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Jabalpur High Court: अवैधानिक नियम के तहत जारी किया गया था रिजल्ट, MPPSC 2019 का मामला दोबारा पहुंचा कोर्ट
Tue, 11 Apr 2023 09:33 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Tue, 11 Apr 2023 09:33 PM IST
सार
एमपीपीएससी 2019 की मुख्य परीक्षा के संबंध में एकलपीठ द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई थी। दायर अपील में कहा गया था कि एकलपीठ ने एमपीपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। अपील दायर करने में देरी के कारण पर सुनवाई 13 अप्रैल को निर्धारित की गयी है।
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जबलपुर हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मध्यप्रदेश के एमपीपीएससी 2019 की मुख्य परीक्षा के संबंध में रायसेन निवासी छात्रा उज्जवला दुबे तथा सतना निवासी छात्र शैलेन्द्र सिंह की तरफ से दायर अपील में कहा था कि एकलपीठ ने एमपीपीएससी 2019 परीक्षा में असंशोधित नियम 2015 का पालन करने के निर्देश दिए थे। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि असंशोधित नियम के तहत नवीन सूची में अनारक्षित वर्ग के जिन अभ्यार्थियों का चयन हुआ है, उनके लिए छह महीने में पीएससी विशेष परीक्षा आयोजित करे।
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एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि जिन अभ्यार्थियों का मुख्य परीक्षा में चयन हो गया है और साक्षात्कार के लिए शॉर्ट लिस्ट किया गया है। दोबारा परीक्षा उनके साथ अन्याय होगा। जो अभ्यार्थी मुख्य परीक्षा क्लीयर नहीं कर पाए हैं, उनके लिए दोबारा का कोई अवसर नहीं है। दोबारा मुख्य परीक्षा करवाने में अधिक व्यय होगा, जो जनहित में नहीं है।
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नवीन सूची के अनुसार, चयनित अभ्यार्थियों के लिए विशेष परीक्षा छह महीने में आयोजित की जाए। पूर्व की मुख्य परीक्षा तथा विशेष परीक्षा के परिमाण अनुसार, अंतिम सूची तैयार की जाए। एकलपीठ के आदेश के खिलाफ दायर अपील को हाईकोर्ट की युगलपीठ ने खारिज कर दी थी। एकलपीठ के आदेश के खिलाफ दोबारा अपील दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि प्रारंभ से एमपीपीएससी परीक्षा में असंशोधित नियम का पालन नहीं किया गया है।
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नियम के खिलाफ तरीके से रिजल्ट जारी किए गए हैं। असंशोधित नियम के तहत रिजल्ट तैयार नहीं किया गया तो पूरी प्रक्रिया ही अवैधानिक है, जिसके कारण एकलपीठ द्वारा अनारक्षित वर्ग के लिए विशेष परीक्षा आयोजित करने का आदेश अवैधानिक है। यह तथ्य पूर्व में दायर अपील की सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया था। अपील की प्रारंभ सुनवाई के बाद युगलपीठ ने नोटिस जारी करते हुए उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता विभोर खंडेलवार ने पैरवी की।
