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नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा मामलाः तीन महीने में पूरी होनी चाहिए सुनवाई, IA पर जवाब पेश करने सरकार को मिला समय

Fri, 08 Sep 2023 08:47 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Fri, 08 Sep 2023 08:47 PM IST
सार

नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा मामले की सुनवाई के दौरान पेश अंतिम आवेदन में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए तीन महीने में याचिकाओं की सुनवाई पूर्ण की राहत चाही गई। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने सरकार ने आईए पर जवाब पेश करने समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। युगलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई 20 सितंबर को निर्धारित की है।
 

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Nursing college fraud case Hearing should be completed in three months government got time to present reply on
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा मामले में याचिकाकर्ता लॉ स्टूडेंट एसोसियेशन के अध्यक्ष एडवोकेट विशाल बघेल की तरफ से दायर याचिका में फर्जी तरीके से नर्सिंग कालेज संचालित होने को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया है कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 में प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में 55 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता दी गई। वास्तविकता में यह कॉलेज सिर्फ कागज में संचालित हो रहे हैं। अधिकांश कॉलेज की निर्धारित स्थल में बिल्डिंग तक नहीं है। कुछ कॉलेज सिर्फ चार-पांच कमरों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे कॉलेज में प्रयोगशाला सहित अन्य आवश्यक संरचना नहीं हैं। बिना छात्रावास ही कॉलेज का संचालन किया जा रहा है।

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याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया था कि एक ही व्यक्ति कई नर्सिंग कॉलेज के प्राचार्य है और फैक्टली भी अगल-अलग कॉलेज में कार्यरत है, जिस कॉलेज में कार्यरत है उनकी दूरी सैकड़ों किलोमीटर दूर है। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मप्र नर्सिंग रजिस्टेशन कौसिंल के रजिस्टार को तत्काल निलंबित कर प्रशासक नियुक्त करने के आदेश जारी किये थे। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि आदेश के बावजूद भी सरकार ने प्रशासक को हटाकर रजिस्टार को नियुक्त कर दिया है। इसके अलावा पूर्व रजिस्टार के खिलाफ सिर्फ दिखावटी कार्यवाही की गई है, जिसके बाद युगलपीठ ने डीएमई को तलब किया था।
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डीएमई अरुण श्रीवास्तव ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर मांफी मांगते हुए पूर्व रजिस्टार के खिलाफ उचित कार्रवाई के संबंध में शपथ-पत्र प्रस्तुत किया था। पिछली सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि सरकार के रवैये के कारण हमारा विचार है कि जांच सीबीआई को सौंप दी जाए। युगलपीठ ने ग्वालियर पीठ में नर्सिंग कॉलेज संबंधित याचिकाओं को मुख्यपीठ स्थानांतरित करने के आदेश जारी किये थे।
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याचिका पर शुक्रवार को याचिकाओं पर संयुक्त रूप से हुई सुनवाई के दौरान अनावेदक कॉलेज की तरफ पेश किये गये अंतरिम आवेदन में कहा गया कि ग्वालियर खंडपीठ ने प्रदेश के 650 मेडिकल कॉलेजों में से 364 कॉलेजों की सीबीआई के आदेश जारी करते हुए परीक्षा पर रोक लगा दी थी। परीक्षा में रोक लगाये जाने के खिलाफ छात्रों ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने तीन महीने में याचिकाओं के निर्धारण के लिए तीन माह की समय अवधि निर्धारित की थी। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक बागरेजा ने पैरवी की।

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