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MPPSC 2019: चयनित अभ्यर्थियों से फिर मुख्य परीक्षा कराना अन्याय, हाईकोर्ट ने दिए विशेष परीक्षा के निर्देश
Wed, 14 Dec 2022 12:20 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Wed, 14 Dec 2022 12:20 PM IST
सार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पीएससी 2019 की मुख्य परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों के लिए विशेष परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चयनित अभ्यर्थियों को दोबारा मुख्य परीक्षा में शामिल करने के फैसले को अन्याय बताया है।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने MPPSC-2019 की मुख्य परीक्षा एक बार फिर करवाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस नंदिता दुबे की सिंगल बैंच ने अपने आदेश में कहा कि हाईकोर्ट के आदेश की व्याख्या आयोग ने मनमाने तरीके से की है। न्यायालय ने अपने आदेश में परीक्षा असंशोधित नियम 2015 के तहत करवाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि नई सूची में अनारक्षित वर्ग के जिन अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, उनके लिए आयोग छह माह में विशेष परीक्षा आयोजित करें।
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मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की MPPSC-2019 की मुख्य परीक्षा में चयनित 102 अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में पांच याचिकाएं दायर की थी। इनमें कहा गया है कि MPPSC-2019 की प्रारंभिक परीक्षा परिणाम को रिवाइज करते हुए मुख्य परीक्षा की नई सूची तैयार की है। पूर्व में आयोजित MPPSC-2019 की मुख्य परीक्षा के रिजल्ट को निरस्त कर दिया गया है। मुख्य परीक्षा में उनका चयन हो गया था। साक्षात्कार होना था। आयोग के आदेश की वजह से उन्हें फिर से मुख्य परीक्षा में शामिल होना पड़ेगा।
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याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि 571 पदों के लिए 3.6 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। MPPSC की प्रारंभिक परीक्षा जनवरी 2022 में आयोजित की गई थी। संशोधित नियम 2015 के तहत परीक्षा परिणाम घोषित करने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई थी। इस दौरान आयोग ने मुख्य परीक्षा का आयोजन कर लिया। मुख्य परीक्षा में उनका चयन हो गया है। सिर्फ साक्षात्कार की प्रक्रिया शेष है। हाईकोर्ट ने असंशोधित नियम 2015 का पालन करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने परीक्षा निरस्त करने का आदेश नहीं दिया है। MPPSC की 2011, 2013 और 2015 के परीक्षा परिमाण में संशोधन कर नए अभ्यर्थियों के लिए विशेष परीक्षा का आयोजन किया गया था। चयनित होने के बाद मुख्य परीक्षा निरस्त करना उनके साथ अन्याय है।
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आयोग पर बरसा हाईकोर्ट
सिंगल बैंच ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश की व्याख्या लोक सेवा आयोग ने मनमाने तरीके से की है और मुख्य परीक्षा फिर से करवाने का निर्णय लिया है। सिंगल बैंच ने अपने आदेश में कहा है कि प्रारंभिक परीक्षा की रिवाइज लिस्ट में आरक्षित वर्ग के नवयोग्य अभ्यर्थियों की संख्या 2721 है। मुख्य परीक्षा में अनारक्षित अभ्यर्थियों की संख्या 1918 है। मुख्य परीक्षा में 10767 अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जिसमें से 8894 परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सके थे। जिन अभ्यर्थियों का सिलेक्शन हो गया और साक्षात्कार के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया, उनकी फिर से परीक्षा कराना उनके साथ अन्याय होगा। फिर से मुख्य परीक्षा कराने में अतिरिक्त व्यय होगा, जो जनहित में नहीं है। पहले की ही तरह नई सूची के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों के लिए विशेष परीक्षा अगले छह माह में आयोजित की जाए। पूर्व की मुख्य परीक्षा तथा विशेष परीक्षा के परिमाण अनुसार अंतिम सूची तैयार की जाए।
फैसले के खिलाफ अपील करेंगे
अधिवक्ता रामेश्वर सिंह का कहना है कि आदेश के खिलाफ वह अपील दायर करेंगे। इंटरविनर की तरफ से पैरवी करते हुए उन्होंने तर्क दिया कि एक भर्ती की दो अलग-अलग परीक्षाएं लेना संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 का उल्लघन होगा। दो अलग-अलग परीक्षा में उत्तीर्ण उक्त आदेश के विरुद्ध शीघ्र ही डबल बेंच में रिट अपील दायर की जाएगी।
