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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   Jabalpur High Court: fine of 20 thousand rupees on District Collector, said Cut copy and paste will not work in order of District Magistrate

कट-कॉपी-पेस्ट नहीं चलेगा : हाईकोर्ट की कलेक्टर के जिलाबदर आदेश पर सख्त हिदायत, लगा 20 हजार रुपये जुर्माना, बड़ी बेंच के सामने पहुंचा मामला

Sun, 28 Nov 2021 02:58 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर। Published by: योगेश साहू Updated Sun, 28 Nov 2021 02:58 AM IST
सार

एकलपीठ ने जिला दंडाधिकारी को 30 दिन के भीतर जुर्माने की रकम हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराने के निर्देश दिए। एकलपीठ ने याचिकाकर्ता को उक्त रकम लेने की स्वतंत्रता दी थी। एकलपीठ के उक्त आदेश के खिलाफ सरकार ने रिट अपील दायर की है।

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Jabalpur High Court: fine of 20 thousand rupees on District Collector, said Cut copy and paste will not work in order of District Magistrate
कोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर।) - फोटो : iStock

विस्तार

जिलाबदर के आदेश में कट, कॉपी, पेस्ट की प्रकिया नहीं चलेगी। हाईकोर्ट ने एक मामले यह टिप्पणी करते हुए जबलपुर कलेक्टर पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। अब इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने रिट अपील दायर की है। जिस पर शनिवार को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार तथा जस्टिस विजय शुक्ला की युगलपीठ ने प्राथमिक सुनवाई की। पीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई अगामी सप्ताह में निर्धारित की है। आइए जानते हैं हाईकोर्ट को आखिर ऐसी टिप्पणी क्यों करनी पड़ी।

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यह है मामला
दरअसल, डुमना रोड ककरतला निवासी रज्जन यादव ने जिलाबदर की कार्यवाही को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि वर्षों पुराने एक अपराधिक प्रकरण के आधार पर उसके खिलाफ उक्त कार्यवाही की गई है। जिला दंडाधिकारी (कलेक्टर) ने बचाव का पर्याप्त अवसर दिए बिना ही उसके खिलाफ आदेश पारित किया है। 
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रज्जन यादव के खिलाफ खमरिया पुलिस ने 28 जुलाई 2020 को धारा 327, 294, 506 के तहत प्रकरण दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने उसके खिलाफ जिलाबदर की कार्रवाई करने की जिला दंडाधिकारी से अनुशंसा की थी। पुलिस अधीक्षक ने जिस दिन अनुशंसा की थी उसी दिन जिला दंडाधिकारी ने नोटिस जारी कर दिए थे। 
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सुनवाई के दौरान खमरिया थाना प्रभारी ने अपने बयान में बताया था कि यादव के खिलाफ साल 2016 से 2020 तक कोई अपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं हुआ था। इसके बावजूद भी जिला दंडाधिकारी ने उसके खिलाफ 28 जुलाई 2020 को जिलाबदर का आदेश पारित कर दिया।

हाईकोर्ट ने कहा- जिला दंडाधिकारी ने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा था कि जिला दंडाधिकारी ने आदेश जारी करते समय अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया। जिला दंडाधिकारी के आदेश से स्पष्ट है कि उन्होंने दुर्भावना से प्रेरित होकर उक्त कार्रवाई की है। इसके पहले भी जिला दंडाधिकारी ने पूर्व में याकिचाकर्ता के खिलाफ जिला बदर का आदेश पारित किया था, उससे स्पष्ट है कि उन्होंने प्रकिया के पालन में केवल औपचारिकता निभाई है। पूर्व में जारी जिलाबदर आदेश के फैसले की कॉपी को कट और पेस्ट किया है। अधिकारी को आदेश जारी करते समय कट-पेस्ट की प्रवृत्ति को अपनाने की बजाय तार्किक निर्णय पारित करना चाहिए था।  

एकल पीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा था
एकल पीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि अपील का निराकरण करना महज औपचारिकता नहीं है। अपीलीय अधिकारी को यांत्रिकता पूर्वक नहीं वरन प्रकरण की सूक्ष्म जांच के बाद उसकी गंभीरता देखते हुए फैसला करना चाहिए। एकलपीठ ने जिला दंडाधिकारी के द्वारा जिलाबदर के आदेश को निरस्त करते हुए 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। 


एकलपीठ ने जिला दंडाधिकारी को 30 दिन के भीतर जुर्माने की रकम हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराने के निर्देश दिए। एकलपीठ ने याचिकाकर्ता को उक्त रकम लेने की स्वतंत्रता दी थी। एकलपीठ के उक्त आदेश के खिलाफ सरकार ने रिट अपील दायर की है। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता आरके वर्मा उपस्थित हुए।

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