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MP HighCourt: निर्भया मामले में पारित गाइड लाइन का पालन करने के लिए जारी किए जा चुके हैं निर्देश, याचिका खारिज
Fri, 11 Nov 2022 08:48 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 11 Nov 2022 08:48 PM IST
सार
याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट में ऐसे प्रकरणों की सुनवाई का प्रसारण यू-टयूब में किया जाता है। सुनवाई के दौरान जो टिप्पणी की जाती है उसकी रिकॉर्डिंग कर उसे सोशल मीडिया में वायरल कर दिया जाता है।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दुष्कर्म, पॉक्सो सहित अन्य मामले की सुनवाई के संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्भया मामले में पारित आदेश का पालन नहीं किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि हाईकोर्ट में ऐसे प्रकरणों की सुनवाई का प्रसारण यू-टयूब में किया जाता है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी गाइड लाइन के परिपालन के निर्देश पूर्व में जारी किए जा चुके हैं। याचिकाकर्ता को कोई आपत्ति है तो वह अभ्यावेदन पेश कर सकते हैं।
ग्वालियर की अधिवक्ता संगीता पचौरी की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया है कि निर्भया तथा अर्पणा भट्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किए हैं कि दुष्कर्म, पॉक्सो, छेड़छाड़ सहित अन्य मामले में पीड़ितों का नाम व पहचान उजागर नहीं होना चाहिए। ऐसा करना धारा 354 डी के तहत अपराध माना गया है।
याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट में ऐसे प्रकरणों की सुनवाई का प्रसारण यू-टयूब में किया जाता है। सुनवाई के दौरान जो टिप्पणी की जाती है उसकी रिकॉर्डिंग कर उसे सोशल मीडिया में वायरल कर दिया जाता है। ऑनलाइन सुनवाई के कारण पीड़िता की पहचान सामने आ जाती है। याचिका में पीआर व आईसी सेल ग्वालियर हाईकोर्ट, प्रमुख सचिव गृह विभाग, डीजीपी तथा एसपी ग्वालियर को अनावेदक बनाया गया है। युगलपीठ ने शुक्रवार को सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया।
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ग्वालियर की अधिवक्ता संगीता पचौरी की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया है कि निर्भया तथा अर्पणा भट्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किए हैं कि दुष्कर्म, पॉक्सो, छेड़छाड़ सहित अन्य मामले में पीड़ितों का नाम व पहचान उजागर नहीं होना चाहिए। ऐसा करना धारा 354 डी के तहत अपराध माना गया है।
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याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट में ऐसे प्रकरणों की सुनवाई का प्रसारण यू-टयूब में किया जाता है। सुनवाई के दौरान जो टिप्पणी की जाती है उसकी रिकॉर्डिंग कर उसे सोशल मीडिया में वायरल कर दिया जाता है। ऑनलाइन सुनवाई के कारण पीड़िता की पहचान सामने आ जाती है। याचिका में पीआर व आईसी सेल ग्वालियर हाईकोर्ट, प्रमुख सचिव गृह विभाग, डीजीपी तथा एसपी ग्वालियर को अनावेदक बनाया गया है। युगलपीठ ने शुक्रवार को सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया।
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