप्र में पूरी प्रक्रिया का विधिवत पालन किया गया, इसलिए मामले में याचिका पर अंतरिम राहत नहीं दी जाना चाहिए। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों के तहत पहले राउंड की काउंसलिंग कराने की इजाजत तो दी, लेकिन अगली सुनवाई तक रिजल्ट घोषित करने पर रोक लगा दी।
